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अमेरिका: रूस पर प्रतिबंध वाला विधेयक मंज़ूर, भारत समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ़ का प्रावधान

✍️ Admin 📅 08 August, 2026 ⏰ 09:03 AM 👁 53 views

इमेज स्रोत, Mandel NGAN / AFP via Getty Images अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख ख़रीदारों, जैसे चीन और भारत को दंडित करने वाले एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी. अमेरिकी सांसदों का दावा है कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने में मदद करता है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, विधेयक का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कर दिया गया है. सीनेट ने इसे 86-11 मतों से मंजूरी दी. यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के तेल और गैस के शीर्ष पांच आयातक देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हेसेट जब इस मामले में सवाल किया गया कि क्या यह विधेयक भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बातचीत पर असर डाल सकता है, तो उन्होंने कहा, "यह वार्ताकारों पर निर्भर करता हैं. जो प्रक्रिया चल रही है, मैं उसके बारे में कुछ नहीं कह सकता." यूरोपीय संघ के दो देशों स्पेन और इटली के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. स्पेन ने इटली से आने वाली सभी हवाई और समुद्री यात्राओं पर सीमा नियंत्रण लागू कर दिया है. ये कदम आधी रात से लागू हो गए हैं और एक महीने तक जारी रहेंगे. स्पेन ने यह फ़ैसला इटली की ओर से इसी तरह के प्रतिबंध लगाए जाने के एक सप्ताह बाद उठाया है. इटली ने मोरक्को से क़रीब 78,000 प्रवासियों के स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में आने के बाद ये प्रतिबंध लगाए थे. दरअसल मोरक्को के उत्तरी तट पर स्थित स्यूटा, जिब्राल्टर स्ट्रेट के पार मुख्य भूमि स्पेन से अलग है और लंबे समय से यूरोप पहुँचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों के लिए एक प्रमुख एंट्री पॉइंट रहा है. स्यूटा भौगोलिक रूप से अफ़्रीकी महाद्वीप में है और मोरक्को से घिरा है. यह यूरोपीय देश स्पेन के अधीन एक इलाक़ा है. शुक्रवार को स्पेन ने इटली से रविवार तक अपनी सीमा निगरानी वापस लेने की मांग की. इटली ने कहा कि ये जांच कम से कम 15 अगस्त तक जारी रहेंगी. इटली ने कहा कि उसे आशंका है कि स्पेन को स्यूटा में प्रवासियों के प्रवेश की एक नई लहर का सामना करना पड़ेगा. इस संकट ने स्पेन के समाजवादी नेता पेड्रो सांचेज़ और इटली की रूढ़िवादी नेता जॉर्जिया मेलोनी को आमने-सामने ला दिया है. मेलोनी लंबे समय से यूरोपीय संघ के प्रवासन नियमों को सख्त करने की मांग करती रही हैं. इटली की स्पेन के साथ कोई ज़मीनी सीमा नहीं है. इटली की सरकार ने पिछले सप्ताह कहा था कि सीमा-मुक्त शेंगेन व्यवस्था को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला इसलिए लिया गया, ताकि स्यूटा में प्रवेश कर चुके प्रवासियों में से कोई इटली न पहुंच सके. शेंगेन व्यवस्था के तहत 25 से ज़्यादा यूरोपीय देशों में लोग बिना पासपोर्ट के आना-जाना कर सकते हैं. स्पेन ने इटली की इस दलील को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह "झूठे तर्कों" पर आधारित है और इसका तथ्यों से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि स्यूटा में दाखिल हुए प्रवासियों के पास शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश करने का कोई रास्ता नहीं था. ईरान ने मुसलमानों और खाड़ी क्षेत्र के देशों से एकजुटता की अपील की है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान की ताक़तवर सेना ने दुनिया की सबसे महंगी सेना के सामने अपनी तैयारी, क्षमता और ताक़त का प्रदर्शन किया है." उन्होंने लिखा, "अगर मुसलमान एकजुट रहते हैं, तो हम बाहरी लोगों की बुरी नीयत वाली हर चुनौती का डटकर सामना कर सकते हैं." "अब समय आ गया है कि हम सिर्फ़ खुद पर भरोसा करें और सच्चे भाईचारे को अपनाएं." ईरान की आधिकारिक न्यूज़ एजेंसी इरना (आईआरएनए) ने भी अराग़ची के इस बयान को शेयर किया है. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और यूरोप के साथ बातचीत को लेकर ईरान के रुख़ का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए बातचीत जारी रखने को तैयार है, लेकिन ऐसी मांगों को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी संप्रभुता या रक्षा क्षमताओं को कमज़ोर करती हों. उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों, देश के नेतृत्व और सशस्त्र बलों के साथ तालमेल के साथ ही ईरान के इसराइल और अमेरिका के साथ संघर्ष के बीच क्षेत्रीय विभाजन को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया. बीबीसी हिंदी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. इस समय बीबीसी हिंदी के पन्ने पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरें आप नीचे दिए लिंक्स पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं. - एफ़सीआरए क़ानून में संशोधनों के प्रस्ताव को अमेरिकी सांसद ने बताया 'ईसाई विरोधी', क्या है पूरा मामला? - बेनज़ीर भुट्टो की सरकार को बर्ख़ास्त करने में पाकिस्तानी आर्मी की क्या भूमिका थी? - तरुण तेजपाल केस: फ़ैसले में सर्वाइवर के पक्ष में कही गईं ये तीन बातें - क्या शेर वाक़ई घास खाता है, वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल

स्रोत: BBC Hindi

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