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साल 2023 से पहले की गाड़ियों के लिए क्या ई20 से जुड़ी नीति नुक़सानदायक है? - द लेंस

✍️ Admin 📅 11 July, 2026 ⏰ 03:16 PM 👁 45 views

ई20 यानी पेट्रोल में 20 फ़ीसदी इथेनॉल मिलाया जाना. आप सोचेंगे कि ये कोई नई नीति तो नहीं है तो इस पर अचानक क्यों बहस होने लगी? दरअसल कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जब ये कहा गया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना एक प्रयोग यानी एक्सपेरिमेंट है तो लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ियों और उसके माइलेज पर एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है. सरकार ने बाद में उसका खंडन जारी किया मगर तब तक बात सोशल मीडिया पर फैल गई और तरह-तरह के दावे होने लगे. भारत ने 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर 2022 में हासिल किया था और उसके सिर्फ़ तीन साल के भीतर ये हिस्सा बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया. सरकार ने पहले ऐसा करने का लक्ष्य 2030 तक रखा था मगर बाद में 2025 तक ही इसे पूरी तरह लागू कर दिया. ऐसे में कई सवाल भी उठ रहे हैं. क्या इससे सचमुच गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है? इथेनॉल बनता किस चीज़ से है? इस पर हुई अब तक की रिसर्च क्या बताती है? ब्राज़ील में ये नीति कैसे सफल हो गई? क्या इसका असर सिर्फ़ माइलेज तक सीमित है या फिर लंबे समय में ये असर इंजन और फ्यूल सिस्टम के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है? सरकार का क्या कहना है? द लेंस के आज के एपिसोड में ऐसे सभी सवालों पर चर्चा की गई. इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए पेट्रोलियम विषयों से जुड़े विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा, ऑटो एक्सपर्ट अमित खरे और इंस्टीट्यूट फ़ॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फ़ाइनेंशियल एनालिसिस में ऊर्जा विशेषज्ञ स्वाति शेषाद्रि. नोट: द लेंस का ये एपिसोड गुरुवार 9 जुलाई को रिकॉर्ड किया गया है. प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर, सईदुज़्ज़मान बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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