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बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को तीन महीने की जेल, कहा था- पांच बार जेल जाने को तैयार लेकिन एक पैसा भी नहीं देंगे

✍️ Admin 📅 11 July, 2026 ⏰ 07:18 AM 👁 74 views

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई है. राजपाल यादव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराने वाली कंपनी के वकील के अनुसार, "दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखा है और उन्हें शिकायतकर्ता को राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है." राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव भी इस मामले में सह-अभियुक्त हैं और अदालत ने उन्हें भी पैसे चुकाने का आदेश दिया है. साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी एक फ़िल्म 'अता, पता, लापता' के लिए 'मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक निजी कंपनी से क़रीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया था. हालांकि, फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही और यह निवेश कथित तौर पर डूब गया, जिसके कारण वह कंपनी को कर्ज़ वापस नहीं कर पाए. पिछली अदालती कार्यवाही के अनुसार, राजपाल यादव ने बार-बार पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन ऐसा करने में नाकाम रहे. इस दौरान, अदालतों ने भी उनके ख़िलाफ़ आदेश जारी किए, लेकिन उन्होंने समय पर इन आदेशों का पालन नहीं किया. बाद में, राजपाल यादव ने कंपनी को सात चेक दिए जो बाउंस हो गए. इसके बाद उनके ख़िलाफ़ एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया. साल 2018 में पहली बार दिल्ली की एक अदालत ने राजपाल यादव को इस मामले में दोषी पाया और छह महीने जेल की सज़ा सुनाई. साल 2018 में यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने उनकी सज़ा पर रोक लगा दी. पिछले कुछ वर्षों में, अदालतों ने राजपाल यादव की सज़ा के ख़िलाफ़ कई बार रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं, जिसमें उन्हें पैसे चुकाने के लिए कहा गया. लेकिन वे पैसों का भुगतान करने में असमर्थ रहे. उसके बाद अदालत ने उन्हें इस साल फरवरी में जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया. राजपाल फ़रवरी 2026 में कुछ दिनों तक जेल में रहे और फिर 1.5 करोड़ रुपये की किस्त जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम ज़मानत मिल गई. हालांकि, इसके बाद वे अदालत में दिए गए आश्वासन को पूरा नहीं कर सके. लाइव लॉ के मुताबिक़ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव को सभी सातों मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण क़ैद की सज़ा सुनाई है. अदालत ने निर्देश दिया है कि सभा सज़ाएं साथ-साथ चलेंगीं. शुक्रवार को अदालत ने हर मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये के भुगतान करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा शिकायतकर्ता को 1 करोड़ा चार लाख 75 हज़ार रुपये और राज्य को 25 हज़ार रुपये देने का भी आदेश दिया है. अदालत ने राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी हर मामले में शिकायतकर्ता को पांच करोड़ 51 हज़ार 380 रुपये भुगतान करने का निर्देश भी दिया है. अदालत ने कहा कि सेशन कोर्ट ने समझौते के तहत राजपाल यादव को पहले ही शिकायतकर्ता को किए गए भुगतान को ध्यान में रखा था और ज़ुर्माना तय करने में ट्रायल कोर्ट की ओर से कोई भी ग़लती नहीं हुई. जस्टिस शर्मा ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को पहले ही 2.25 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, ये राशि अंतिम ज़ुर्माना और मुआवज़ा तय करने में समायोजित की जाएगी. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. कोर्ट ने राजपाल यादव को इस सज़ा के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए दो महीने का समय दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अभिनेता राजपाल यादव की ओर से कंपनी को पहले ही भुगतान की जा चुकी 2.25 करोड़ रुपये की राशि कुल राशि में से काट ली जाएगी. शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स कंपनी के वकील अविनाश सिक्का ने फ़ैसले के बाद पत्रकारों को बताया कि अदालत ने मामले की सुनवाई के आखिरी दिन राजपाल यादव के बयान को अपने अंतिम फ़ैसले में दर्ज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह पांच बार जेल जाने के लिए तैयार हैं लेकिन एक पैसा भी नहीं देंगे. राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने कहा है कि राजपाल यादव ने अदालत में बताया था कि एक अपराध के लिए उन्हें कितनी बार सज़ा दी जाएगी. उन्होंने दावा किया कि ''हमने मामला हाई कोर्ट में आने से पहले ही 4.5 करोड़ रुपये वसूल कर लिए थे. लेकिन इतने सारे मामले हैं कि कुछ में बकाया राशि 11.5 करोड़ रुपये बताई गई है. दीवानी फैसले में इसे 10.5 करोड़ रुपये बताया गया है.'' उन्होंने आगे कहा, "हाई कोर्ट ने कहा है कि इस अदालत में अब तक एकत्र की गई राशि ही जोड़ी जाएगी. हमने इस अदालत में 2.25 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं, केवल उसी पर विचार किया जाएगा. यानी, हाई कोर्ट में आने से पहले हमने जो 4.5 करोड़ रुपये जमा किए थे, वह शून्य हो गए हैं." भास्कर उपाध्याय ने आगे कहा, "हमने अभी तक विस्तृत फ़ैसले को नहीं देखा है. हमें इन सभी पहलुओं की जांच करनी होगी. हमारे पास अपील करने के लिए अब दो महीने का समय है. हम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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