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Death

'दुनिया में शांति लाने के बाद अब पाकिस्तान के नेता अपने लोगों के आटे-दाल के बारे में सोचें': ब्लॉग

✍️ Admin 📅 23 June, 2026 ⏰ 02:58 PM 👁 35 views

अमेरिका और इसराइल ईरान को आज़ाद कराने के लिए आगे बढ़े थे लेकिन अमेरिका रास्ते में ही अटक गया या कह लीजिए कि वह थक गया. उसने कहा कि इतने बम गिराए , इतने नेता मारे, बच्चों के स्कूल तक उड़ा दिए लेकिन ईरानी फिर भी अपनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरे. अगर उतरे भी, तो 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए निकले. ईरान के पूर्व सम्राट का समर्थन करने वाले जो लोग यूरोप और अमेरिका में बैठे थे, वे दो-चार दिन तक सड़कों पर निकल कर नाचे. लोगों को समझ आ गया कि उनके बस का कुछ भी नहीं है. वे बस यह चाहते हैं कि उन्हें अमेरिकी और इसराइली टैंकों पर बिठा कर तेहरान ले जाओ और एक बार फिर बादशाह बना दो . अपने अरबों डॉलर गंवाकर, पूरी दुनिया में पेट्रोल और गैस के दाम बढ़ा कर, गरीबों की चीखें निकलवाकर, अब अमेरिका ने कहा है कि चलो समझोता करते हैं. जो काम वियतनाम में और फिर अफ़ग़ानिस्तान में कई सालों बाद किया गया, वही ईरान में कुछ ही महीनों में हो गया. पाकिस्तान मध्यस्थ बना. आधी सदी के दुश्मनों के बीच सुलह करा दी है या कम से कम कोशिश बहुत की है, फुर्ती बहुत दिखाई है. तेहरान, इस्लामाबाद, बीजिंग, वॉशिंगटन हर जगह पर पाकिस्तान की तारीफ़ हुई है. सज्जनों ने तो तारीफ़ करनी ही थी. जिन्हें पाकिस्तान की नीयत पर शक भी होता था, उन्होंने भी कहा है कि पाकिस्तान पहले पागल हुआ करता था, अब यह बहुत समझदार हो गया है. पड़ोस में इंडिया में कुछ लोग ज्यादा खुश नहीं दिखे. वह चीखते रहे हैं कि ये आतंकवादी हैं, ये डबल गेम खेलते हैं, इनकी बातों पर भरोसा मत करो. पाकिस्तान और अमेरिका पहले मिलकर दूसरों के साथ डबल गेम खेलते रहे हैं, लेकिन सुलह करवाना तो काम ही डबल गेम का होता है. चाहे भविष्य में जंग एक बार फिर शुरू हो जाए लेकिन पुराने दुश्मनों को एक बार बातचीत की मेज पर ले आना, बस कुछ दिनों के लिए जंग रुकवा देना, यह भी एक बड़ा काम है. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल का दुनिया में बड़ा नाम हो गया है. कहते हैं कि पाकिस्तान की बाहरी दुनिया में इमेज भी काफ़ी सुधरी है. ये लीडर अब दुनिया की समस्याओं को हल करके अपने वतन लौट आए हैं और यहां तो कुछ भी नहीं बदला है. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. पाकिस्तान को शाबाशी अमेरिका से पहले भी मिलती रही है. फील्ड मार्शल अयूब खान अमेरिका के दोस्त थे. जनरल ज़िया-उल-हक़ की, फिर जनरल मुशर्रफ़ की भी व्हाइट हाउस में पार्टियाँ होती रही है. शाबाशियां भी मिली है. पहले तारीफ़ के साथ पाकिस्तान को चार सिक्के भी मिल जाते थे. चाहे वह सहायता पैकेज हो, चाहे लोन हो, या बिज़नेस और इन्वेस्टमेंट के वादे हों. ज़्यादातर माल तो बड़े लोग आपस में ही बाँट लेते थे, लेकिन कुछ चार पैसे आवाम के हिस्से भी आ जाते थे. पाकिस्तान की सरकार जब जंग में हिस्सा लेती थी तो पैसे कमाती थी. अब जंग बंद करवाई है तो चारों ओर इज़्ज़त ही इज़्ज़त है. इस नेक काम का एक पैसा भी नहीं मिला. शायद वे सही कहते थे कि नेकी कर और दरिया में डाल. मोहल्ले में हमेशा एक समझदार आदमी होता है, जिसका अपना तो कोई काम धंधा नहीं होता है , लेकिन वह मोहल्ले के सारे काम करता रहता है. उसके बारे में लोग आम तौर पर कहते हैं कि इसके पास एक मिनट का भी टाइम नहीं और इसे एक पैसे की भी कमाई नहीं. अब पाकिस्तान के नेता दुनिया में शांति लाने के बाद खाली हो गए हैं और अब वे अपनी आवाम के आटे-दाल के बारे में भी सोचें. ट्रंप के साथ ली गई तस्वीरों से किसी का पेट नहीं भरेगा. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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