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ऑपरेशन सिंदूर: राजनाथ सिंह पर 'संसद को गुमराह' करने के विपक्ष के आरोपों के बाद रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान

✍️ Admin 📅 27 June, 2026 ⏰ 08:15 PM 👁 13 views

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जान गंवाने वाले छह जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल पर दर्ज किए जाने के बाद, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है. वहीं विपक्ष के आरोपों के बाद रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि "28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए रक्षा मंत्री के भाषण को ग़लत तरीक़े से दिखाने की कोशिश की गई है." 28 जुलाई 2025 को संसद सत्र के दौरान लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष से कहा था, "आपको सवाल पूछना है तो ये पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज़ सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है तो उसका उत्तर है नहीं (ज़ोर देकर)." कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर संसद में दिए गए राजनाथ सिंह के भाषण का एक वीडियो क्लिप शेयर किया है. उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की जवाबी कार्रवाई को लेकर 'संसद को गुमराह' किया गया. बीते साल 22 अप्रैल को पहलगाम में एक चरमपंथी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद मई 2025 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चार दिन तक सैन्य अभियान चला था. भारत सरकार ने इस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम दिया था. अब भारत सरकार ने इस ऑपरेशन के दौरान जान गंवाने वाले छह भारतीय सैनिकों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिए हैं. वहीं पाकिस्तान सेना ने बीते साल ही बयान जारी कर बताया था कि सैन्य संघर्ष के दौरान उसके कम से कम 11 जवान मारे गए. इनमें सात जवान आर्मी और चार जवान एयरफ़ोर्स थे. इन छह सैनिकों के नाम दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की एक दीवार पर लिखे गए हैं. इन छह सैनिकों में पांच आर्मी के जवान हैं जबकि एक इंडियन एयरफ़ोर्स का सैनिक है. इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि इनमें एक जवान मूड मुरलीनाइक अग्निवीर थे. इन सैनिकों के नाम स्मारक की वॉल 3डी में उस जगह उकेरे गए हैं जिसे देश की सेवा में अपनी जान देने वालों सैनिकों को समर्पित किया गया है. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, "कुछ सोशल मीडिया पोस्टों में 28 जुलाई 2025 को संसद में रक्षा मंत्री द्वारा दिए गए भाषण को ग़लत तरीक़े से पेश करने की कोशिश की गई है. इन पोस्टों में भाषण के एक छोटे से हिस्से को चुनकर यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की मौत नहीं हुई. यह दावा जानबूझकर भ्रामक तरीके से पेश किया गया है और पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से ग़लत है." "यह याद रखना चाहिए कि जब रक्षा मंत्री संसद में अपना भाषण दे रहे थे, उस समय मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में लगातार यह झूठा प्रचार किया जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट मारे गए थे. यह दावा पूरी तरह गलत था, लेकिन ऑपरेशन की सफलता को कम करके दिखाने और जनता का मनोबल गिराने के उद्देश्य से इसे लगातार फैलाया जा रहा था. रक्षा मंत्री का संबंधित बयान इसी विशेष और भ्रामक दुष्प्रचार के जवाब में दिया गया था. इसलिए उनके बयान को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए. यह भी ज़रूरी है कि रक्षा मंत्री के पूरे भाषण को सही संदर्भ में देखा जाए." रक्षा मंत्रालय के बयान में आगे बताया गया है कि "यह भाषण भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और क्षमता को सम्मान देने वाला था और भारत को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी था." "रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय सशस्त्र बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. विशेष रूप से उन वीर जवानों के प्रति, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. उनका बलिदान मातृभूमि की सर्वोच्च सेवा है और उसे हमेशा पूरे सम्मान, गर्व और गरिमा के साथ याद किया जाएगा." "इसी सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में सरकार ने सुनिश्चित किया है कि इन वीर सैनिकों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) की दीवारों पर अंकित किए जाएं. साथ ही सरकार ने उनके परिवारों और आश्रितों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में सभी आवश्यक रियायतें और सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं." 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मारे गए इन जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर मौजूद 'रोल ऑफ़ ऑनर' में भी प्रकाशित किए गए हैं. 1. सूबेदार मेजर पवन कुमार, हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड, मृत्यु- 10 मई 2025 2. राइफ़लमैन सुनील कुमार (वीर चक्र), 4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, मृत्यु- 10 मई 2025 3. लांस नायक दिनेश कुमार, 5 फील्ड रेजिमेंट, मृत्यु- 7 मई 2025 4. एवी मूड मुरलीनाइक, एविएशन टेक्नीशियन, 851 लाइट रेजिमेंट, मृत्यु- 9 मई 2025 5. हवलदार सुनील कुमार सिंह, 237 फ़ील्ड वर्कशॉप कंपनी, मृत्यु- 6 जून 2025 6. सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना मेडल), 39 विंग, मृत्यु- 10 मई 2025 प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में मारे गए जवानों के नाम एक साल बाद सार्वजनिक किए जाने पर केंद्र सरकार और रक्षा मंत्री पर सवाल किए हैं. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा, "सिर्फ़ दो ही संभावनाएं हैं. या तो रक्षा मंत्री को अपने ही मंत्रालय से जुड़े तथ्यों की जानकारी नहीं थी, जो उनकी क्षमता पर 'गंभीर सवाल' खड़ा करता है, या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने 'संसद को गुमराह' करने का फ़ैसला किया." उन्होंने लिखा, "जिस सरकार ने ख़ुद को तिरंगे में लपेट रखा है और जो राष्ट्रवाद की बातें करते नहीं थकती, उसी सरकार ने इन वीरों को वह सम्मान और स्मरण नहीं दिया, जिसके वे हक़दार थे." पवन खेड़ा ने कहा, "इन वीरों के नाम देश की सामूहिक स्मृति में हमेशा के लिए दर्ज होने चाहिए थे. उनके परिवारों को यह महसूस होना चाहिए था कि पूरा देश उनके बलिदान को सम्मान के साथ याद कर रहा है. लेकिन इसके उलट, पूरे एक साल तक बीजेपी सरकार ने उनकी शहादत को देश से छिपाए रखने का फ़ैसला किया." उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता दीपक सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "दुख तो होता है कि हमारे सैनिकों ने शहादतें दीं, लेकिन दुख तब और होता है कि हम एक चुने हुए देश में काम करते हैं और सदन सर्वोच्च स्थान होता है. रक्षा मंत्री ने सदन में खड़े होकर कहा था कि हमारे किसी सैनिक की शहादत नहीं हुई है..." "एक तरफ़ हमारे सैनिक शौर्य का परिचय देते हैं और बहादुरी के साथ लड़कर शहादत देते हैं, उनकी शहादत को झुठलाया जाता है और सदन में रक्षा मंत्री कहते हैं कि कोई शहादत नहीं हुई. यह बात कहीं न कहीं तकलीफ़ पहुंचाता है. मुझे लगता है कि सैनिकों ने हमेशा शहादतें दी हैं लेकिन उनकी शहादतों को कभी नकारा नहीं गया." आम आदमी पार्टी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, "शहीदों के ताबूत में घोटाला करने वाली भाजपा ऑपरेशन सिंदूर में जवानों की शहादत पर देश की जनता को गुमराह करती रही है. जिसके बाद देश की जनता भी जान गई है- बीजेपी न जवान की है, न भगवान राम की है!" आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. कंचन यादव ने संसद में रक्षा मंत्री के दिए वक्तव्य को साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने एक्स पर लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर में इस देश के 6 जवान शहीद हुए थे. लेकिन बीजेपी के मंत्रियों और नेताओं ने संसद में मेज़ें थपथपाकर कहा कि किसी की जान नहीं गई. अब 6 शहीदों की सूची जारी हुई है." आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने पत्रकारों से कहा, "वे देश से झूठ बोलते हैं. वे देश की सुरक्षा को लेकर झूठ बोलते हैं. उन्होंने देशहित को गिरवी रख दिया है. मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया. जब हम ऑपरेशन सिंदूर को देख रहे थे, तब भारतीय सेना पाकिस्तान को करारा जवाब दे रही थी. फिर अचानक, हमारे अपने देश का कोई नेता इसकी घोषणा करता, उससे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया है." 28 जुलाई 2025 को संसद सत्र के दौरान लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, "आपको सवाल पूछना है तो ये पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज़ सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है तो उसका उत्तर है नहीं (ज़ोर देकर)." राजनाथ सिंह ने उसी वक्तव्य में कहा था, "प्रतिपक्ष के लोग पूछते रहे हैं कि हमारे कितने विमार गिरे, मुझे लगता है कि उनका यह सवाल राष्ट्रीय जनभावनाओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता. उन्होंने एक बार भी नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान गिराए." "उन्हें सवाल पूछना ही है तो उनका प्रश्न ये होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया, तो उसका उत्तर है हां. आपको प्रश्न पूछना है तो ये पूछिए कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उत्तर है हां." पवन खेड़ा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "जुलाई 2025 को दिए गए राजनाथ सिंह के भाषण में कहा गया था कि हमारे जवानों को कोई क्षति नहीं हुई. क्या वो झूठ था?" खेड़ा ने पूछा, "या तो आपको जानकारी नहीं थी, या जानकारी छिपाई. दोनों ही स्थितियों में क्या आपको अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार है?" रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और येल यूनिवर्सिटी के लेक्चरर सुशांत सिंह ने एक्स पर लिखा, "चूंकि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए भारतीय जवानों का मुद्दा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है, इसलिए पिछले अगस्त में मैंने मोदी सरकार और केंद्र सरकार की ओर से जवानों की क्षति और उनके सर्वोच्च बलिदान पर चुप्पी साधे रखने के ख़तरनाक नतीजों पर जो लिखा था, उसे फिर साझा कर रहा हूं. वह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है." 21 अगस्त 2025 को टेलीग्राफ़ में प्रकाशित उस लेख में सुशांत सिंह ने लिखा था, "इस स्वतंत्रता दिवस पर असाधारण रूप से बड़ी संख्या में वीरता पुरस्कार दिए गए, लेकिन जिन साहसिक कार्यों के लिए ये सम्मान दिए गए, उनसे जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई." "प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले उन जवानों का ज़िक्र तक नहीं किया. सार के बजाय दिखावे पर ज़ोर देना ख़तरनाक है." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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