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Death

अमेरिकी सेना ने ओमान के तट पर बचाए गए 14 भारतीय नाविकों को लेकर क्या दावा किया

✍️ Admin 📅 15 June, 2026 ⏰ 09:01 AM 👁 52 views

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसने रविवार को उत्तरी अरब सागर में 14 भारतीय नाविकों को बचाने में मदद की. सेंटकॉम ने इस ऑपरेशन से जुड़ा एक बयान साझा किया है. इससे पहले ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा था कि रेस्क्यू ऑपरेशन ओमान के अधिकारियों के समन्वय में आसपास मौजूद जहाज़ों के ज़रिए चलाया गया. बाद में रविवार को ही भारतीय दूतावास ने बताया कि सभी 14 भारतीय नाविकों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया और वे जबल अली 9 पर सवार होकर मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं. सेंटकॉम ने 'डिफ़ेंस विज़ुअल इन्फ़ॉर्मेशन डिस्ट्रिब्यूशन सर्विस' (डीवीआईडीएस) का एक बयान में रेस्क्यू अभियान के बारे में बताया है. बयान में लिखा है, "अमेरिकी नौसेना के एक सर्च एंड रेस्क्यू हेलिकॉप्टर ने 14 जून को उत्तरी अरब सागर में 14 भारतीय नाविकों को बचाने में मदद की." "फंसे हुए नाविकों की ओर से रविवार दोपहर लगभग 12.30 बजे (भारतीय समयानुसार) डिस्ट्रेस कॉल मिलने के बाद अमेरिकी नौसेना का एक पी-8 विमान सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचा. विमान ने खोज और बचाव किट गिराई, जिसमें एक लाइफ़ राफ़्ट भी शामिल थी. 14 नाविक उसी लाइफ़ राफ़्ट पर सवार हो गए." "इसके बाद मोटर वेसल (एम/वी) जबल अली 9 घटनास्थल पर पहुंचा और लाइफ़ राफ़्ट से 11 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया." डीवीआईडीएस के मुताबिक़, अन्य तीन नाविकों की लाइफ़ राफ़्ट पलट गई थी और उन्हें अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के एक एमएच-60 सी हॉक हेलिकॉप्टर ने बचाया. इसके बाद तीनों नाविकों को एम/वी जबल अली 9 पर पहुंचाया गया. संबंधित ख़बर: ओमान के तट के पास भारतीय झंडा लगे जहाज़ से सभी 14 क्रू मेंबर्स को बचाया गया इमेज स्रोत, Jeanne ACCORSINI / POOL / AFP via Getty Images ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. इन देशों के नेताओं ने कहा है कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस "अवसर का पूरा लाभ उठाने" के लिए काम करेंगे. ई4 समूह के नाम से जाने जाने वाले इन देशों ने कहा, "हम इस कूटनीतिक सफलता के लिए अमेरिका, ईरानी सरकार और इसमें शामिल सभी पक्षों को बधाई देते हैं, जिनमें पाकिस्तान, क़तर और अन्य सभी मध्यस्थ शामिल हैं." बयान में कहा गया, "यह क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का एक अवसर है." ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने समझौते को 'तेज़ी से और पूरी तरह लागू किए जाने' की अपील की है. उन्होंने कहा कि "स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को तत्काल फिर से खोलना और वहां बिना किसी शर्त और प्रतिबंध के नैविगेशन की आज़ादी सुनिश्चित किया जाना बेहद ज़रूरी है." इन नेताओं ने लेबनान की 'स्थिरता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता' के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया. संबंधित ख़बर: अमेरिका और ईरान में शांति समझौते का एलान, सैन्य कार्रवाई होगी ख़त्म और होर्मुज़ स्ट्रेट भी खुलेगा ईरान के सरकारी मीडिया ने अमेरिका और ईरान के बीच घोषित समझौते (एमओयू) के 14 बिंदुओं की जानकारी होने का दावा किया है. हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अब तक किसी भी देश की ओर से नहीं की गई है. ईरान के अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज़ के मुताबिक़ प्रस्तावित बिंदुओं में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम का मुद्दा है. इसके अलावा इन बिंदुओं का भी ज़िक्र है- मेहर न्यूज़ एजेंसी ने यह भी बताया कि "अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की फ़्रीज़ की हुई संपत्तियों का कम से कम आधा हिस्सा रिलीज़ नहीं किया जाता, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध निलंबित नहीं किए जाते और नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई जाती." रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी दी जाएगी. संबंधित ख़बर: अमेरिका और ईरान में शांति समझौते का एलान, सैन्य कार्रवाई होगी ख़त्म और होर्मुज़ स्ट्रेट भी खुलेगा अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा के बाद एशिया में शुरुआती कारोबार के दौरान तेल की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की गई. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत अहम समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा. इसके बाद वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 3.8 फ़ीसदी गिरकर 84.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिका में कारोबार होने वाला तेल 4.1 फ़ीसदी गिरकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि समझौते पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में होगा. इसके बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "क्षेत्र में तेल की निर्बाध आवाजाही फिर से शुरू होगी." 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान पर हवाई हमले शुरू किए जाने के कुछ समय बाद से होर्मुज़ प्रभावी रूप से बंद था. दुनिया के लगभग 20 फ़ीसदी तेल और लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की आपूर्ति सामान्य तौर पर इसी समुद्री रास्ते से होती है. हाल के महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की क़ीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन संघर्ष के दौरान यह क़ीमत बढ़कर क़रीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. संबंधित ख़बर: अमेरिका और ईरान में शांति समझौते का एलान, सैन्य कार्रवाई होगी ख़त्म और होर्मुज़ स्ट्रेट भी खुलेगा बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - टीएमसी के बाग़ी सांसदों की ओम बिरला से मुलाक़ात, नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय की कही बात - ओमान के तट के पास भारतीय झंडा लगे जहाज़ से सभी 14 क्रू मेंबर्स को बचाया गया - कोलकाता: आग में जले चार हज़ार ईवीएम और वीवीपैट, किस तरह का किया जा रहा है दावा - उधार किट लेकर टीम में सिलेक्ट होने से टी-20 वर्ल्ड कप तक का भारती फुलमाली का सफ़र - बांदा में दलित युवक से शादी करने वाली युवती की थाने में हत्या पर क्यों उठ रहे सवाल

स्रोत: BBC Hindi

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