‘देश के गद्दारों को...’ कहना किसी समुदाय की तरफ इशारा नहीं, SC ने खारिज की अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा पर FIR की मांग
भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ साल 2020 में दिए गए भाषणों को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा है कि ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ जैसी बात कहने से किसी संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता है.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को 'हेट स्पीच' पर दिशा-निर्देश जारी करने से मना कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि कानून में पहले से पर्याप्त व्यवस्था है. इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने मामले में दाखिल हुई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था. इन याचिकाओं में धर्म संसद जैसे आयोजन, कोरोना जिहाद, UPSC जिहाद जैसे टीवी कार्यक्रमों समेत कई मामले उठाए गए थे. इन्हीं में से कुछ याचिकाएं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों को लेकर थीं.
भाजपा नेताओं को लेकर क्या बोली अदालत?
दोनों नेताओं के भाषणों के मामले में कोर्ट ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री और स्टेटस रिपोर्ट हमने सावधानीपूर्वक विचार किया. हमारा निष्कर्ष है कि इसमें कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. हालांकि, यह भाषण विवादास्पद थे, लेकिन उन्हें किसी खास समुदाय की तरफ इशारा नहीं माना जा सकता है. हमारे सामने रखी गई सामग्री हिंसा के लिए उकसाने की बात सामने नहीं लाती है. ऐसे में यह आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए नाकाफी है.’
स्रोत: ABP Hindi