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Death

मर्जी से साथ रहे, बच्चा पैदा किया तो ये रेप कैसे? लिव-इन पार्टनर पर यौन-उत्पीड़न के आरोप लगा रही महिला से SC ने पूछा

✍️ Admin 📅 27 April, 2026 ⏰ 03:02 PM 👁 47 views

सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि बिना शादी के साथ रह रहे कपल के बीच सहमति से संबंध बने और फिर वे दोनों अलग हो गए तो, इसको रेप नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा है कि जिस पर वह अब रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप लगा रही है, उसके साथ वह लिव-इन रिलेशनशिप में क्यों रह रही थी. याचिकाकर्ता का लिव-इन रिलेशनशिप से एक बच्चा भी है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच के सामने यह मामला रखा गया. याचिकाकर्ता ने लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने के बाद अपने पार्टनर पर रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. महिला का कहना है कि शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन आरोपों पर सवाल उठाए हैं और यह भी बताया कि सहमति से बने लिव-इन रिलेशनशिप और आपराधिक यौन अपराधों में क्या अंतर है. सुप्रीम कोर्ट एक विधवा महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने अपने लिव-इन पार्टनर पर रिलेशनशिप खत्म होने पर रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जब कपल इस तरह के रिलेशनशिप में रहने के लिए सहमत होते हैं, तो अक्सर उनमें इस तरह के रिस्कों का खतरा रहता है. जस्टिस नागरत्ना ने याचिकाकर्ता के आरोपों सवाल उठाते हुए कहा, 'यह एक लिव-इन रिलेशनशिप था. याचिकाकर्ता ने पहले शादी के बगैर बच्चे को जन्म देने का फैसला किया और अब वह कह रही है कि उसके साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न हुआ. ये क्या है?' जज ने कहा कि याचिकाकर्ता सहमति से बने लिव-इन रिलेशनशिप में यौन उत्पीड़न के आरोप कैसे लगा सकती है. उन्होंने कहा कि जब सहमति से संबंध बने हों तो उसमें रेप और यौन उत्पीड़न का सवाल ही कहां है.

स्रोत: ABP Hindi

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