ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल की जंग के चौथे दिन क्या-क्या हुआ?
अमेरिका-इसराइल के ईरान के साथ युद्ध के चौथे दिन अमेरिका और इसराइल ने ईरान के शहर क़ुम में ईरान के धर्म विशेषज्ञों की सभा के सचिवालय को निशाना बनाया. बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, घटनास्थल के एक वीडियो में सचिवालय की इमारत खंडहर जैसी नज़र आ रही है. क़ुम स्थित यह सचिवालय ईरान का एकमात्र ऐसा सरकारी निकाय है जो तेहरान के बाहर स्थित है. रिपोर्टों के मुताबिक़, ये हमला उस समय हुआ जब ईरान की धर्म परिषद के सदस्य आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए जुटे थे. इस सचिवालय को ईरान में दबीरख़ाना-ए-मजलिस-ए-ख़बरेगान-ए-रहबरी कहा जाता है जहां ईरान के शीर्ष धर्मगुरू जुटते हैं. बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें इसराइली सेना ने इससे पहले कहा था कि उसने तेहरान में राष्ट्रपति कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की इमारतों को भी निशाना बनाया है. ईरानी मीडिया ने चौथे दिन अस्थायी नेतृत्व परिषद की तीसरी बैठक की तस्वीरें जारी कीं. इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलामहुसैन मोहसनी-एज़ेई और निगरानी परिषद के फक़ीह अलीरेज़ा आराफ़ी शामिल हैं. रिपोर्ट में बैठक के स्थान या लिए गए निर्णयों का विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन कहा गया है कि यह परिषद नए सर्वोच्च नेता के चयन तक दायित्व संभालेगी. बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, अमेरिका और इसराइल के साथ ईरान के युद्ध के चौथे दिन भी दोनों तरफ़ से हमले होते रहे. मंगलवार की सुबह से ही ईरान की राजधानी तेहरान और देश के अन्य शहरों में तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं. ईरान में इंटरनेट ब्लॉक होने की वजह से हमलों के असर के पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है. द रेड क्रेसेंट के मुताबिक़, ईरान में अब तक कम से कम 787 लोगों की मौत इस युद्ध के दौरान हो चुकी है. हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है. इमेज स्रोत, AFP via Getty Images प्रकाशित तस्वीरों में तेहरान के अलग-अलग इलाक़ों में क्षतिग्रस्त इमारतें, सड़कों पर बिखरा मलबा और धुएँ के बादल दिखाई देते हैं. बीबीसी फ़ारसी पर प्रकाशित एक तस्वीर में मोटरसाइकिल सवार लोग फ़िरदौसी चौक के पास क्षतिग्रस्त इमारतों के सामने से गुज़रते दिखते हैं. ईरान में इंटरनेट पर प्रतिबंध और इस वजह से सीमित तस्वीरें ही बाहर आ पा रही हैं. वहीं इसराइली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, मंगलवार को तेल अवीव में ईरान ने मिसाइल हमले किए. हालांकि इन हमलों से हुए नुक़सान का विस्तृत ब्यौरा नहीं मिल सका है. इसराइली सेना के मुताबिक़, ये मिसाइलें कैसे तेल अवीव तक पहुंची इसकी समीक्षा की जा रही हैं. मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि ईरान ने “आख़िरी पल तक युद्ध में प्रवेश से बचने की कोशिश की”, लेकिन “दूसरे पक्ष ने युद्ध का फ़ैसला किया.” उन्होंने कहा कि युद्ध रोकने का रास्ता “आक्रमण रोकना” है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को हस्तक्षेप करना चाहिए. बक़ाई ने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ़ के बयानों को “झूठ” बताया. विटकॉफ़ ने कहा था कि ईरान के पास 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का 460 किलोग्राम भंडार है और यह एक सप्ताह से दस दिन के भीतर हथियार स्तर तक पहुँच सकता है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत के लिए अब देर हो चुकी है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका के पास “व्यावहारिक रूप से असीमित” हथियारों का भंडार है और देश “एक बड़ी जीत” के लिए तैयार है. एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि ईरान अब बातचीत करना चाहता है, लेकिन “बहुत देर हो चुकी है.” इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि अब ईरान वार्ता नहीं करेगा. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कहा है कि सेटेलाइट तस्वीरों में नतांज़ के भूमिगत परमाणु प्रतिष्ठान के प्रवेश द्वार पर नुक़सान नज़र आ रहा है. आईएईएआई ने मंगलवार को ये जानकारी दी है. एजेंसी ने यह भी कहा है कि किसी प्रकार के रेडियोलॉजिकल प्रभाव की आशंका नहीं है और पहले से क्षतिग्रस्त संवर्धन सुविधाओं में अतिरिक्त असर नहीं देखा गया है. ईरान के इस परमाणु ठिकाने पर अमेरिका और इसराइल ने पिछले साल व्यापक हमले किए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के तबाह होने का दावा भी किया था. सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास की इमारत पर हमले की पुष्टि सऊदी रक्षा मंत्रालय ने की है. संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि उसने शनिवार से अब तक ईरान की ओर से आए 172 बैलिस्टिक मिसाइलें और 755 ड्रोन हमलों को रोका है. बहरीन की सेना ने भी 73 मिसाइलों और 91 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है. बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय उन स्थानों में से है जिन्हें अधिक निशाना बनाया गया है. अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब के ज़हरान शहर में संभावित हमले की चेतावनी जारी की और अमेरिकी नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा. यहां अमेरिका का काउंसुलेट भी है. ज़हरान सऊदी तेल उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है और वहीं सरकारी तेल कंपनी आरामको का मुख्यालय स्थित है. इसी बीच, ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़ के संचार केंद्र ने बयान जारी कर ओमान की धरती या बंदरगाहों पर किसी भी सैन्य हमले से इनकार किया है. ओमान के अधिकारियों ने पहले कहा था कि सलालाह बंदरगाह और ज़फ़ार प्रांत में ड्रोन हमले हुए हैं. वहीं, फ्रांस ने कहा है कि उसने संयुक्त अरब अमीरात में अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए रफ़ाल लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. इटली ने साइप्रस में ब्रिटेन के वायु अड्डे पर ड्रोन हमले के विरोध में ईरानी राजदूत को तलब किया है. वहीं ग्रीस ने साइप्रस में ड्रोन ख़तरे से निपटने के लिए चार एफ़-16 लड़ाकू विमान भेजे हैं. साइप्रस के अधिकारियों का कहना है कि ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन ने ब्रिटेन के आक्रोतिरी वायु अड्डे को निशाना बनाया था. एक ड्रोन को रोका गया जबकि दूसरा रनवे से टकराया, जिससे “मामूली” नुक़सान हुआ. ईरान के सांस्कृतिक विरासत मंत्री ने कहा है कि सोमवार को हुए हमलों में तेहरान के ऐतिहासिक गुलिस्तान पैलेस परिसर और बाज़ार के कुछ हिस्सों को “गंभीर” नुकसान पहुँचा है. उन्होंने यूनेस्को से विशेषज्ञ टीम भेजने का अनुरोध किया है. प्रकाशित तस्वीरों में तख़्त-ए-मरमर और आईना हॉल समेत कई हिस्सों में क्षति देखी जा सकती है. युद्ध के कारण मध्य पूर्व में हवाई सेवाएँ मंगलवार को भी बुरी तरह प्रभावित रहीं. अमीरात एयरलाइन ने कुछ यूरोपीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित की हैं, लेकिन यात्रियों को बिना पुष्टि हवाई अड्डे न जाने की सलाह दी है. क़तर से जाने वाली उड़ानें क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण स्थगित हैं. एतिहाद ने भी अपनी उड़ानों के निलंबन को आगे बढ़ाया है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi