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'पूरा दिन मुफ्त सामान बांटोगे तो...', सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार, नोटिस जारी

✍️ Admin 📅 19 February, 2026 ⏰ 01:51 PM 👁 56 views

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की मुफ्त बिजली योजना पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TANGEDCO) की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कई अहम सवाल उठाए और पूरे देश में फैल रही 'मुफ्त सुविधाओं' की संस्कृति पर चिंता जताई है.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दी सख्त समझाइश

19 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'देश में हम कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? जो लोग बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं, उनके लिए कल्याणकारी योजना होनी चाहिए. सबको मुफ्त सुविधा क्यों?' जस्टिस खन्ना ने आगे कहा कि हर राज्य में ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है और कोर्ट इस पर बहुत चिंतित है.

बेंच ने तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि अगर राज्य के पास इतना पैसा है, तो उसे बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों के विकास में क्यों नहीं लगाया जा रहा? कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि चुनाव के समय सामान बांटने के बजाय राज्यों को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए. राज्य का कर्तव्य रोजगार के अवसर पैदा करना है.

राजस्व घाटे के बावजूद मुफ्त योजनाएं चला रहीं सरकारें: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने और सख्त लहजे में कहा कि अगर पूरा दिन मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली और अब सीधे लोगों के खातों में नकद हस्तांतरण शुरू कर दिया जाए, तो विकास के लिए धन कहां बचेगा? कोर्ट ने नोट किया कि ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी इन नीतियों के कारण मजबूर होकर खर्च कर रहे हैं.
 
यह मामला क्या है?
 
यह सुनवाई तमिलनाडु की DMK सरकार की उस योजना पर थी, जिसमें 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाती है. TANGEDCO ने केंद्र सरकार के एक सर्कुलर के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसमें बिजली कंपनियों को सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के बिलों पर टैक्स छूट देने पर रोक लगाई गई थी. लेकिन कोर्ट ने मामले को सिर्फ टैक्स तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे देश में 'फ्रीबीज' की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई.

स्रोत: ABP Hindi

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