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इस साल रमज़ान में सबसे लंबे रोज़े कहां रखे जाएंगे

✍️ Admin 📅 15 February, 2026 ⏰ 10:07 AM 👁 47 views

मुसलमानों का पवित्र महीना रमज़ान मंगलवार 17 फ़रवरी को सूर्यास्त के बाद या बुधवार 18 फ़रवरी को शुरू हो रहा है, यह इस पर निर्भर करता है कि आप रहते कहां हैं. दुनिया भर के कई मुसलमान, इस महीने के 29–30 दिन तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं. रमज़ान की तारीख़ें हर साल बदलती हैं, क्योंकि इस्लाम में चंद्र कैलेंडर या हिजरी चलता है. आमतौर पर, रमज़ान हर साल करीब 11 दिन पहले पड़ता है. रोज़ा रखने वालों को बिना खाना-पानी के रहने के लिए कुछ ख़ास शर्तों का पालन करना होता है- जो ज़्यादातर सेहत से जुड़ी होती हैं. बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें इस समय दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी है, इसलिए वहां दिन बड़े होते हैं और रोज़ा रखने के घंटे भी ज़्यादा होते हैं, जबकि जब रमज़ान सर्दियों में आता है तो रोज़े के घंटे कम होते हैं. उधर उत्तरी गोलार्ध में अभी सर्दी है, इसलिए वहां रोज़ा रखने का समय उन गर्मियों में पड़ने वाले रमज़ान के महीनों की तुलना में कम होता है. स्थान के साथ दिन की रोशनी भी बदलती है. आप भूमध्य रेखा से जितनी दूर होंगे गर्मियों में दिन और सर्दियों में रातें उतनी ही लंबी होंगी. उदाहरण के लिए, चिली के पुर्तो विलियम्स में, जिसे अक्सर दुनिया का सबसे दक्षिणी शहर माना जाता है, इस रमज़ान की शुरुआत में रोज़ा सुबह लगभग साढ़े छह बजे से रात नौ बजे तक (करीब साढ़े 14 घंटे) रहेगा. इमेज स्रोत, Posnov / Getty Images लेकिन नॉर्वे के लॉन्गइयरबायन में, जिसे आमतौर पर दुनिया का सबसे उत्तरी कस्बा माना जाता है, महीने की शुरुआत में रोज़ा सुबह के लगभग 10:50 बजे से दोपहर के डेढ़ बजे तक (ढाई घंटे से थोड़ा ज़्यादा) रहेगा. जैसे-जैसे दिन बड़े होते जाएंगे, रमज़ान के आख़िरी दिन रोज़ा लगभग साढ़े 12 घंटे का हो जाएगा. दुनिया के ऐसे चरम परिस्थिति वाले हिस्सों में मुसलमान या तो मक्का के समय का पालन करते हैं क्योंकि उन्हें खाने के लिए बहुत थोड़ा या न के बराबर समय मिलता है या फिर वे रोज़े ही नहीं रखते. दुनिया के उत्तरी हिस्सों में, सबसे लंबे रोज़े तब होते हैं जब रमज़ान 21 जून के आस-पास पड़ता है, और सबसे छोटे रोज़े तब होते हैं जब यह 21 दिसंबर के आस-पास आता है. दक्षिणी हिस्सों में इसका उल्टा होता है. हर साल रमज़ान जब दिसंबर की ओर बढ़ता है तो रोज़े लंबे होते जाते हैं और जब जून की ओर बढ़ता है तो रोज़े छोटे होते जाते हैं. अरब दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में रोज़ा रखने का समय रोज़ाना 12 से 13 घंटे के बीच रहेगा, जिससे इस साल का रमज़ान हाल के वर्षों में सबसे संतुलित रोज़ों वाला महीना होगा. पवित्र शहर मक्का में, रमज़ान की शुरुआत में रोज़ा सुबह लगभग 06:50 बजे शुरू होगा और शाम 18:20 बजे ख़त्म होगा (करीब 11.5 घंटे). महीने के आख़िर तक इसमें आधा घंटा और बढ़ जाएगा. इमेज स्रोत, Saudi Press Agency via Reuters दक्षिणी गोलार्ध के बड़े शहरों में रहने वाले मुसलमानों को दो वक़्त के खाने के बीच ज़्यादा समय इंतज़ार करना पड़ेगा. उदाहरण के लिए, अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में रमज़ान की शुरुआत में रोज़ा करीब 13 घंटे 15 मिनट का होगा. न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड में भी रमज़ान की शुरुआत लगभग इसी अवधि के रोज़े के साथ होगी. इमेज स्रोत, Anadolu via Getty Images इन दोनों शहरों में, महीने के अंत तक रोज़े की अवधि लगभग एक घंटे कम हो जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय दक्षिणी गोलार्ध में दिन छोटे होने लगते हैं, जिससे दिन में रोशनी कम हो जाती है. हालांकि, सबसे उत्तरी इलाकों में महीने के दौरान रोज़े की अवधि में काफ़ी बदलाव आएगा. मसलन ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में रमज़ान की शुरुआत करीब 9 घंटे के रोज़े से होगी, जो महीने के आख़िर तक बढ़कर 12 घंटे से ज़्यादा हो जाएगी. इस साल रोज़ा रखने के घंटे उन सालों की तुलना में काफी आसान हैं, जब रमज़ान जून या जुलाई में आता है- क्योंकि उन महीनों में उच्च अक्षांश (हाई लैटीट्यूड) वाले इलाक़ों में दिन बहुत लंबे हो जाते हैं. नॉर्वे, रूस और ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों में, जब रमज़ान गर्मियों के लंबे दिनों में पड़ता है, तो मुसलमानों को करीब 20 घंटे तक रोज़ा रखना पड़ सकता है. उत्तरी गोलार्ध में, रोज़ा रखने का समय पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम होगा और 2031 तक हर साल थोड़ा थोड़ा कम होता जाएगा. 2031 में रमज़ान 21 दिसंबर, यानी सर्दियों के अधिकतम स्तर के दौरान आएगा. और जाहिर है, दक्षिणी गोलार्ध में रोज़े 2031 तक हर साल थोड़े थोड़े लंबे होते जाएंगे. मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. रमज़ान के दौरान रोज़ा रखना इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जो ये बताते हैं कि अपना जीवन कैसे बिताना चाहिए. रोज़ा आत्मिक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए रखा जाता है. मुसलमान सुबह सूर्योदय से पहले एक बार खाना खाते हैं, जिसे सुहूर या सहरी कहा जाता है. सूर्यास्त तक दिन भर वे कुछ भी खाते या पीते नहीं है- यहां तक कि पानी भी नहीं. शाम को रोज़ा खोलने के लिए वे जो भोजन करते हैं, उसे इफ़्तार या फ़ितूर कहा जाता है. इस्लाम सेहत को सख़्त नियमों से ऊपर रखता है, इसलिए कुछ लोगों को रोज़ा रखने से छूट दी गई है- जैसे कि ऐसे बच्चे जो अभी बालिग़ नहीं हुए हैं, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिन महिलाओं को माहवारी हो रही हो, बीमार लोग या वे जिनकी सेहत पर रोज़ा असर डाल सकता है, और वे लोग जो सफ़र कर रहे हों. अतिरिक्त रिपोर्टिंग – सर्गी फ़ोरकाडा फ़्रीक्सास, एंड्रयू वेब और ईथर शलाबी बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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