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Lok Sabha Speaker: लोकसभा स्पीकर को हटाने की क्या है प्रक्रिया, क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव, आसान भाषा में समझें

✍️ Admin 📅 09 February, 2026 ⏰ 02:00 PM 👁 50 views

लोकसभा स्पीकर यानी अध्यक्ष को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से तय की गई है. संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, लोकसभा स्पीकर को केवल लोकसभा में पारित एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से ही हटाया जा सकता है. यह प्रक्रिया सामान्य नहीं होती और इसके लिए निश्चित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना जरूरी होता है. स्पीकर को हटाने के लिए सबसे पहले लोकसभा में एक प्रस्ताव लाया जाता है, जिसकी लिखित सूचना कम से कम 14 दिन पहले देनी होती है. इस प्रस्ताव पर विचार तभी किया जा सकता है, जब लोकसभा के कम से कम 50 सदस्य उसका समर्थन करें. बिना इस न्यूनतम समर्थन के प्रस्ताव को सदन में स्वीकार नहीं किया जाता.

जब यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया जाता है तो उसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता. इसे लोकसभा के सभी सदस्यों के प्रभावी बहुमत से पारित करना जरूरी होता है. प्रभावी बहुमत का अर्थ है. रिक्त सीटों को छोड़कर सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत. यानी प्रस्ताव तभी पास होगा जब आधे से अधिक वर्तमान सदस्य इसके पक्ष में मतदान करें. जिस समय स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है, उस दौरान वे लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते. हालांकि, वे सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, अपनी बात रख सकते हैं और यदि मतदान में बराबरी की स्थिति बनती है तो निर्णायक मत भी दे सकते हैं.

विपक्ष ने अपनी स्थिति साफ कर दी

इस बीच लोकसभा स्पीकर को लेकर विपक्ष ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. विपक्ष ने यह तय किया है कि वह स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाएगा. इसके बजाय विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. यह पूरी तरह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो सिर्फ लोकसभा स्पीकर को उनके पद से हटाने से जुड़ी होती है. संविधान के अनुच्छेद 94(c) में साफ लिखा है कि लोकसभा स्पीकर को उनके पद से हटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होता है. सबसे पहले, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है. यह नोटिस लोकसभा के सभी सदस्यों को दिया जाता है, ताकि सभी को प्रस्ताव की जानकारी हो.

अनुच्छेद 94(c) किसे जुड़ा हुआ है?

इसके बाद इस प्रस्ताव को लोकसभा में पेश किया जाता है. प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा के उस समय मौजूद सभी सदस्यों के बहुमत की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि खाली सीटों को छोड़कर, जितने सांसद उस समय लोकसभा के सदस्य हैं, उनमें से आधे से ज्यादा सांसदों का समर्थन जरूरी होता है. यह प्रक्रिया अविश्वास प्रस्ताव से अलग है. अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ लाया जाता है, जबकि अनुच्छेद 94(c) का प्रस्ताव सिर्फ स्पीकर के पद से जुड़ा होता है. विपक्ष का कहना है कि वह सरकार गिराने की नहीं, बल्कि लोकसभा की कार्यवाही और स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठा रहा है.

अन्य परिस्थितियों में भी स्पीकर का पद हो सकता समाप्त  

इसके अलावा कुछ अन्य परिस्थितियों में भी स्पीकर का पद समाप्त हो सकता है. यदि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत वे लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिए जाते हैं तो वे स्वतः स्पीकर पद पर भी नहीं रह सकते. वहीं, स्पीकर अपनी इच्छा से इस्तीफा भी दे सकते हैं, जो उन्हें लोकसभा के उपाध्यक्ष यानी डिप्टी स्पीकर को सौंपना होता है. मोटे तौर पर कहा जाए तो लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है, जिसमें विशेष बहुमत, पूर्व सूचना और तय नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है, ताकि इस पद की गरिमा और निष्पक्षता बनी रहे.

स्रोत: ABP Hindi

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