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Bengal SIR Hearing Live: SC में बोली ममता बनर्जी- यह मेरी लड़ाई नहीं लोगों की है, CJI ने कहा- EC को दे रहे नोटिस

✍️ Admin 📅 04 February, 2026 ⏰ 11:24 AM 👁 47 views

Bengal SIR Hearing: सुप्रीम कोर्ट बुधवार (4 फरवरी, 2026) को पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. इनमें से एक याचिका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दायर की है, जिसमें उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर राजनीतिक भेदभाव करने और एसआईआर कराने में तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई कॉजलिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Of India Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर कर एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया था और आरोप लगाया था कि जिस तरह से इसे किया जा रहा है, उससे लाखों वोटर्स, खासकर समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लोगों के वोट देने का अधिकार छीना जा सकता है. अपनी याचिका में, ममता बनर्जी ने ईसीआई पर राजनीतिक इरादे से काम करने का आरोप लगाया और दावा किया कि एक संवैधानिक संस्था, जिससे निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की उम्मीद की जाती है, एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है जो 'किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है.' बंगाल सीएम ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से सीधे दखल देने की मांग की है और चुनाव आयोग को उचित निर्देश देने की प्रार्थना की है. इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उन याचिकाओं को भी बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है. यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता बनर्जी ने सोमवार को पहले नई दिल्ली में ईसीआई मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर एसआईआर पर आपत्तियां जताई थीं. बैठक के बाद, मुख्यमंत्री ने सीईसी पर तीखे आरोप लगाए, उन्हें 'घमंडी' बताया और उन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से असली मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं और दावा किया था कि रिवीजन प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष चुनावी रोल ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं. SIR मामले की सुनवाई में चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति नियमों के अनुसार है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे बिना कानूनी आधार का बताया. द्विवेदी ने कहा कि जब राज्य सहयोग नहीं करता तो ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं और अब तक एक करोड़ लोगों की सुनवाई हो चुकी है, बाकी की भी होगी. CJI ने कहा कि ममता की ओर से श्याम दीवान जैसे सक्षम वकील मौजूद हैं और वे पक्ष रख सकते हैं. कोर्ट ने चुनाव आयोग को याचिका पर जवाब देने को कहते हुए अगली सुनवाई सोमवार तय की. SIR मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने ममता बनर्जी के वकील से याचिका की प्रति चुनाव आयोग के वकील को देने को कहा. इस पर ममता ने इसे लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष बताया. इसके बाद CJI ने याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने का आदेश दिया.

स्रोत: ABP Hindi

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