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पाकिस्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप या भारत के ख़िलाफ़ मैच का किया बहिष्कार तो किसको कितना हो सकता है नुक़सान?

✍️ Admin 📅 27 January, 2026 ⏰ 03:59 PM 👁 45 views

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने टी-20 वर्ल्ड कप के लिए अपनी टीम श्रीलंका भेजने या न भेजने के बारे में अपना फ़ैसला आने वाले शुक्रवार या सोमवार तक के लिए टाल दिया है. बीबीसी स्पोर्ट्स के संवाददाता टिमोथी अब्राहम के मुताबिक़, पाकिस्तानी अधिकारी टूर्नामेंट के पूरी तरह बायकॉट सहित केवल भारत के ख़िलाफ़ मैच का बहिष्कार करने के प्रस्ताव पर भी ग़ौर कर रहे हैं. सोमवार को पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद कहा था कि पीएम ने "सभी विकल्पों को ध्यान में रखकर मामले को सुलझाने का निर्देश दिया है." इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने भारत में खेलने से इनकार करने पर बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से बाहर करते हुए स्कॉटलैंड को इस टूर्नामेंट में शामिल कर लिया था. बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने आईसीसी के इस फ़ैसले को 'नाइंसाफ़ी' और 'दोहरा मापदंड' बताया था. उनका कहना था कि बांग्लादेश पर भी वही नियम लागू होना चाहिए जो किसी और पर होता है. नक़वी ने कहा, "अगर एक देश सुरक्षा कारणों से किसी देश में खेलने से इनकार करता है, तो फिर बांग्लादेश को भी यह अधिकार मिलना चाहिए." उनका कहना था कि इस स्थिति में वर्ल्ड कप के लिए टीम श्रीलंका भेजने का फ़ैसला अब सरकार करेगी और अगर बांग्लादेश के साथ इंसाफ़ नहीं हुआ, तो फिर आईसीसी चाहे तो '22वीं टीम' शामिल कर ले." जब मोहसिन नक़वी से यह पूछा गया कि अगर पाकिस्तान भी टी-20 वर्ल्ड कप नहीं खेलता है तो 'प्लान बी' क्या है', तो उन्होंने जवाब दिया कि पहले फ़ैसला आने दें, "हमारे पास प्लान ए, बी, सी और डी हैं." सोमवार को सूत्रों के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया यह बता रहा था कि पाकिस्तान, कोलंबो में 15 फ़रवरी को निर्धारित भारत के साथ मैच के बहिष्कार या मैच के दौरान काली पट्टियां बांधकर खेलने पर विचार कर रहा है. जब इस बारे में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रवक्ता आमिर मीर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मोहसिन नक़वी की प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद जारी किए गए बयान पर ही भरोसा किया जाए. अगर पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप का बायकॉट करता है तो इसका क्या असर होगा? बहिष्कार की स्थिति में पाकिस्तान और आईसीसी को कितना नुक़सान होगा? इस बारे में बीबीसी ने पीसीबी के पूर्व अधिकारियों से बात की है. इससे पहले जानते हैं कि बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इस मामले पर क्या कहा है. इमेज स्रोत, MANJUNATH KIRAN/AFP via Getty Images मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला का कहना है कि इस साल भारत की मेज़बानी में खेले जाने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के लिए बांग्लादेश को सुरक्षा का भरोसा दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने इस मामले में, 'बेवजह दख़ल' दिया. समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में राजीव शुक्ला ने कहा, "हम तो चाहते थे कि बांग्लादेश खेले. हमने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया था लेकिन उन्होंने टीम न भेजने का फ़ैसला किया और कहा कि उनकी सरकार कह रही है कि वह टीम नहीं भेज सकती, वह कोलंबो में ही खेलेंगे." "आख़िरी पल में पूरे शेड्यूल को बदलना बहुत मुश्किल काम है, इसलिए आईसीसी को स्कॉटलैंड को लाना पड़ा. बांग्लादेश को सोचना चाहिए था, खेलना चाहिए था. हम तो यही चाहते हैं कि वह खेले." उन्होंने पाकिस्तान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान इसमें बेवजह पड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, "बांग्लादेश को उकसाने में पाकिस्तान की बहुत बड़ी भूमिका है." "पाकिस्तान को यह सब नहीं करना चाहिए था. पाकिस्तान ने बांग्लादेशियों के साथ क्या ज़्यादती की है, दुनिया जानती है और बांग्लादेशी भी जानते हैं. तब वह देश अलग हुआ था." बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान अब बांग्लादेश का "हमदर्द बनकर उन्हें ग़लत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहा है जो कि सही नहीं है." 'इंडियन एक्सप्रेस' में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप ना खेला तो आईसीसी उसके ख़िलाफ़ एक्शन ले सकता है. बीसीसीआई के एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर 'हिंदुस्तान टाइम्स' से कहा कि अगर पाकिस्तान खेलने से इनकार करता है तो पीसीबी को आईसीसी की तरफ़ से मिलने वाला सालाना फ़ंड रोका जा सकता है. साल 2023 में रेवेन्यू बांटने के फ़ैसले के वक़्त इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की कुल आमदनी 60 करोड़ डॉलर थी. डरबन में हुई उस बैठक में यह फ़ैसला किया गया था कि साल 2024 से 2027 तक आमदनी का 38.5 फ़ीसद हिस्सा भारतीय क्रिकेट बोर्ड को दिया जाएगा. इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड को रेवेन्यू का सात फ़ीसद जबकि आस्ट्रेलिया को छह फ़ीसद हिस्सा मिलेगा. पाकिस्तान चौथे नंबर पर है जिसे इस अवधि के दौरान आईसीसी की तरफ़ से सालाना तीन करोड़ 45 लाख डॉलर्स मिलेंगे. वरिष्ठ खेल विश्लेषक नीरू भाटिया का कहना है कि अगर पाकिस्तान आज बायकॉट करता है तो वह भविष्य के आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप और टेस्ट चैंपियनशिप से भी बाहर हो सकता है. इमेज स्रोत, Ryan Lim/Getty Images अगर पाकिस्तान वर्ल्ड कप नहीं खेलता तो इसका सीधा असर आईसीसी की कमाई पर भी पड़ेगा. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि अगर पाकिस्तान वर्ल्ड कप नहीं खेलता तो ब्रॉडकास्टर बहुत मुश्किल में पड़ जाएगा. उन्होंने पूछा, "अगर पाकिस्तान बाहर होता है, तो क्या भारत जिस टीम के साथ मैच खेलेगा, उसे भी इतने ही लोग देखेंगे." फ़ेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अनुसार पिछले 20 वर्षों के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मैचों से एक अरब डॉलर से ज़्यादा की कमाई हुई. नीरू भाटिया भी कहती हैं कि पाकिस्तान के न खेलने से आईसीसी को भारी नुक़सान उठाना पड़ेगा. उनके अनुसार, "भारत और पाकिस्तान के मैच के टिकट तुरंत बिक जाते हैं. टीवी पर मिलने वाले महंगे विज्ञापनों और स्पॉन्सरशिप के ज़रिए भी पैसा कमाया जाता है." स्पोर्ट्स एनालिस्ट डॉक्टर नौमान नियाज़ ने सोशल मीडिया पर एक शो के दौरान कहा कि पाकिस्तान के शामिल न होने से पूरा वर्ल्ड कप हिल जाएगा. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान और भारत के बीच मैच के दौरान भारत में विज्ञापनों का एयरटाइम 4800 अमेरिकी डॉलर तक बिकता है. उन्होंने कहा, "इसके अलावा आईसीसी ने कई तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स कर रखे हैं, जिनमें ग्राउंड ब्रांडिंग है, टाइटल स्पॉन्सरशिप है." बायकॉट करने की हालत में पाकिस्तान टीम पर संभावित प्रतिबंध के सवाल पर नौमान नियाज़ का कहना था कि अगर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अपनी टीम वर्ल्ड कप के लिए न भेजने का फ़ैसला करे तो फिर यह प्रतिबंध लग सकता है. उनका कहना है, "लेकिन अगर पाकिस्तान की सरकार यह फ़ैसला करती है तो फिर आईसीसी के लिए बैन लगाना इतना आसान नहीं होगा." इमेज स्रोत, SAEED KHAN/AFP via Getty Images पाकिस्तान के संभावित फ़ैसले को लेकर क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अधिकारी भी अलग-अलग राय रखते हैं. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) तौक़ीर ज़िया की राय है कि पाकिस्तान को टी-20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार नहीं करना चाहिए. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के बारे में आईसीसी के फ़ैसले पर किसी दूसरे बोर्ड ने एतराज़ नहीं किया, "आईसीसी ने यह फ़ैसला सर्वसम्मति से लिया है. इसलिए पाकिस्तान को अब इस मामले को खींचने के बजाय इस पर अपना रुख़ साफ़ करना चाहिए." उनके मुताबिक़, "इसमें कोई शक नहीं कि पाकिस्तान ने सैद्धांतिक बात की है, लेकिन पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, भारत और पाकिस्तान के मैच के प्रसारण अधिकारों का भी मामला है. इन परिस्थितियों में पाकिस्तान के लिए इस मैच का बहिष्कार करना भी इतना आसान नहीं होगा." लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) तौक़ीर ज़िया कहते हैं कि क्रिकेट बोर्ड ने यह फ़ैसला सरकार पर छोड़ दिया है और "अब देखना होगा कि सरकार भारत के साथ संबंधों को देखते हुए क्या फ़ैसला लेती है." पूर्व पीसीबी चेयरमैन ख़ालिद महमूद, जनरल तौक़ीर ज़िया से सहमत नहीं हैं. बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अपने सैद्धांतिक रुख़ पर अड़े रहना चाहिए. उनका कहना था कि पाकिस्तान को एक बार फिर आईसीसी की इमरजेंसी बैठक बुलाने की मांग करनी चाहिए. ख़ालिद महमूद के मुताबिक़, "पाकिस्तान को चाहिए कि वह आईसीसी के दूसरे सदस्यों को यह समझाए कि भारत हर बार खेल में राजनीति लेकर आता है और यह सिलसिला रुकना चाहिए." पीसीबी के पूर्व चेयरमैन के अनुसार, "कभी भारत के क्रिकेटर हाथ नहीं मिलाते, कभी ट्रॉफ़ी लेने से मना करते हैं, तो कभी किसी दूसरे देश में जाकर खेलने से इनकार करते हैं." उन्होंने कहा, "आईसीसी के दूसरे सदस्य देशों को भी यह समझना चाहिए कि आख़िर भारत के साथ ही हर देश का विवाद क्यों होता है." वह कहते हैं कि अतीत में "कई टीमें सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान आने से मना करती रही हैं, आईसीसी ने किसी टीम को पाकिस्तान जाकर खेलने पर मजबूर नहीं किया तो अब बांग्लादेश को क्यों मजबूर किया जा रहा है कि वह भारत जाकर खेले?" उनका कहना था कि अगर "सिद्धांतों के आधार पर करोड़ों डॉलर भी क़ुर्बान करना पड़े तो इससे पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि दुनिया पैसा नहीं, सिद्धांत देखती है." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

स्रोत: BBC Hindi

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