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अमेरिका मिडटर्म इलेक्शन: मिशिगन के डेमोक्रेटिक प्रत्याशी अब्दुल अल-सैयद इस क़दर चर्चा में क्यों हैं?

✍️ Admin 📅 31 October, 2026 ⏰ 07:16 AM 👁 13 views

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images समरा लुक़मान पूरी ज़िंदगी डेमोक्रेटिक पार्टी की समर्थक रही हैं. लेकिन 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने गर्व से डोनाल्ड ट्रंप को दोबारा राष्ट्रपति बनाने के लिए वोट दिया. तब उनके फ़ैसले के पीछे केवल एक मुद्दा था और अगले हफ़्ते होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में भी उनका वोट उसी मुद्दे पर तय होगा. यमनी मूल की अमेरिकी नागरिक लुक़मान ने बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड सर्विस के 'द ग्लोबल स्टोरी' कार्यक्रम से कहा, "मेरे लिए सब कुछ ग़ज़ा का मुद्दा है." वह कहती हैं, "अगर ग़ज़ा, इसराइल और फ़लस्तीन को लेकर आपका रुख़ सही नहीं है, तो हमें सत्ता में आपकी ज़रूरत नहीं है और न ही हम आपको वोट देंगे. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किस पार्टी से हैं." अमेरिका की ओर से इसराइल को दिए जा रहे समर्थन से नाराज़ लुक़मान जैसे कई मतदाताओं ने 2024 में रिपब्लिकन पार्टी को मिशिगन जैसे अहम राज्य में जीत दिलाने में मदद की. इससे पहले ये मतदाता आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देते रहे थे. अब नवंबर में होने वाले चुनाव की सबसे कड़ी टक्करों में से एक में इस मुद्दे के दोनों तरफ़ खड़े मतदाताओं की चिंताएं उनके वोट का फ़ैसला कर रही हैं. इमेज स्रोत, Anadolu via Getty Images मिशिगन में सीनेट की ख़ाली सीट के लिए बेहद कड़ा मुक़ाबला चल रहा है. यह चुनाव तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि ट्रंप के बाक़ी कार्यकाल में अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा. डेमोक्रेटिक पार्टी को यह सीट अपने पास रखनी है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी इसे जीतना चाहती है. लेकिन मतदान का दिन नज़दीक आने तक किसी भी उम्मीदवार की जीत तय नहीं दिख रही है. डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से डॉक्टर अब्दुल अल-सैयद उम्मीदवार हैं. अगर वह तीन नवंबर को चुनाव जीतते हैं, तो अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर होंगे. अल-सैयद ने कई बार सात अक्तूबर 2023 को हमास और दूसरे फ़लस्तीनी हथियारबंद गुटों के हमले के बाद ग़ज़ा में इसराइल की सैन्य कार्रवाई को 'जनसंहार' बताया है. इसराइल इस आरोप को सख़्ती से ख़ारिज करता है. अल-सैयद ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में इसराइल समर्थक उम्मीदवार को मामूली अंतर से हराया था. उनका मुक़ाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोज़र्स से है. रोज़र्स अमेरिका की फेडरल जांच एजेंसी एफ़बीआई के पूर्व एजेंट हैं और 14 साल तक हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स के सदस्य रह चुके हैं. उन्हें डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला हुआ है. रोज़र्स अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इसराइल को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता में कटौती का विरोध करते हैं. इमेज स्रोत, Anadolu via Getty Images देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में आम तौर पर अर्थव्यवस्था और जीवनयापन की लागत जैसे घरेलू मुद्दे हावी रहते हैं. लेकिन मिशिगन में ग़ज़ा का युद्ध मतदाताओं के लिए एक तरह की कसौटी बन गया है. दोनों उम्मीदवार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि अमेरिकी नागरिकों से कर के रूप में मिलने वाला पैसा इस संघर्ष में इस्तेमाल किया जा रहा है. ब्राउन यूनिवर्सिटी के 'कॉस्ट्स ऑफ़ वॉर' प्रोजेक्ट के मुताबिक़, सितंबर 2025 तक इसराइल को दी गई अमेरिकी सैन्य सहायता लगभग 21 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी. अमेरिका के किसी भी दूसरे राज्य के मुक़ाबले मिशिगन में अरब मूल के अमेरिकी नागरिकों का प्रतिशत सबसे अधिक है. यहाँ यहूदी मतदाताओं की भी अच्छी-ख़ासी आबादी है, जो इसराइल का मज़बूती से समर्थन करती रही है. ऐतिहासिक रूप से ये दोनों समुदाय डेमोक्रेटिक पार्टी के मज़बूत समर्थक रहे हैं. लेकिन 2024 में मध्य पूर्व को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी की विदेश नीति से नाराज़ कुछ अरब और मुस्लिम मतदाताओं ने 'अनकमिटेड' अभियान चलाया. प्राइमरी चुनावों के दौरान एक लाख से अधिक मतदाताओं ने किसी उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया. वे तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन की इसराइल को दिए जा रहे 'अटूट' समर्थन से अपनी नाराज़गी दिखाना चाहते थे. जब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी कमला हैरिस को मिली और उन्होंने नीतियां जारी रखने की बात कही, तो लुक़मान जैसे मतदाताओं को लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है. लुक़मान कहती हैं, "मैं बहुत नाराज़ थी क्योंकि पूरी ज़िंदगी डेमोक्रेट रही थी. नाराज़गी केवल इस बात को लेकर नहीं थी कि उन्होंने 'युद्धविराम' शब्द नहीं कहा या जनसंहार रोकने की कोशिश नहीं की." "नाराज़गी ख़ास तौर पर इसलिए थी क्योंकि वे अपने रुख़ पर कायम रहे और उन्होंने कहा, 'हमने कुछ ग़लत नहीं किया. हम अपनी नीतियां जारी रखेंगे.'" इसके बाद लुक़मान भी ट्रंप का समर्थन करने वाले मुस्लिम मतदाताओं में शामिल हो गईं. वह कहती हैं, "मैंने केवल उन्हें वोट ही नहीं दिया, बल्कि उनके लिए चुनाव प्रचार भी किया." हालांकि लुक़मान अब ख़ुद को रिपब्लिकन मानती हैं, लेकिन सीनेट चुनाव में वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अल-सैयद का पूरे उत्साह से समर्थन कर रही हैं. इमेज स्रोत, AFP via Getty Images अरब मूल के एक अन्य अमेरिकी मतदाता आमेर ज़हर का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को अल-सैयद जैसे फ़लस्तीन समर्थक उम्मीदवार को अपनाने के लिए 2024 के चुनाव से मिले झटके की ज़रूरत थी. ज़हर कहते हैं, "डेमोक्रेटिक पार्टी हमेशा मेरी बात नहीं करती और मुझे लगता है कि वह हमेशा हमारे समुदाय की बात भी नहीं करती." "हमें डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर एक क्रांति लानी पड़ी और हमने 2024 में यही किया. उस बदलाव और फ़लस्तीन पर सही रुख़ रखने वाले उम्मीदवारों की जीत के बाद अब हमें वहां पहले से कहीं ज़्यादा अपनापन महसूस होता है." पार्टी के भीतर हो रहे बदलावों ने कई अरब मूल के अमेरिकी मतदाताओं की चिंताओं को जगह दी है. लेकिन अब मतदाताओं का एक दूसरा वर्ग यह महसूस कर रहा है कि पार्टी उसे छोड़ रही है. इमेज स्रोत, Bloomberg via Getty Images कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि किसी संकट के समय अल-सैयद यहूदी समुदाय की सुरक्षा कर पाएंगे या नहीं. मार्च में टेंपल इसराइल यहूदी उपासना स्थल पर हिंसक हमले के बाद अल-सैयद ने कहा था, "जिन लोगों को चोट पहुँचती है, वे दूसरों को चोट पहुँचाते हैं." हमलावर ने लेबनान पर इसराइली हवाई हमले में अपने रिश्तेदारों को खो दिया था. बाद में अल-सैयद ने माफ़ी मांगी और कहा कि वह हमले को सही ठहराने की कोशिश नहीं कर रहे थे. लेकिन इससे लोगों की चिंताएं पूरी तरह दूर नहीं हुईं. मिशिगन बोर्ड ऑफ़ रब्बीज़ के अध्यक्ष एरन स्टार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह अल-सैयद को वोट नहीं देंगे. वह कहते हैं, "यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका था." उन्होंने 'द ग्लोबल स्टोरी' से कहा, "हमारे समुदाय के ज़्यादातर लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दिया है. लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सदस्यों और कुछ उम्मीदवारों की भाषा और उनके क़दम हमारी सुरक्षा को ख़तरे में डाल रहे हैं. मैं पूरी पार्टी की बात नहीं कर रहा हूँ." जिस तरह 2024 में मिशिगन के कुछ मुस्लिम डेमोक्रेटिक मतदाताओं ने पार्टी से दूरी बना ली थी, उसी तरह अब कुछ कट्टर डेमोक्रेट यहूदी मतदाता रिपब्लिकन उम्मीदवार को वोट दे रहे हैं या मतदान से पूरी तरह दूर रहने की सोच रहे हैं. वकील और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन के रीजेंट जॉर्डन एकर कहते हैं, "मैं डेमोक्रेट हूं. लेकिन सबसे पहले मुझे यह भरोसा होना चाहिए कि जिस व्यक्ति को मैं वोट दे रहा हूं, वह मेरा, मेरी राजनीति और मेरे अस्तित्व का सम्मान करता है." एकर अल-सैयद को 20 वर्षों से जानते हैं. दोनों ने एक साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी. लेकिन एकर को अब भी यक़ीन नहीं है कि वह अपने पुराने सहपाठी को वोट देंगे. दूसरी ओर, रोजर्स ख़ुद को इसराइल का मज़बूत दोस्त बताकर राज्य के यहूदी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अल-सैयद को 'यहूदी विरोधी' भी कहा है. आलोचकों का आरोप है कि रोजर्स अपने प्रतिद्वंद्वी को इस्लामी कट्टरपंथ का हमदर्द दिखाकर इस्लामोफ़ोबिया भड़का रहे हैं. रोजर्स और ट्रंप दोनों ने आरोप लगाया है कि मिस्र से अमेरिका आकर बसे परिवार से ताल्लुक रखने वाले अल-सैयद के मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध हैं. अल-सैयद कई बार इस संगठन से ख़ुद को अलग बता चुके हैं और किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते रहे हैं. मतदाताओं के एक बड़े हिस्से के लिए सीनेट का यह तीखा चुनाव प्रचार केवल राजनीतिक बँटवारे को ही नहीं, बल्कि नस्लीय और जातीय तनाव को भी बढ़ा रहा है. हालांकि अल-सैयद का समर्थन करने वाले यहूदी मतदाता डेविड फ़्रॉयंड इसके लंबे समय के असर को लेकर बहुत चिंतित नहीं हैं. वह कहते हैं, "सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मतलब है कि हर अल्पसंख्यक समुदाय की रक्षा की जाए." "यहूदियों की सुरक्षा को 'यहूदी सुरक्षा' नाम की अलग श्रेणी बनाकर सुरक्षित नहीं रखा जा सकता. यह सभी लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल है." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

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