गोंडा। राजधानी लखनऊ को कई जिलों से जोड़ने वाले अत्यधिक जर्जर हो चुके 41 साल पुराने अति महत्वपूर्ण घाघरा संजय पुल की आखिर कितने सालों तक मरम्मत कराई जाती रहेगी। इसके चलते सालों से आए दिन इस पुल पर वाहनों का भारी जाम लगता रहता है। जितने सालों से बार बार मरम्मत कराई जा रही है अब तक नया पुल बन जाना चाहिए।
संबंधित जिलों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भारी उदासीनता के चलते ऐसा समय रहते नहीं हो पा रहा है। इसकी मार संबंधित जिलों के निवासियों को झेलनी पड़ रही है। इसके चलते आए दिन इस पुल में मरम्मत का काम होता रहता है।लोक निर्माण विभाग के मुताबिक पिछले बीस सालों में इस पुल पर यातायात कई गुना बढ गया है। इस पुल के जॉइंट छह बार से ज्यादा टूट चुके हैं। इससे बहराइच गोंडा बलरामपुर एवं श्रावस्ती समेत कई जिलों का यातायात प्रभावित होकर रह जाता है।
नेपाल का व्यापारिक मार्ग भी इससे जुड़ा हुआ है।लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित घाघरा नदी का संजय सेतु अब जर्जर हो चुका है। साल 1984 में बना यह पुल भारी वाहनों का बोझ नहीं उठा पा रहा है। बढ़ते यातायात के कारण पुल की दशा बेहद खराब हो गई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 9 अप्रैल 1981 को इस पुल की आधारशिला रखी थी। उस समय यह क्षेत्र का सबसे लंबा पुल था। अब सरकार ने पुराने संजय सेतु के बगल में 300 करोड़ रुपए की लागत से नया पुल बनाने का फैसला किया है। यह काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंपा गया जा चुका है। कब तक इसका निर्माण शुरू होगा इसकी अभी तक कोई तारीख नहीं आ पाई है।