गेहूं सिंचाई के पीक सीजन में मंहगा डीजल खरीद कर किसान सिंचाई को मजबूर
बालपुर गोंडा। विभागीय अधिकारियों की भारी लापरवाही के सरयू नहर को चालू हुए तीन साल बीतने के बावजूद धनई पट्टी नहर क्षेत्र के हज़ारों किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल पाया है। क्षेत्रीय किसान अपनी गेहूं की फसल की सिंचाई महंगा डीजल खरीदकर पम्पिंग सेट इंजन के जरिए करने के लिए मजबूर हैं।
गेहूं सिंचाई का पीक सीजन होने के बावजूद इस क्षेत्र के किसानों को नहर का पानी नहीं नसीब हो पाया है। जेसीबी एवं पोकलैंड से नहर लगातार खुदाई की जा रही है। बाहर से मिट्टी लाकर नहर की पटरी बनाने के बजाय नहर की मिट्टी खोदकर पटरी बनाई जा रहा है। सरकारी कागजों में इस क्षेत्र के किसानों को नहर पानी फसलों की सिंचाई के लिए समय से उपलब्ध होने की शासन को रिपोर्ट भेजकर कोरम पूरा किया जा रहा है। इस तरह से विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भारी कीमत खर्चा करके भुगतना पड़ रहा है।
इस तरह से 89.800 किलोमीटर लंबी सरयू नहर की मुख्य शाखा का फैलाव बहराइच जिले से शुरू होकर गोंडा जिले के परसागोंडरी त्योरासी होते हुए तरबगंज तक गई है। सेमरी, सहजौरा, मच्छहरिया, मंगुरा बाजार समेत 3 जगहों पर सरयू नहर की इस शाखा का विस्तार है।सरयू नहर की शाखा धनईपट्टी माइनर की लंबाई करीब 19 किलोमीटर में से 17.5 किलोमीटर की खुदाई पूरी की जा चुकी है। धनईपट्टी मुख्य नहर की 9 माइनर शाखाएं है इससे इसका कुल दायरा बढ़कर करीब 95 किलोमीटर का हो जाता है।परसागोंड़री,सोनहरा,हड़ियागाड़ा,गोगिया, सालपुर धौताल, धानी, धनखर,नरायनपुर मर्दन, सरैंया चौबे, तुलसीपुर, चांदपुर, खरगूपुर, दुल्लापुर, ठडक्कीपट्टी, धनईपट्टी समेत 17 गांव धनईपट्टी मुख्य नहर से सीधे जुड़े हुए है।
धनईपट्टी मुख्य नहर के 9 माइनर है। इनमें सबसे पहले बेलवानोहर माइनर करीब 8 किलोमीटर का है। इसके तहत बेलवानोहर,सालपुर धौताल,धनखर,डोमाकल्पी, ज्ञानपुर सुभागपुर, समेत आधा दर्जन से अधिक गांव आते है। इसके बाद दूसरे नंबर पर दुरगोंड़वा माइनर करीब 3 किलोमीटर लंबा है। इसमें दुरगोंड़वा व नरायनपुर मर्दन 2 ग्रामपंचायतों के करीब दो दर्जन गांव शामिल है। तीसरे स्थान पर करनपुर माइनर करीब 3 किलोमीटर लंबा है। इसमें तुलसीपुर व करनपुर समेत 2 ग्राम पंचायतों के करीब डेढ़ दर्जन गांवों के नाम शामिल है। चौथे स्थान पर चांदपुर माइनर भी करीब 3 किलोमीटर का है। इसके तहत चांदपुर ग्राम पंचायत के करीब दर्जनभर गांव आते है।
पांचवे स्थान पर खरगूपुर माइनर करीब 3.5 किलोमीटर का है। इसमें खरगूपुर ग्रामपंचायत के करीब डेढ़ दर्जन गांव आते है। छठवें स्थान पर गोंडवा माइनर करीब 4 किलोमीटर लंबा है। इसके तहत दुल्लापुर व खरगूपुर के ज्यादातर गांव आते है। सातवें स्थान पर भटपुरवा माइनर करीब 9 किलोमीटर लंबा है। इसके तहत ठड़क्कीपट्टी, धनईपट्टी,माधवपुर, हरखापुर,लव्वा टेपरा, चिरेबसना,निहालपुर समेत 7 ग्रामपंचायतों के ज्यादातर गांव आते हैं। आठवें स्थान पर लव्वाटेपरा माइनर करीब 3.5 किलोमीटर का है। इसमें लव्वाटेपरा, धनईपट्टी, विरसिंहपुर समेत तीन गाँवों के क्षेत्र आते है। नवें स्थान पर डिडसिया कला माइनर करीब 5.5 किलोमीटर लंबा है। इसमें डिडसिया कला, हरखापुर,खरगूपुर समेत तीन ग्राम पंचायतों के गांव आते है।
इस नहर के चालू होने से क्षेत्र के करीब 47 गाँवों के 20 हजार किसानों की 7000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। सिंचाई विभाग की एसडीओ रोली वर्मा ने बताया कि इस बार नहर की खुदाई में बाहर से मिट्टी लाने का प्राविधान नहीं है। सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर पीयूष ने बताया कि धनईपट्टी नहर माइनर पर ठकुरापुर से आगे साफ सफाई कराई जा रही है। इसका बेड ऊंचा है इसलिए लेवल में करने के लिए मिट्टी की खुदाई कराई जा रही है। नहर की पटरी पटाई के लिए मिट्टी बाहर से न लाने की शिकायत उनको मिली है और उसे देखने के लिए वह मौके पर पहुंच रहे हैं।
सरयू नहर चालू हुए तीन साल बाद भी धनई पट्टी नहर क्षेत्र के किसानों के खेतों को पानी नहीं हुआ नसीब
गेहूं सिंचाई के पीक सीजन में मंहगा डीजल खरीद कर किसान सिंचाई को मजबूर
बालपुर गोंडा। विभागीय अधिकारियों की भारी लापरवाही के सरयू नहर को चालू हुए तीन साल बीतने के बावजूद धनई पट्टी नहर क्षेत्र के हज़ारों किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल पाया है। क्षेत्रीय किसान अपनी गेहूं की फसल की सिंचाई महंगा डीजल खरीदकर पम्पिंग सेट इंजन के जरिए करने के लिए मजबूर हैं।
गेहूं सिंचाई का पीक सीजन होने के बावजूद इस क्षेत्र के किसानों को नहर का पानी नहीं नसीब हो पाया है। जेसीबी एवं पोकलैंड से नहर लगातार खुदाई की जा रही है। बाहर से मिट्टी लाकर नहर की पटरी बनाने के बजाय नहर की मिट्टी खोदकर पटरी बनाई जा रहा है। सरकारी कागजों में इस क्षेत्र के किसानों को नहर पानी फसलों की सिंचाई के लिए समय से उपलब्ध होने की शासन को रिपोर्ट भेजकर कोरम पूरा किया जा रहा है। इस तरह से विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भारी कीमत खर्चा करके भुगतना पड़ रहा है।
इस तरह से 89.800 किलोमीटर लंबी सरयू नहर की मुख्य शाखा का फैलाव बहराइच जिले से शुरू होकर गोंडा जिले के परसागोंडरी त्योरासी होते हुए तरबगंज तक गई है। सेमरी, सहजौरा, मच्छहरिया, मंगुरा बाजार समेत 3 जगहों पर सरयू नहर की इस शाखा का विस्तार है।सरयू नहर की शाखा धनईपट्टी माइनर की लंबाई करीब 19 किलोमीटर में से 17.5 किलोमीटर की खुदाई पूरी की जा चुकी है। धनईपट्टी मुख्य नहर की 9 माइनर शाखाएं है इससे इसका कुल दायरा बढ़कर करीब 95 किलोमीटर का हो जाता है।परसागोंड़री,सोनहरा,हड़ियागाड़ा,गोगिया, सालपुर धौताल, धानी, धनखर,नरायनपुर मर्दन, सरैंया चौबे, तुलसीपुर, चांदपुर, खरगूपुर, दुल्लापुर, ठडक्कीपट्टी, धनईपट्टी समेत 17 गांव धनईपट्टी मुख्य नहर से सीधे जुड़े हुए है।
धनईपट्टी मुख्य नहर के 9 माइनर है। इनमें सबसे पहले बेलवानोहर माइनर करीब 8 किलोमीटर का है। इसके तहत बेलवानोहर,सालपुर धौताल,धनखर,डोमाकल्पी, ज्ञानपुर सुभागपुर, समेत आधा दर्जन से अधिक गांव आते है। इसके बाद दूसरे नंबर पर दुरगोंड़वा माइनर करीब 3 किलोमीटर लंबा है। इसमें दुरगोंड़वा व नरायनपुर मर्दन 2 ग्रामपंचायतों के करीब दो दर्जन गांव शामिल है। तीसरे स्थान पर करनपुर माइनर करीब 3 किलोमीटर लंबा है। इसमें तुलसीपुर व करनपुर समेत 2 ग्राम पंचायतों के करीब डेढ़ दर्जन गांवों के नाम शामिल है। चौथे स्थान पर चांदपुर माइनर भी करीब 3 किलोमीटर का है। इसके तहत चांदपुर ग्राम पंचायत के करीब दर्जनभर गांव आते है।
पांचवे स्थान पर खरगूपुर माइनर करीब 3.5 किलोमीटर का है। इसमें खरगूपुर ग्रामपंचायत के करीब डेढ़ दर्जन गांव आते है। छठवें स्थान पर गोंडवा माइनर करीब 4 किलोमीटर लंबा है। इसके तहत दुल्लापुर व खरगूपुर के ज्यादातर गांव आते है। सातवें स्थान पर भटपुरवा माइनर करीब 9 किलोमीटर लंबा है। इसके तहत ठड़क्कीपट्टी, धनईपट्टी,माधवपुर, हरखापुर,लव्वा टेपरा, चिरेबसना,निहालपुर समेत 7 ग्रामपंचायतों के ज्यादातर गांव आते हैं। आठवें स्थान पर लव्वाटेपरा माइनर करीब 3.5 किलोमीटर का है। इसमें लव्वाटेपरा, धनईपट्टी, विरसिंहपुर समेत तीन गाँवों के क्षेत्र आते है। नवें स्थान पर डिडसिया कला माइनर करीब 5.5 किलोमीटर लंबा है। इसमें डिडसिया कला, हरखापुर,खरगूपुर समेत तीन ग्राम पंचायतों के गांव आते है।
इस नहर के चालू होने से क्षेत्र के करीब 47 गाँवों के 20 हजार किसानों की 7000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। सिंचाई विभाग की एसडीओ रोली वर्मा ने बताया कि इस बार नहर की खुदाई में बाहर से मिट्टी लाने का प्राविधान नहीं है। सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर पीयूष ने बताया कि धनईपट्टी नहर माइनर पर ठकुरापुर से आगे साफ सफाई कराई जा रही है। इसका बेड ऊंचा है इसलिए लेवल में करने के लिए मिट्टी की खुदाई कराई जा रही है। नहर की पटरी पटाई के लिए मिट्टी बाहर से न लाने की शिकायत उनको मिली है और उसे देखने के लिए वह मौके पर पहुंच रहे हैं।