Regd. UDYAM-UP-31-0004031
प्रदेश के तेजी से उभरते हुए जनसंवाद समाचार न्यूज चैनल व न्यूज पोर्टल पर अपने व्यवसाय व शिक्षण संस्थान के तेजी से आगे बढ़ोत्तरी के लिए प्रचार प्रसार कराकर लाभ प्राप्त करने के लिए सम्पर्क करें। सम्पर्क सूत्र 9506980980

नेपाल बाढ़: गोरखपुर के आशुतोष ने अपनी आँखों के सामने लोगों को बहते देखा, ख़ुद ऐसे बचाई जान

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. वहीं 5000 से ज़्यादा लोग अब भी लापता हैं. नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. इस आपदा की चपेट में आने वालों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. हालांकि, राहत और बचाव अभियानों के दौरान कई लोगों को सुरक्षित निकाला भी गया है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले आशुतोष उपाध्याय भी उन लोगों में हैं, जो इस तबाही के बीच अपनी जान बचाकर भारत लौटने में कामयाब रहे. आशुतोष इसी साल मार्च महीने में काम के लिए नेपाल गए थे. वह रसुवा इलाक़े में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में पाइपलाइन से जुड़े काम पर लगे थे. लेकिन 26 अगस्त की सुबह जो हुआ, उसने उनकी ज़िंदगी बदल दी. आशुतोष स्थानीय पत्रकार अजीत सिंह को बताते हैं कि उस सुबह वह और उनके साथी काम पर पहुँचे ही थे कि अचानक पावर हाउस में पानी आने लगा. उन्होंने कहा, "उसके बाद हम लोग चिल्लाकर भागने लगे." लोगों ने किसी तरह पावर हाउस से बाहर निकलकर पहाड़ की तरफ़ भागकर अपनी जान बचाई. आशुतोष के मुताबिक़, ''कुछ ही देर में पानी इतनी तेज़ी से बढ़ा कि कंपनी का कैंप और ऑफ़िस भी उसकी चपेट में आ गए.'' उन्होंने बताया कि साथ में काम करने वाला एक व्यक्ति उनकी आंखों के सामने बह गया. उन्होंने कहा, ''वह बिहार का रहने वाला था और उसका नाम राहुल था''. आशुतोष का कहना है कि कई लोग घायल हुए, जबकि उनके तीन दोस्त अब भी लापता हैं. वे बताते हैं, "मंज़र बहुत भयानक था. सारे लोग डर गए थे. किसी को भागने का मौक़ा नहीं मिला." वह कहते हैं कि वहाँ मौजूद लोगों को यह अंदाज़ा ही नहीं था कि पानी इतनी तेज़ी से बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा, ''कंपनी की तरफ़ से सुरक्षा बैठकों में डैम से पानी छोड़े जाने की स्थिति में सायरन बजने की बात बताई जाती थी, लेकिन उस दिन उन्हें पहले से किसी तरह की चेतावनी नहीं मिली. अचानक पानी आ गया. सायरन का कुछ पता ही नहीं चला." बाढ़ से बचने के बाद आशुतोष और उनके साथ मौजूद दूसरे लोग पहाड़ पर चढ़ गए. उनका कहना है कि वहाँ क़रीब 130 लोग मौजूद थे. रेस्क्यू टीम ने पहली बार उन सबको वहाँ देखा, फिर कुछ समय बाद दोबारा पहुँचकर वहाँ से उन्हें निकाला गया. क़रीब 24 घंटे बाद हेलिकॉप्टर से उन्हें निकाला गया. उन्होंने बताया कि पहाड़ पर फँसे लोगों तक खाना और पानी भी पहुँचाया गया. आशुतोष बताते हैं, उस वक़्त सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि किसी तरह परिवार को अपनी सलामती की ख़बर दी जाए. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. लेकिन बाढ़ की वजह से मोबाइल नेटवर्क और दूसरे संचार माध्यम भी प्रभावित हो गए थे. आशुतोष के दादा शंभू शरण उपाध्याय ने बताया कि इस दौरान तीन दिनों तक घर में चूल्हा नहीं जला. वह कहते हैं, ''26 अगस्त को सुबह पोते ने फ़ोन किया था, उसके बाद तीन दिन तक बात नहीं हुई. हम वहाँ की ख़बरें देखकर परेशान थे. तीन दिनों तक घर में किसी ने खाना नहीं खाया. रातभर हम जागते थे, नींद नहीं आती थी. जिस दिन इनको रेस्क्यू कर के काठमांडू लाया गया, तब फ़ोन आया. बहुत घबराहट में दिन गुज़रे थे.'' आशुतोष ने मोबाइल से रेस्क्यू के दौरान के कुछ वीडियो भी बनाए थे. यह वीडियो उन्होंने स्थानीय पत्रकार अजीत सिंह के साथ साझा किए हैं. इनमें अफ़रा-तफ़री का माहौल, तेज़ रफ़्तार से आता पानी और उससे होती तबाही साफ़ नज़र आता है. इनमें रेस्क्यू के भी कुछ क्लिप हैं, जिसमें हेलिकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित निकालते हुए भी देखा जा सकता है. कुछ घायलों को स्ट्रेचर के ज़रिए अस्पताल ले जाते हुए भी दिखाया गया है. एक वीडियो में रेस्क्यू टीम के पहुँचने के बाद लोगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि घबराने की ज़रूरत नहीं है और वे सुरक्षित हैं. आशुतोष कहते हैं कि उस वक़्त उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे ज़िंदा बच पाएंगे. वह कहते हैं, "दो-चार मिनट देर होती तो शायद मैं भी नहीं बच पाता." आशुतोष बताते हैं कि उनके पास मौजूद पहचान से जुड़े लगभग सभी दस्तावेज़ बह गए थे. रेस्क्यू के बाद उन्हें सेना के कैंप ले जाया गया और फिर काठमांडू पहुँचाया गया. आशुतोष ने कहा कि वह और उनके साथी क़रीब दो दिन काठमांडू में रहे. वहां मेडिकल जांच हुई. इसके बाद भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और दस्तावेज़ों के बारे में जानकारी ली. आशुतोष बताते हैं कि उनके दस्तावेज़ बाढ़ में बह जाने की बात बताने के बाद अधिकारियों ने उनकी मदद की और उन्हें भारत-नेपाल सीमा तक पहुंचाया गया. वहाँ से वे अपने घर गोरखपुर लौट सके. आशुतोष के घर लौटने से परिवार को राहत तो मिली है, लेकिन उनके कुछ साथी अब भी लापता हैं. आशुतोष के मुताबिक़, उनके साथ काम करने वाले तीन लोग अब तक नहीं मिले हैं. वह कहते हैं कि वहाँ मौजूद लोग नेपाली सेना और रेस्क्यू टीम से लगातार अपने साथियों के बारे में जानकारी मांग रहे हैं. फ़िलहाल आशुतोष सही सलामत घर लौट चुके हैं, उनके परिवार को इस बात की तसल्ली है. लेकिन नेपाल में बिताए वे कुछ घंटे उनके लिए ऐसी याद बन गए हैं, जिन्हें वह शायद कभी भूल नहीं पाएंगे. और न ही उनका परिवार उन्हें दोबारा नेपाल भेजने की हिम्मत जुटा पाएगा. उनके दादा ने कहा, '' इसके तीन साथी नहीं लौटे हैं. उनके परिवारवाले परेशान हैं. जो मंज़र आंखों के सामने देख लिया है, उसके बाद न लड़का ख़ुद और न हम उसे नेपाल दोबारा भेजने की हिम्मत कर सकते हैं.'' आशुतोष कहते हैं, "बहुत डर का माहौल था. वो पल अब भी आंखों में हैं. अब दोबारा नेपाल नहीं जाएंगे." (आशुतोष और उनके परिवार से बात गोरखपुर के स्थानीय पत्रकार अजीत सिंह ने की है.) बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi