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'समंदर हमारे गांव को निगल जाएगा': वो जगह जहां खेत और कुएं समुद्र में समाते जा रहे हैं

"एक समय था जब समुद्र हमारे गाँव से दो किलोमीटर से भी अधिक दूर था. तट के किनारे हमारे नारियल के बाग और बोरवेल थे. मीठे पानी के कुएं भी थे. अब सब कुछ नष्ट हो गया है. हमें डर है कि अगर समुद्र इसी तरह आगे बढ़ता रहा तो हमारा गांव भी तबाह हो जाएगा." ये शब्द वलसाड ज़िले के भागल गांव के निवासी सुमनभाई टंडेल के हैं. इस क्षेत्र में लगभग एक दर्जन गांव हैं जो समुद्र के बहुत क़रीब स्थित हैं और तटरेखा के तेज़ी से हो रहे कटाव के कारण उनका अस्तित्व ख़तरे में है. लेकिन भागल के लोगों की चिंताएं अधिक गंभीर हैं क्योंकि यह गांव समुद्र तल से नीचे स्थित है. कुछ स्थानों पर, समुद्र और गांव के बीच भूमि की एक बहुत पतली पट्टी ही बची है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भारी बारिश या ऊंची लहरों के दौरान यह पट्टी बह जाती है, तो गांव को बचाना मुश्किल होगा. वलसाड ज़िले के दंती, काकवाड़ी, दांडी, भागल जैसे गांव एक दूसरे के नज़दीक हैं. ये सभी गांव वर्तमान में समुद्र के कारण ख़तरे का सामना कर रहे हैं. सुमनभाई टंडेल कहते हैं, "एक समय था जब समुद्र तट पर हमारे पास ऐसे कुएं थे जिनमें साल भर खारा पानी रहता था." "इसके अलावा, मछुआरे अपना सामान वहीं रखते थे और अपनी नावों को वहीं लंगर डालकर रोकते थे. अब वह पूरा इलाक़ा समुद्र में डूब गया है. पिछले 15 से 20 सालों में कटाव सबसे तेज़ रहा है." "अगर इस कटाव को रोकने के लिए अभी ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो 12 से 15 गांव विलुप्त हो जाएंगे. हाल ही में नेपाल में जिस तरह पानी का बहाव हुआ, वैसा ही यहां भी हो सकता है." राज्य सरकार ने इन गांवों को समुद्र से बचाने के लिए एक सुरक्षा दीवार बनाने का काम शुरू कर दिया है, जिसमें दांती गांव के पास एक सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन बाक़ी के गांव मांग कर रहे हैं कि उनके यहां भी जल्द से जल्द एक दीवार बनाई जाए. भागल के लोग कहते हैं कि उनकी ज़मीन कभी बहुत उपजाऊ थी और अच्छी फ़सलें देती थी. इसके अलावा, यह फलों के लिए भी सही थी. अब पानी खारा होता जा रहा है और साथ ही, मिट्टी में खारापन होने की वजह से फ़सलें काटना मुश्किल हो रहा है. गांव के सरपंच आनंद पटेल ने कहा, "एक समय में हमारे गाँव में बोड़ा के बहुत सारे खेत थे और गांव बोड़ा के लिए मशहूर था." "इसके अलावा, यहां ग्वार की भी बहुत अच्छी पैदावार होती थी. इसी तरह, नारियल के खेत भी थे." "लेकिन जैसे ही मिट्टी में खारापन आने लगा, बोड़ा के पेड़ ख़त्म हो गए." "नारियल के पेड़ भी ज़्यादा खारापन बर्दाश्त नहीं कर पाते, इसलिए वे अब नहीं रहे." अभी, यहाँ कुछ जगहों पर धान की रोपाई हुई है, लेकिन पिछले दो हफ़्तों से बारिश न होने की वजह से धान के पौधों की जड़ों में खारापन आ गया है और वे सफ़ेद हो गए हैं. किसानों का कहना है कि अगर तुरंत बारिश नहीं हुई, तो यह फ़सल ख़राब हो जाएगी. लगभग तीन हज़ार की आबादी वाले गांव के ज़्यादातर लोग खेती और मछली पकड़ने पर निर्भर हैं. गांव में सातवीं क्लास तक का स्कूल है, लेकिन अगर उससे आगे पढ़ना है, तो 10 से 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. गांव के सरपंच ने बताया कि हर साल जब भारी बारिश होती है, तो गांव को जोड़ने वाली सड़क पर सीने तक पानी भर जाता है. हालांकि वलसाड के तटीय गांवों के लोग एक प्रोटेक्शन वॉल की मांग कर रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह कोई स्थाई या असरदार समाधान नहीं है. सूरत के ब्रैकिश वॉटर रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष एमएसएच शेख ने बीबीसी को बताया, "अभी जो प्रोटेक्शन वॉल बनी है, वह भी कुछ सालों में समुद्र के थपेड़ों से टूट जाएगी." "अगर हमें तटीय कटाव को रोकना है, तो सबसे पहले, कुदरती प्रोसेस में इंसानी दख़ल को रोकना होगा." "यानी, इस इलाक़े में ग़ैर-क़ानूनी रेत माइनिंग को रोकना चाहिए. या इस गांव के लोगों को कहीं और बसाना चाहिए. नहीं तो, तट के किनारे दीवार बनाकर कटाव को नहीं रोका जा सकता." एनवायरनमेंटल एक्टिविस्ट शेख कहते हैं, "तटीय कटाव एक आम कुदरती घटना है और यह इंसानी दख़ल की वजह से भी होती है. जैसे, जब नदी में कोई बदलाव होता है या कहीं से बड़ी मात्रा में रेत निकाली जाती है, तो कटाव तेज़ी से होता है." "एक जगह से रेत हटाने के बाद, कुदरत उसकी जगह भरने के लिए मिट्टी को हटा देती है." शेख़ के मुताबिक़, "गुजरात में, तट के किनारे तल से रेत निकाली जाती है, जिससे एक आर्टिफिशियल गड्ढा बन जाता है." "यह गड्ढा एक नेचुरल प्रोसेस से भर जाता है. यह मटीरियल आस-पास के किनारों से बह जाता है." "भले ही आप किसी नेचुरल धारा में एक छोटा सा गड्ढा बना दें, लेकिन कटाव के नेचुरल प्रोसेस से कई गुना ज़्यादा कटाव होता है." "इसलिए एक प्रोटेक्शन वॉल भी इस समस्या का इलाज नहीं है." देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. कोस्टल इरोज़न क्लाइमेट चेंज और इंसानी दख़ल से जुड़ा एक मुद्दा है, जिसमें गुजरात उन राज्यों में से है जो इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. 2024 के एनवायरनमेंटल स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक़, पिछले 28 सालों में गुजरात में 537 किलोमीटर से ज़्यादा तटरेखा का कटाव हुआ है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, राज्य सरकार ने 16वें फाइनेंस कमीशन को बताया कि गुजरात के 449 गांव तटके कटाव से प्रभावित हैं. इसका सबसे ज़्यादा असर वलसाड, नवसारी, सूरत, भरूच और जामनगर ज़िलों में देखा गया है. इसके अलावा, भावनगर, अमरेली, जूनागढ़, पोरबंदर, गिर सोमनाथ और देवभूमि द्वारका में भी तटरेखा का कटाव हुआ है. 2026 में संसद में एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि वलसाड ज़िले में लगभग 58 फ़ीसदी तटरेखा कटाव से प्रभावित हुई है जबकि नवसारी में 60 फ़ीसदी तटलाइन में कुछ हद तक कटाव हुआ है. नेशनल सेंटर फॉर कोस्टल रिसर्च (एनसीसीआर) के हवाले से कहा गया कि साउथ गुजरात में उदवारा के ऊपर का इलाका हाई-इरोजन ज़ोन में आता है, जबकि भागल बेल्ट मध्यम कटाव कैटेगरी में आता है. इस स्टडी में 1990 से 2022 तक 32 साल के समय में तटीय कटाव डेटा की जांच की गई. हालांकि, इसमें तटीय प्रोटेक्शन के लिए कोई सुझाव नहीं दिया गया. भागल गांव के लोगों का मानना ​​है कि अगर उनके गांव के पास समुद्र तट पर एक प्रोटेक्शन वॉल बन जाए, तो मिट्टी का कटाव रुक जाएगा और उनके खेतों में आने वाला खारा पानी भी रुक जाएगा. गांव के सरपंच आनंद पटेल कहते हैं, "हमने कई बार लोकल नेताओं के सामने यह बात रखी है. दांती गांव के पास एक प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई है, लेकिन हमारे गांव के लिए कुछ नहीं किया गया." "हमारा गांव समुद्र तल से नीचे है, इसलिए हमारे गांव पर खास ध्यान देने की ज़रूरत है." दूसरी ओर, वलसाड के विधायक भरत पटेल ने बीबीसी को बताया, "वलसाड तालुका में हमारे पास 16 किलोमीटर लंबी तटरेखा है. इसमें दांडी, भागल, काकवाड़ी, कोसांबा, दांती वगैरह गांव शामिल हैं." "अभी तक सरकार ने प्रोटेक्शन वॉल के लिए क़रीब 200 करोड़ रुपये की रक़म मंज़ूर की है." "अगर सरकार 200 से 250 करोड़ रुपये और दे, तो इतनी लंबी प्रोटेक्शन वॉल बनाई जा सकती है." उन्होंने कहा कि दांती और काकवाड़ी में इस वॉल की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. केंद्र सरकार ऐसी सुरक्षा दीवारों के लिए 90 प्रतिशत रकम देती है. "मैंने मुख्यमंत्री और राज्य के वित्त मंत्री से भी बात की है. भागल और दूसरे गांवों के लिए भी सुरक्षा दीवारें बनवाने की कोशिशें चल रही हैं." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi