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अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बावजूद बोले ग़ालिबाफ़- होर्मुज़ स्ट्रेट से फ़ीस वसूली जाएगी

इमेज स्रोत, Morteza Nikoubazl/NurPhoto via Getty Images अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार को समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं. इस बीच ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा है होर्मुज़ स्ट्रेट से फ़ीस वसूली जाएगी. जबकि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में यह कहा गया है कि ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों से टोल नहीं वसूलेगा. ग़ालिबाफ़ ने सरकारी टीवी इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट जंग से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा. उन्होंने कहा, "ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट पर संप्रभुता का अधिकार है और ज़ाहिर है कि हम इसकी सर्विसेज़ के लिए शुल्क वसूलेंगे." गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्रांस के एवियन-ले-बैंस में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के दौरान समझौते पर साइन किए. 14 बिंदुओं वाले इस समझौते को मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) कहा गया है. इसके मुताबिक़ ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. इमेज स्रोत, Oli SCARFF / AFP via Getty Images महिला टी-20 वर्ल्ड कप में भारत ने लगातार दूसरे मैच में जीत दर्ज करते हुए बुधवार को नीदरलैंड्स की टीम को 95 रन से हरा दिया. भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते 20 ओवर में 5 विकेट पर 209 रन बनाए. इसके जवाब में नीदरलैंड्स 17.3 ओवर में 114 रन पर सिमट गई. लीड्स में खेले गए इस मैच में स्मृति मंधाना और शेफ़ाली वर्मा ने 115 रन की साझेदारी की. मंधाना ने 74 और शेफ़ाली ने 55 रन की पारी खेली. गेंदबाज़ी करते हुए श्री चरणी ने 4 विकेट लिए हैं, जबकि शेफ़ाली वर्मा ने भी 3 विकेट अपने नाम किए. स्मृति मंधाना को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया. इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम प्वाइंट्स टेबल में अपने ग्रुप में पहले नंबर पर आ गई है. नीदरलैंड्स से पहले भारत ने पाकिस्तान को हराया था. इमेज स्रोत, Marvin Ibo Guengoer - GES Sportfoto/Getty Images फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप-एल मुक़ाबले में इंग्लैंड ने क्रोएशिया की टीम को 4-2 से हराया है. डलास स्टेडियम में खेले गए इस मैच में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने दो गोल किए, जबकि जूड बेलिंघम और मार्कस रैशफ़ोर्ड ने भी एक-एक गोल किए. दूसरी ओर, क्रोएशिया की टीम से मार्टिन बातुरिना और पीटर मूसा ने एक गोल किए. इंग्लैंड ने शुरुआत से ही मैच का रुख अपनी ओर कर लिया था. कप्तान हैरी केन ने 12वें मिनट में पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी. इस शुरुआती बढ़त के बाद इंग्लैंड ने मुक़ाबले पर अपना नियंत्रण बनाकर रखा. 42वें मिनट में हैरी केन ने अपना दूसरा गोल कर टीम को फिर बढ़त दिला दी. दूसरे हाफ़ की शुरुआत होते ही 47वें मिनट में जूड बेलिंघम गोल ने गोल किया, आख़िर में 85वें मिनट में मार्कस रैशफ़ोर्ड ने गोल दागकर इंग्लैंड की बढ़त 4-2 कर दी. क्रोएशिया के मार्टिन बातुरिना ने 36वें मिनट और पीटर मूसा ने फ़र्स्ट हाफ़ ख़त्म होने से थोड़ी देर पहले गोल किया, लेकिन इंग्लैंड की तेज़ी के सामने क्रोएशिया की टीम नहीं टिक पाई. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने ग्रुप-एल में तीन अंक हासिल किए, जबकि क्रोएशिया को टूर्नामेंट में झटका लगा. इससे पहले ग्रुप-के के एक अहम मैच में अपेक्षाकृत मज़बूत समझी जाने वाली पुर्तगाल की टीम को डीआर कांगो ने 1-1 की बराबरी पर रोक दिया. फ़ुटबॉल फ़ैंस की निगाहें पुर्तगाल की सुपरस्टार फ़ुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर थीं. लेकिन वो कुछ ख़ास कमाल नहीं कर सके. इमेज स्रोत, AHMAD GHARABLI/AFP via Getty Images अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर साइन होने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने दोनों देशों को बधाई दी है. शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि यह समझौते तुरंत प्रभाव से लागू होगा, इसके पहले क़दम के तौर पर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा. शहबाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद एमओयू’ इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन हुआ है. यह समझौता दोनों देशों के राष्ट्रपति ने साइन किया है और मैंने बतौर मध्यस्थ इसे मंज़ूरी दी है." उन्होंने लिखा "दोनों सरकारों के उच्च स्तर पर इस समझौते पर हस्ताक्षर करना यह दिखाता है कि दोनों पक्ष संघर्ष का हल बातचीत से निकालने के लिए गंभीर हैं. इस्लामाबाद एमओयू तुरंत लागू होगा. पहले क़दम के तौर पर ईरान तुरंत होर्मुज़ स्ट्रेट खोल देगा और अमेरिका तुरंत नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा." शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेताओं का भी आभार व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा, "मैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई और धन्यवाद देता हूं, जिनकी बातचीत के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता और शांति को प्राथमिकता देने की सोच ने एक बार फिर ऐसे संघर्ष को ख़त्म किया, जो क्षेत्र और उससे आगे के लिए विनाशकारी साबित हो सकता था. मैं अमेरिका की वार्ता टीम- जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर की मेहनत और योगदान की भी सराहना करता हूं." शहबाज़ शरीफ़ ने लिखा, "मैं ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी ख़ामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के विवेक, दूरदर्शिता और नेतृत्व का सम्मान करता हूं, जिन्होंने शांति को अपनाया. मैं ईरान की वार्ता टीम- मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़, अब्बास अराग़ची और इस्कंदर मोमेनी की लगातार कोशिशों की भी सराहना करता हूं, जिनकी वजह से यह समझौता संभव हुआ." शहबाज़ शरीफ़ ने अपने एक्स पोस्ट में क़तर की भूमिका का भी ज़िक्र किया है. साथ ही उन्होंने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के नेताओं के योगदान की भी सराहना की. पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर का ज़िक्र करते हुए शरीफ़ ने लिखा, "उनकी मेहनत, निस्वार्थ समर्पण और अहम भूमिका ने इस सफलता को संभव बनाया और शांति व क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढ़ाया." इमेज स्रोत, Hamed Malekpour/Iranian Parliament Communication Office/Handout via Getty Images अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए एमओयू पर साइन हो गए हैं. हालांकि, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा है कि भले ही 'अंतिम समझौता हो गया, लेकिन यह बिल्कुल भरोसेमंद नहीं' है. बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ग़ालिबाफ़ ने कहा कि वो अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'शीर्ष कमांडर हज क़ासिम की हत्या का मास्टरमाइंड' मानते हैं. दरअसल, मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ईरान की वार्ता टीम का हिस्सा हैं, लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने ये ज़िम्मेदारी मन नहीं होते हुए भी निभाई. मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने ईरानी ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (आईबीसी) को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैं खुद से बातचीत टीम में शामिल नहीं हुआ. मेरा मन नहीं था, फिर भी ये काम किया. खुद से इस ज़िम्मेदारी को न लेने की एक वजह यह थी कि ट्रंप ही हज क़ासिम की हत्या के मास्टरमाइंड हैं. जनरल सुलेमानी पूरे इस्लामी जगत के लिए प्रिय थे, लेकिन मेरे लिए वह व्यक्तिगत रूप से भी बहुत मायने रखते थे. उन्होंने ट्रंप का ज़िक्र करते हुए कहा, "क्या आपको लगता है कि मेरे लिए ऐसे व्यक्ति के साथ कोई टेक्स्ट तैयार करना आसान होता?" उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका पर मेरा अविश्वास और निराशावाद सबसे ज़्यादा है." अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर दस्तख़त होने के बाद ग़ालिबाफ़ ने कहा, "भले ही यह समझौता आख़िरी हो और सुरक्षा परिषद से मंज़ूरी भी मिल जाए, फिर भी इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. हमारी असली गारंटी ईरान की ताक़त है."

स्रोत: BBC Hindi