तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने रविवार (14 जून 2026) को लोकसभा स्पीकर को जानकारी दी कि उन्होंने एक ऐसी राजनीतिक पार्टी में मर्जर कर लिया है, जिसके पास देश में किसी भी स्तर पर एक भी निर्वाचित सीट नहीं है. माना जा रहा है कि यह कदम एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए उठाया गया है. इसी वजह से यह मामला अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है. इससे पहले इसी साल आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के मामले में भी ऐसा ही सवाल सामने आया था.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल सांसदों का एक समूह खुद किसी दूसरी पार्टी में मर्जर का ऐलान कर सकता है या फिर जिस राजनीतिक पार्टी के टिकट पर वे चुने गए हैं, उस मूल पार्टी की भी सहमति जरूरी होती है. इस सवाल का अंतिम और स्पष्ट जवाब अभी सुप्रीम कोर्ट को देना बाकी है.
स्रोत: ABP Hindi