भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है. एक तरफ इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और आर्थिक ताकत बढ़ाने वाला गेमचेंजर बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर पर्यावरणीय प्रभाव, बायोडायवर्सिटी और स्थानीय जनजातीय समुदायों पर इसके असर को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
I travelled through Great Nicobar today.
These are the most extraordinary forests I have ever seen in my life. Trees older than memory. Forests that took generations to grow.
The people on this island are equally beautiful - both the adivasi communities and the settlers - but… pic.twitter.com/vYdBWdYfIJ
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 29, 2026
सरकारी दावों और आलोचनाओं के बीच सच्चाई क्या है, यह समझना जरूरी है. इन्हीं पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए यहां 11 अहम सवालों के जरिए इस पूरी परियोजना की पड़ताल की गई है.
1. ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है?
ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक और आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में देश की मौजूदगी को सशक्त करना है. इस परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, पावर प्लांट और आधुनिक टाउनशिप विकसित किए जाने की योजना है. यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इसके जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापारिक क्षमता और सामरिक महत्व तीनों को एक साथ मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है.
Great Nicobar Project: Strategic Importance, Sustainable Development
✴️The Great Nicobar Project seeks to transform Great Nicobar into a strategic maritime and economic hub by leveraging its proximity (about 40 nautical miles) to the East–West shipping route and reducing… pic.twitter.com/qEI6BIRajf
— PIB India (@PIB_India) May 1, 2026
2. इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में एक मजबूत और आत्मनिर्भर खिलाड़ी बनाना है. अभी तक देश को ट्रांसशिपमेंट के लिए कोलंबो और सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं. ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला ट्रांसशिपमेंट हब इस निर्भरता को कम करेगा और भारत को क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में प्रमुख स्थान दिलाएगा. इसके साथ ही यह परियोजना व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, निर्यात क्षमता सुधारने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की आर्थिक व रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
स्रोत: ABP Hindi