व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच एनर्जी सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका ने अस्थायी रूप से भारत को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल स्वीकार करने की इजाज़त दी है. प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने यह फै़सला इसलिए लिया क्योंकि क्योंकि भारत में हमारे सहयोगियों ने ज़िम्मेदार रवैया दिखाया है और पहले भी उन्होंने प्रतिबंधित रूसी तेल ख़रीदना बंद कर दिया था. लेविट ने कहा, "अब जब हम ईरान संकट की वजह से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति में बने अस्थायी गैप को भरने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए हमने उन्हें अस्थायी तौर पर रूसी तेल को ख़रीदने की अनुमति दी है." उन्होंने यह भी कहा कि यह रूसी तेल पहले से ही समुद्र में था, यानी जहाज़ों पर लदा हुआ और रास्ते में था. इसलिए यह सिर्फ़ एक अस्थाई व्यवस्था है और हमारा मानना है कि इससे रूसी सरकार को ख़ास वित्तीय फ़ायदा नहीं होगा. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा है कि 28 फ़रवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक क़रीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक बयान में कहा कि इन घायलों में से ज़्यादातर को मामूली चोटें आई हैं और 108 सैनिक ड्यूटी पर लौट चुके हैं. उन्होंने बताया कि आठ सैनिक गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है. अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर 28 फ़रवरी को हमला किया था, जिसके बाद से मध्य पूर्व के देशों में तनाव की स्थिति है. रूस ने कहा है कि ईरान के इस्फ़हान में उसका कॉन्सुलेट हफ़्ते के आख़िर में हुए हमलों के कारण क्षतिग्रस्त हो गया. रूस के मुताबिक़ कॉन्सुलेट के पास स्थित स्थानीय गवर्नर के दफ़्तर पर हुए हमलों के कारण यह नुक़सान हुआ. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का 'साफ़ उल्लंघन' बताया, हालांकि इस हमले के लिए उन्होंने किसी ख़ास देश पर आरोप नहीं लगाया. उन्होंने कहा, "मध्य पूर्व में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा या अप्रत्यक्ष असर अब ज़्यादा देशों और उनके नागरिकों के हितों पर पड़ रहा है." ज़ाखारोवा ने यह भी कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की ख़बर नहीं है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बातचीत की है. मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत है. दोनों देशों के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है जब होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल की सप्लाई लगभग बाधित हो गई है और इससे कई देश की चिंताएं बढ़ी हैं. ईरान के अलावा एस जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री योहन वादेफु़ए और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चोह यन से भी बात की और मध्य पूर्व में तेज़ी से बदल रहे हालात पर चर्चा की. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची के साथ जारी संघर्ष से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम पर विस्तार से बातचीत हुई. हमने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई." ईरान में मोजतबा ख़ामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किए जाने के बाद दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह पहली बातचीत थी. उनके पिता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की कुछ दिन पहले अमेरिका और इसराइल के हमले में मौत हो गई थी. इमेज स्रोत, CENTCOM/Handout via REUTERS अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने होर्मुज़ स्ट्रेट के पास माइन बिछाने वाले ईरान के 16 जहाज़ों को नष्ट कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें इन जहाज़ों पर हमले होते हुए दिखाई देते हैं. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में ईरान के 10 खड़े जहाज़ों पर हमला किया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते से जहाज़ों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. यह समुद्री रास्ता दुनिया में तेल की आवाजाही के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है. सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक़, अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को आशंका थी कि ईरान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में नेवल माइंस (पानी के अंदर छिपाकर रखे जाने वाले विस्फोटक) बिछाने की तैयारी कर रहा था. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - ईरान की जंग से क्या भारत में एलपीजी संकट और गहराएगा? - होली के दिन झगड़ा, युवक की मौत और बुलडोज़र कार्रवाई: उत्तम नगर में अब कैसा है माहौल - जंग के बीच ईरान सरकार समर्थक रैलियों से क्या हासिल करना चाहता है? - अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर, गुजरात में कई फ़ैक्ट्रियों के बंद होने का ख़तरा - मोजतबा ख़ामेनेई के सामने क्या है चुनौतियां, कैसे करेंगे वो अमेरिका और इसराइल के हमले का सामना?
स्रोत: BBC Hindi