इसराइल ने शनिवार को ईरान के ख़िलाफ़ हमले शुरू किए हैं और इसे 'सतर्कता में किया गया हमला' बताया है. इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्स ने बयान जारी कर पूरे इसराइल में 'विशेष और स्थायी आपातकाल स्थिति' की घोषणा कर दी है. फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि तेहरान के डाउनटाउन में कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं. एजेंसी ने तेहरान के डाउनटाउन में हुए तीन विस्फोटों की तस्वीरें प्रकाशित की हैं. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ़) ने एक ताज़ा एक्स पोस्ट में बताया है कि देश में ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर सभी तरह की गतिविधियों पर रोक रहेगी. इसराइल ने नागरिक उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है. इस बीच ईरान ने भी अलगी सूचना तक अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है. इसराइल के ईरान पर हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव का ख़तरा फिर से बढ़ गया है. क़रीब दो महीने पहले भी दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक युद्ध चला था, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोगों की मौत हुई थी. बीबीसी ने कई स्रोतों से इसकी पड़ताल करने की कोशिश की है कि ईरान और इसराइल में से किसकी सैन्य क्षमता ज्यादा मजबूत है. हालांकि इन देशों ने अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं को गुप्त भी रखा होगा. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज ने दोनों देशों के हथियारों, मिसाइलों और हमला करने की ताकतों की तुलना की है. इसके लिए कई तरह के आधिकारिक और सार्वजनिक स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है. कुछ अन्य संगठन जैसे स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट भी देशों की सैन्य क्षमताओं का आकलन करते हैं. लेकिन जो देश अपनी सैन्य क्षमताओं के आंकड़े जाहिर नहीं करते उनका सटीक आकलन मुश्किल है. हालांकि पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के निकोलस मार्स कहते हैं कि सैन्य क्षमता के आकलन के मामले में आईआईएसएस को बेंचमार्क माना जाता है. आईआईएसएस के मुताबिक़ ईरान की तुलना में इसराइल का रक्षा बजट सात गुना बड़ा है. इससे किसी भी संभावित संघर्ष में उसका पलड़ा मजबूत दिखाई पड़ता है. आईआईएससएस के मुताबिक़ 2022 और 2023 में ईरान का रक्षा बजट 7.4 अरब डॉलर का था. जबकि इसराइल का रक्षा बजट 19 अरब डॉलर के आसपास है. जीडीपी की तुलना में इसराइल का रक्षा बजट ईरान से दोगुना है. आईआईएसएस के आंकड़ों के मुताबिक़, इसराइल के पास हमले के लिए तैयार 340 लड़ाकू विमान हैं. इससे इसराइल सटीक हमले करने में मजबूत स्थिति में है. इसराइल के पास एफ-15 विमान हैं जो लंबी दूरी तक मार कर सकते हैं. इसराइल के पास छिप कर वार करने वाले एफ-35 लड़ाकू विमान भी हैं जो रडार को चकमा दे सकते हैं. उसके पास तेज हमले करने वाले हेलीकॉप्टर भी हैं. आईआईएसएस का आकलन है कि ईरान के पास 320 लड़ाकू विमान हैं. उसके पास 1960 के दशक के लड़ाकू विमान भी हैं, जिनमें एफ-4एस, एफ-5एस और एफ-14एस जैसे विमान शामिल हैं (1986 की फिल्म टॉप गन से ये विमान मशहूर हुए थे) लेकिन पीआरआईओ के निकोलस मार्श का कहना है कि ये साफ़ नहीं है कि इन पुराने विमानों से कितने उड़ान भरने की स्थिति में हैं. क्योंकि इनके रिपेयरिंग पार्ट्स मंगाना बहुत मुश्किल होगा. इसराइल की सेना की रीढ़ की हड्डी है इसका आयरन डोम (लोहे का गुंबद) और ऐरो सिस्टम. मिसाइल इंजीनियर उज़ी रहमान देश के रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले इसराइल मिसाइल डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन के संस्थापक हैं. अब यरूशलम इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजी एंड सिक्योरिटी में सीनियर रिसर्चर रहमान ने बीबीसी को बताया कि पिछले शनिवार को जब आयरन डोम और इसराइल के सहयोगी देशों ने मिल कर ईरान की ओर से दागी गईं मिसाइलों और ड्रोन को नाकाम कर दिया था तो उन्होंने कितना सुरक्षित महसूस किया था. उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश और संतुष्ट था. लक्ष्य को भेदने में ये काफी सटीक है. इसमें छोटी दूरी का मिसाइल डिफेंस है. ऐसे किसी दूसरे सिस्टम में ये नहीं है." इमेज स्रोत, Amir Cohen / Reuters इसराइल ईरान से 2100 किलोमीटर की दूरी पर है. डिफेंस आई के संपादक टिम रिप्ले ने बीबीसी को बताया कि अगर इसराइल को ईरान पर हमला करना होगा तो उसे मिसाइलों का सहारा लेना होगा. ईरान का मिसाइल प्रोग्राम मध्य पूर्व का सबसे बड़ा और सबसे अधिक विविधता वाली मिसाइल परियोजना माना जाता है. अमेरिकी सेंट्रल कमान के जनरल केनेथ मैकेंजी ने 2022 में कहा था कि ईरान के पास 3000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. सीएसआईएस मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट के मुताबिक़, इसराइल कई देशों को मिसाइलें निर्यात भी करता है. ईरान ने अपने मिसाइल सिस्टम और ड्रोन पर काफी काम किया है. खास कर 1980 से 1988 में पड़ोसी देश इराक़ के साथ युद्ध के दौरान उसने इस पर काम शुरू किया था. इसने छोटी रेंज की मिसाइलें और ड्रोन विकसित किए हैं. इसराइल पर हाल के हमलों में ऐसी ही मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था. सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई मिसाइलों का अध्ययन करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि ये ईरान में ही बने थे. इमेज स्रोत, IRGC handout / Reuters आईआईएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरानी नौसेना का आधुनिकीकरण नहीं हुआ है हालांकि उसके पास 220 जहाज हैं, वहीं इसराइल के पास इनकी संख्या 60 है. अगर साइबर हमले हुए तो ईरान को ज्यादा नुक़सान उठाना पड़ सकता है क्यों उसका डिफेंस सिस्टम टेक्नोलॉजी के लिहाज से ज्यादा विकसित नहीं है. इसलिए इसराइल की सेना पर साइबर अटैक हुआ तो ईरान को ज्यादा बढ़त मिल सकती है. इसराइली सरकार के राष्ट्रीय साइबर निदेशालय का कहना है कि पहले की तुलना में साइबर हमले की तीव्रता ज्यादा हो सकती है. ये तीन गुना तेज़ हो सकता है और हर इसराइली सेक्टर पर हमला हो सकता है. क्योंकि युद्ध के दौरान ईरान और हिज़्बुल्लाह में सहयोग और मजबूत हो गया है. इसकी रिपोर्ट के मुताबिक़, सात अक्टूबर से लेकर 2023 के आख़िर तक 3380 साइबर अटैक हुए हैं. ईरान के सिविल डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन के ब्रिगेडियर जनरल गुलामरज़ा जलाली ने कहा कि ईरान ने हाल के संसदीय चुनाव से पहले 200 साइबर अटैक नाकाम किए हैं. दिसंबर में ईरान के पेट्रोल मंत्री जवाद ओजी ने कहा था कि साइबर अटैक की वजह से पूरे देश में पेट्रोल स्टेशनों में दिक्कतें आई थीं. इमेज स्रोत, Iranian government / Getty Images माना जाता है कि इसराइल के पास परमाणु हथियार हैं लेकिन वो इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी देने से बचता है. ईरान के पास परमाणु हथियार होने की संभावना कम है. उस पर ऐसे हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोप हैं. क्षेत्रफल के लिहाज से ईरान इसराइल की तुलना में कहीं बड़ा देश हैं. ईरान की आबादी 89 मिलियन है जो इसराइल की आबादी (10 मिलियन) से लगभग दस गुनी अधिक है. इसराइली सैनिकों की तुलना में ईरानी सैनिकों की संख्या भी छह गुनी अधिक है. आईआईएसएस के मुताबिक़, ईरान की सेना में छह लाख सक्रिय सैनिक हैं तो इसराइल के पास एक लाख 70 हज़ार सक्रिय सैनिक. अमन ख्वाज़ा, कार्ला रोश, रेजा सबेती और क्रिस प्रेट्रिज की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
स्रोत: BBC Hindi