कोलकाता में सरस्वती पूजा से ठीक दो दिन पहले एक बहुत खूबसूरत संगीत कार्यक्रम लक्ष्मीनारायण ग्लोबल म्यूजिक फेस्टिवल हुआ. यह कार्यक्रम उत्तर कोलकाता के ताला प्रत्याय में हुआ, जहां पार्क में ही मंच सजाया गया था. इसलिए इसे 'म्यूजिक इन ए पार्क' कहा गया. देवी सरस्वती की मूर्ति के सामने पूरा कार्यक्रम चला और आसपास चांदनी रात में एक छोटा-सा मेला भी लगा था.
कविता कृष्णमूर्ति ने संगीत से समां बांधा
इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े कलाकारों ने शिरकत की. प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. एल. सुब्रमण्यम ने अपनी पुरानी रचना 'शांतिप्रिया' बजाई, जो उन्होंने 1980 के दशक में बनाई थी. इस बार कजाकिस्तान का गक्कू बैले ग्रुप ने इसके साथ डांस परफॉर्मेंस भी दी. साथ ही उनकी 'नवग्रह सिम्फनी' भी सुनाई गई, जिसमें कजाकिस्तान का कोरस गाया. भारतीय गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने भी संगीत से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. तबला पर तन्मय बोस, मृदंगम पर वी.वी. रामनमूर्ति और कंजीरा पर स्वामीनाथन सेल्वगणेश ने साथ दिया.
अलग भाषाई लोगों को संगीत ने एक किया
खास बात यह थी कि कजाकिस्तान से अस्ताना फिलहार्मोनिक सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा और उनका चैंबर कोर पहली बार इतने बड़े स्तर पर कोलकाता आया था. भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत और कजाकिस्तान के संगीत-नृत्य का ऐसा सुंदर मेल पहली बार देखने को मिला. भाषा अलग थी, देश अलग थे, लेकिन संगीत ने सबको एक कर दिया. दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं और बहुत आनंद उठाया.
कोलकाता के मेयर फरहाद हाकिम और बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती भी वहां मौजूद थे. कविता कृष्णमूर्ति ने कहा कि कोलकाता संगीत और संस्कृति का शहर है. यहां परफॉर्म करना हमेशा अच्छा लगता है और सरस्वती मां के सामने गाना तो और भी खास था. डॉ. एल. सुब्रमण्यम ने बताया कि कोलकाता के लोग क्लासिकल और ऑर्केस्ट्रा संगीत दोनों को बहुत समझते हैं. सरस्वती मां की मूर्ति पीछे होने से लगा जैसे वो आशीर्वाद दे रही हैं.
यह फेस्टिवल का चौथा संस्करण
इस कार्यक्रम के आयोजक ध्रुवज्योति बसु ने कहा कि यह फेस्टिवल का चौथा साल है. हर साल सरस्वती पूजा से पहले ऐसा कार्यक्रम करते हैं ताकि बंगाली संस्कृति को नया रूप मिले और कोलकाता को कुछ नया और अलग देने का मौका मिले. पूरा माहौल ऐसा था जैसे संस्कृति का बड़ा मेला लग गया हो. संगीत ने बिना किसी भाषा के सबके दिल को छू लिया और यह शाम सबके लिए यादगार बन गई.
स्रोत: ABP Hindi