लद्दाख में महिलाओं ने शराब के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया है और लेह की सड़कों पर उतर आई हैं. हिमालयी क्षेत्र में हो रहे इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग पूरी तरह एकजुट हैं. महिलाएं यहां 24 घंटे बारी-बारी से धरने पर बैठ रही हैं, और उनका कहना है कि वे तब तक नहीं हटेंगी जब तक कि शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लग जाता.
यह विरोध लद्दाख प्रशासन की उस नई उदार आबकारी नीति के कारण शुरू हुआ है, जिसमें इस पहाड़ी क्षेत्र में शराब की खुदरा दुकानों की संख्या 2 से बढ़ाकर 20 करने की मंजूरी दी गई है.
शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग
नई आबकारी नीति (Excise Policy) के तहत नई शराब की दुकानें खोलने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब इस मांग तक पहुंच गया है कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए.
लेह में रात के समय कड़ाके की ठंड के बावजूद, बौद्ध, मुस्लिम (अंजुमन इमामिया और अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम दोनों) और ईसाई समुदायों की महिलाएं एक साथ मिलकर विरोध कर रही हैं. लेह के एनडीएस पार्क (NDS Park) में महिलाएं बारी-बारी से धरने पर बैठ रही हैं, ताकि वहां 24 घंटे उनकी मौजूदगी बनी रहे.
प्रदर्शनकारियों-स्थानीय लोगों का क्या आरोप?
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नेताओं का आरोप है कि प्रशासन स्थानीय परंपराओं और भावनाओं की अनदेखी करते हुए, गांवों, होमस्टे, गेस्ट हाउस, स्कूलों और धार्मिक स्थलों के बहुत करीब जबरन शराब के लाइसेंस दे रहा है और बार खुलवा रहा है.
लद्दाख बौद्ध संघ (LBA), अंजुमन इमामिया, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम और ईसाई समुदाय सहित कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं. आज के प्रदर्शन में कई पुरुष भी इस मांग के समर्थन में शामिल हुए.
लद्दाख बौद्ध संघ (LBA) की महिला शाखा के नेतृत्व में, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शराब के बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण से यहां के सांस्कृतिक ताने-बाने, जनस्वास्थ्य और परिवारों की सुरक्षा को खतरा है. इससे घरेलू हिंसा और युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन का खतरा बढ़ सकता है.
सभा को संबोधित करते हुए, विभिन्न महिला संगठनों के प्रतिनिधियों, LBA के अध्यक्ष और अन्य वक्ताओं ने लद्दाख में शराब की बिक्री और अन्य नशीले पदार्थों की बढ़ती उपलब्धता पर गहरी चिंता जताई.
उन्होंने सरकार से मांग की कि इस क्षेत्र में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और लद्दाख को शराब मुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं. प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन लद्दाख के लोगों से उचित सलाह लिए बिना या उनकी सहमति प्राप्त किए बिना नए नियम लागू कर रहा है, जिससे जनभावनाओं और स्थानीय परंपराओं की अनदेखी हो रही है.
उन्होंने नई आबकारी नीति की समीक्षा करने की मांग की, जिसमें क्षेत्र के धार्मिक मूल्यों, सामाजिक प्राथमिकताओं और लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए. साथ ही, उन्होंने शराब की दुकानें खोलने के फैसले को वापस लेने की भी मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद' (LAHDC) अधिनियम में किए गए संशोधनों और क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख राजनीतिक व प्रशासनिक मुद्दों पर भी चिंता जताई. उन्होंने जोर देकर कहा कि लद्दाख के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर स्थानीय लोगों और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों को विश्वास में लिया जाना चाहिए.
लद्दाख में महिलाएं नई आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानें खोले जाने के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. विभिन्न महिला संगठनों ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है और सरकार से नीति में संशोधन करने, शराब की बिक्री रोकने तथा लद्दाख को 'शराब मुक्त क्षेत्र' घोषित करने की अपील की है.
इस विरोध प्रदर्शन को कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमें 'लद्दाख बौद्ध संघ' (Ladakh Buddhist Association), 'एपेक्स बॉडी लेह' (Apex Body Leh) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस' (KDA) शामिल हैं.
धरने के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग दोहराई. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले और आबकारी नीति पर पुनर्विचार करे.
वांगचुक ने उठाए सवाल
जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और उन पर "शराब की बौछार करने" (firing alcohol cannons) का आरोप लगाया. वांगचुक ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शराब के व्यावसायीकरण को इतनी आक्रामकता से क्यों बढ़ावा दे रही है, जबकि गुजरात जैसे राज्यों में शराब पर सख्त प्रतिबंध लागू हैं.
प्रशासन ने क्या आश्वासन दिया?
हालांकि मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और आबकारी आयुक्त रोमिल सिंह डोंक ने महिला प्रतिनिधियों की मांगें सुनने के लिए एक प्रारंभिक बैठक बुलाई थी, लेकिन प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर यह आश्वासन दिया है कि अक्टूबर के अंत में व्यापक विचार-विमर्श और एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी. इसका उद्देश्य आबकारी नीति को वापस लेने के संबंध में आम सहमति बनाने का प्रयास करना है.
स्रोत: ABP Hindi