इमेज स्रोत, Kevin Dietsch/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के काफ़ी क़रीब हैं. ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “भारत समझौता करना चाहता है. हम भी समझौता करेंगे. हम इसके काफ़ी क़रीब हैं.” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच होने वाला समझौता पहले किए गए समझौतों से बिल्कुल अलग तरह का होगा. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर थे. इस महीने की शुरुआत में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर के साथ बैठक की थी. इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई. गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फ़रवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी. हालांकि, इसके बाद अमेरिका की टैरिफ़ नीतियों में बदलाव देखने को मिले हैं. इमेज स्रोत, OLI SCARFF/AFP via Getty Images ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव ने बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और भारतीय नागरिकों को ब्रिटेन में सरकारी लाभ दिए जाने का विरोध किया. रूपर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटोफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “हमारे देश में किसी भी बांग्लादेशी, पाकिस्तानी या भारतीय नागरिक को सरकारी लाभ का दावा नहीं करना चाहिए. एक पैसा भी नहीं.” इससे पहले मई में भी लोवे ने भारत और पाकिस्तान से लोगों को ब्रिटेन लाकर रोज़गार देने की नीति पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि वह ऐसे लाखों पाकिस्तानियों और भारतीयों को ब्रिटेन लाने के पक्ष में नहीं हैं, जो उन नौकरियों में काम करें जिन्हें बेरोज़गार ब्रिटिश नागरिक कर सकते हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा था, “अगर इससे मैं नस्लवादी कहलाता हूं, तो ऐसा ही सही.” गौरतलब है कि रूपर्ट लोव वर्तमान में ग्रेट यारमाउथ से सांसद हैं और दक्षिणपंथी राजनीतिक दल 'रीस्टोर ब्रिटेन' के नेता हैं. इमेज स्रोत, Joe Raedle/Getty Images अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए अभी उनके उत्तराधिकारी की चर्चा करना जल्दबाज़ी होगी. दरअसल, ओवल ऑफ़िस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड से पूछा गया था कि क्या वह उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरने पर उनका समर्थन करेंगे. दिलचस्प बात ये है कि जब ट्रंप से यह सवाल पूछा गया, तब वेंस उनके ठीक पीछे खड़े थे. ट्रंप ने वेंस की तारीफ़ करते हुए उन्हें 'बेहद प्रतिभाशाली' और 'बहुत अच्छा व्यक्ति' बताया. हालांकि, उन्होंने कहा कि फ़िलहाल भविष्य की राजनीति पर चर्चा करने का सही समय नहीं है. ट्रंप ने कहा, "अभी बहुत जल्दी है. हमें पहले मिडटर्म चुनाव से गुज़रना होगा. इसके बाद देखेंगे कि परिस्थितियां कैसी रहती हैं." गौरतलब है कि जेडी वेंस ने पत्रकार मार्क हैल्परिन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अभी तक राष्ट्रपति चुनाव लड़ने को लेकर कोई फ़ैसला नहीं किया है. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर वह चुनाव लड़ने का फ़ैसला लेते हैं, तो ट्रंप उनका समर्थन करेंगे. इमेज स्रोत, Iranian Presidency / Handout/Anadolu via Getty Images ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बीच मंगलवार को मुलाक़ात हुई. दोनों के बीच हुई इस मुलाक़ात को लेकर ईरान सरकार ने बयान जारी किया है और कहा है कि अमेरिका को दबाव बनाने की नीति बंद करनी होगी. ईरान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "राष्ट्रपति डॉ. पेज़ेश्कियान ने पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट में रुकावटों समेत क्षेत्र में तनाव के पीछे अमेरिका की युद्ध भड़काने वाली नीतियां हैं." बयान में बताया गया, "पेज़ेश्कियान ने कहा कि किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को दबाव बनाने, धमकियां देने और प्रतिबंध लगाने की नीति छोड़नी होगी." अमेरिका से युद्धविराम के बाद आसिम मुनीर चौथी दफ़ा ईरान की आधिकारिक यात्रा पर हैं. इससे पहले दो सितंबर को ईरान दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेज़ाई, संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और गृह मंत्री सिकंदर मोमेनी से मुलाक़ात की थी. इस बीच ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया है कि पाकिस्तान विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयास जारी रखेगा. इमेज स्रोत, Ritesh Shukla/Getty Images भारत में हाल के महीनों में हुए प्रदर्शनों पर पुलिस की सख़्त कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने, उसकी रक्षा करने और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में न्याय करने की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारियों को शांतिपूर्ण सभा पर अनुचित प्रतिबंध लगाने, अत्यधिक बल प्रयोग करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और स्टूडेंट्स को निशाना बनाने जैसे मामलों को लेकर पहले भी आगाह किया जा चुका है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, "ख़बरों के मुताबिक़, मार्च में सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने नई दिल्ली में स्टूडेंट राइट्स और मज़दूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था. उन्हें 24 घंटे से ज़्यादा समय तक किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया. आरोप है कि इस दौरान उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया, उन्हें धमकाया गया, दबाव डाला गया और जबरन बयान दिलवाए गए. बाद में अदालत ने उन्हें रिहा किया." संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा, “ये कदम भारत के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ज़रूरी बुनियादी दायित्वों का उल्लंघन करते हैं. इनमें शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी, अपनी बात कहने की आज़ादी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार शामिल हैं.” संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई भी रोक क़ानून के तहत होनी चाहिए, उसका कोई सही उद्देश्य होना चाहिए और साथ ही उचित सीमा में भी होनी चाहिए. “सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. स्टूडेंट्स व दूसरे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की जाए, ताकि वे एक जगह इकट्ठा होकर अपनी शिकायतें और नाराज़गी जाहिर कर सकें.” संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने मांग की है कि क़ानूनी एजेंसियों और उनसे जुड़ी दूसरी ताक़तों के कामकाज की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी जांच बिना किसी देरी के शुरू की जाए. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो, पीड़ितों को न्याय मिले और उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जाए. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. - काव्या मारन और संगीतकार अनिरुद्ध की शादी से रिश्तेदार बनेंगे रजनीकांत और स्टालिन - टाइगर श्रॉफ़ पर हमला: क्या बॉलीवुड में दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं गैंगस्टर? - अहमदाबाद में पुरुष महिलाओं के वेश में गरबा क्यों करते हैं, रोचक है इसके पीछे की कहानी - मोहन भागवत ने 'सत्ता परिवर्तन' पर जो कहा उस पर मचा राजनीतिक घमासान, पक्ष-विपक्ष में बंटे नेता
स्रोत: BBC Hindi