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सीजेपी के प्रदर्शन पर क्या कह रहा है विदेशी मीडिया

इमेज स्रोत, Yousuf Sarfaraz/SOPA Images/LightRocket via Getty Images मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई पुलिस की कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताई है. कई देशों के मीडिया ने इस प्रदर्शन से जुड़ी ख़बरों को प्रमुखता से जगह दी है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (यूनएचआर) का कहना है कि वह दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरों से चिंतित है. साथ ही यूनएचआर ने अधिकारियों से मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने की मांग की थी. उसका कहना है, "हम अधिकारियों से आह्वान करते हैं कि वे शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार को पूरे सम्मान के साथ सुनिश्चित करें और इसे प्रभावी रूप से लागू करें." हालाँकि जिनेवा में भारतीय मिशन ने यूएन मानवाधिकार आयोग की तरफ़ से जारी बयान का जवाब देते हुए कहा कि यह चिंताएं बेबुनियाद हैं. जिनेवा में भारतीय मिशन ने आधिकारिक बयान में कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांति से इकट्ठा होने का अधिकार हमारे संविधान से मिलता है और मज़बूत संस्थाओं, एक स्वतंत्र न्यायपालिका और एक स्वतंत्र मीडिया से सुरक्षित है." भारतीय मिशन ने कहा, "हर लोकतंत्र की तरह, भारतीय नागरिक पब्लिक ऑर्डर के हित में उचित पाबंदियों के तहत इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं. अधिकारी क़ानून के अनुसार काम करते हैं और हमारी अदालतें किसी भी शिकायत के समाधान के लिए सभी के लिए उपलब्ध रहती हैं." बयान में कहा गया, "इसलिए मानवाधिकार आयोग की चिंताएं ग़लत हैं और भारत के अंदरूनी मामलों में बेवजह दख़ल देती हैं. इस संदर्भ में, मानवाधिकार आयोग को अपने निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के काम करने के अपने अधिकार के अनुसार, दूसरी जगहों पर भी बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर उतना ही ध्यान देना चाहिए." दिल्ली में शनिवार को हुए प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को दुनियाभर के प्रमुख अख़बरों ने जगह दी है. इसमें भारत में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर भी टिप्पणी की गई है. इमेज स्रोत, Ajay Aggarwal/Hindustan Times via Getty Images पाकिस्तान के अख़बार 'डॉन' ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से दिल्ली के प्रदर्शन पर लिखा, "शनिवार को दिल्ली में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग को लेकर आयोजित रैली को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने राजधानी के कुछ हिस्सों में नाकेबंदी कर दी." "शहर भर में हज़ारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया. सेंट्रल दिल्ली के व्यावसायिक क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गईं और अधिकारियों ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' की ओर से आयोजित प्रदर्शन को रोकने के लिए दर्जनों मेट्रो स्टेशन और बाज़ार बंद कर दिए." ख़बर में लिखा गया है, "लगभग दो करोड़ की आबादी वाली राजधानी में सुरक्षा बलों ने प्रमुख सड़कों और शहर के प्रवेश मार्गों पर जाँच चौकियाँ स्थापित कीं. पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों की तलाश में बसों की तलाशी ली और वाहनों की जाँच की. बैरिकेड और कंक्रीट के बैरिकेड के कारण ट्रैफ़िक बाधित हुआ." इमेज स्रोत, Yawar Nazir/Getty Images अख़बार लिखता है, "दिल्ली के कई हिस्सों में भी छोटे-छोटे प्रदर्शन हुए और एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, कुछ युवा प्रदर्शनकारी 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. पुलिस उनका पीछा कर रही थी और कई अन्य लोगों को घसीटकर बसों में भरकर ले जा रही थी, जबकि लगातार और लोग वहाँ पहुँच रहे थे." डॉन ने लिखा है कि आंदोलन ने अपने नेताओं की हिरासत को "सत्तावादी तरीके से की गई हिरासत" बताते हुए इसकी निंदा की, साथ ही उनकी रिहाई की मांग की और विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. वहीं साउथ चाइना पोस्ट ने शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों पर लिखा, "यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ आयोजित किया गया, जिसमें मतदाता सूचियों में संशोधन को लेकर आलोचकों का आरोप है कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को असमान रूप से फ़ायदा होता है." साउथ चाइना पोस्ट के मुताबिक़ दो डिजिटल समाचार संस्थानों के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते समय पुलिस ने उनके चार पत्रकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में रखा, जबकि रॉयटर्स के एक पत्रकार को भी थोड़ी देर के लिए हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया. साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा है कि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कुछ वकीलों को भी हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया. अख़बार लिखता है, "इन प्रदर्शनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तक की गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है. इसकी पृष्ठभूमि में आरोप हैं कि हाल के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव अधिकारियों ने मतदाता सूचियों में अनुचित तरीके से संशोधन किया." इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images अंग्रेज़ी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, "शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी एक क़िले में तब्दील हो गई. भारतीय अधिकारियों ने असाधारण स्तर पर ताक़त का इस्तेमाल किया, तो देश के युवाओं ने भी उतने ही असाधारण तरीके से इसका विरोध किया." अख़बार के मुताबिक़, "दिनभर हज़ारों लोगों ने, जिनमें ज़्यादातर 20 से 30 साल के युवा थे, अपनी मतदाता सूची में व्यापक संशोधन के विरोध में दिल्ली में इकट्ठा होने की कोशिश की. सुरक्षा बलों ने उन्हें पकड़कर वहां से हटाया. कई प्रदर्शनकारियों को उनके हाथों और पैरों से पकड़कर खींचा गया और ज़्यादातर मामलों में बलपूर्वक बसों और वैन में ठूँस दिया गया." न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़, हिरासत में लिए गए लोगों ने पुलिस वैन के दरवाजे पीटे. वे बसों की खिड़कियों से चिल्ला रहे थे. एक पुलिस अधिकारी को एक प्रदर्शनकारी का गला पकड़ते हुए भी देखा गया. हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने वाले वकीलों के एक समूह के अनुसार, शनिवार की शाम तक दो हज़ार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था, हालाँकि उनकी सटीक संख्या का पता लगाना संभव नहीं था. "प्रदर्शन का आह्वान करने वाले जेन ज़ी के संगठन कॉकरोच जनता पार्टी, के नेताओं ने कहा कि उन्हें भी हिरासत में लिया गया है, इनमें कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल थे, जिन्होंने प्रदर्शन की अपील की थी." इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images वहीं एक अन्य अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा, "भारत के अधिकारियों ने शनिवार को नई दिल्ली में व्यापक सुरक्षा कार्रवाई की और हज़ारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इस दौरान भारत के युवा 'कॉकरोच' आंदोलन ने विवादास्पद मतदाता सूची संशोधन के ख़िलाफ़ देशव्यापी अभियान तेज करने की कोशिश की. इस संशोधन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार और चुनाव अधिकारियों के प्रति नाराजगी बढ़ी है." "भारत की राजधानी के केंद्र में स्थित निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर जा रहे प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही रोक दिया गया. कुछ लोगों को खदेड़ दिया गया, जबकि कई अन्य को हिरासत में ले लिया गया. कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटकर पुलिस वाहनों में ठूँस दिया गया और अस्थायी डिटेंशन सेंटर्स में ले जाया गया." अख़बार लिखता है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी (बीजेपी) के नेता संबित पात्रा ने प्रदर्शनकारियों को "अराजक तत्व" बताते हुए उनकी आलोचना की. और कहा कि ''उनका फ्लॉप शो पूरी तरह ध्वस्त' कर दिया गया है." अख़बार के मुताबिक़ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस की घेराबंदी तोड़ने में सफल रहे. उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव अधिकारियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, "इन प्रदर्शनों का केंद्र भारत के निर्वाचन आयोग की ओर से संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो गए हैं." प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. अब तक मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि निर्वाचन आयोग और सरकार ने मतदाताओं के साथ हेरफेर किए जाने के आरोपों को खारिज किया है. इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images फ्रांस 24 ने दिल्ली के प्रदर्शनों पर लिखा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पिछले कुछ हफ़्तों में तेज हो गई है. विपक्षी दलों और आलोचकों का कहना है कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में किए जा रहे संशोधन से लाखों मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्तारूढ़ हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए फ़ायदे वाला है. हालांकि निर्वाचन आयोग ने अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस संशोधन का मक़सद मतदाता सूची से दोहराए गए नामों और अपात्र मतदाताओं को हटाना है. फ़्रांस 24 ने लिखा, "प्रदर्शन से पहले राजधानी में अधिकारियों ने हज़ारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया, दर्जनों मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए, 200 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दीं और प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ अस्थायी रूप से बंद कर दीं. फ़्रांस 24 के मुताबिक़ इन प्रदर्शनों को व्यापक रूप से जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' की ओर से किए गए बड़े जन-आंदोलन के दोहराव के रूप में देखा जा रहा है, उस समय परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. फ़्रांस 24 ने लिखा, "ये आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनके तीसरे कार्यकाल के दौरान एक नई चुनौती हैं. मोदी की उम्र 76 साल है. विपक्षी दल लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि भारत में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं. भारत 1.4 अरब लोगों की आबादी वाला दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है." फ़्रांस 24 के मुताबिक़, "एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 'लॉकडाउन जैसी पाबंदियों' की निंदा की. वहीं, प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने युवाओं से रैलियाँ जारी रखने का आह्वान किया." "संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार दफ़्तर ने भारत से उन लोगों को रिहा करने का आग्रह किया जिन्हें प्रदर्शन के दौरान 'मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया' था. उसने बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की ख़बरों पर चिंता भी जताई." फ्रांस 24 ने लिखा है कि भारतीय मीडिया की ख़बरों के अनुसार साल 2025 में शुरू गई एसआईआर की वजह से मतदाता सूचियों से 13.3 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस अभियान का असर हाशिए पर रहने वाले समुदायों और अल्पसंख्यकों पर असमान रूप से पड़ा है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi