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पैरासिटामोल की ओवरडोज़ कितनी ख़तरनाक? लगातार इतने दिनों तक न लेने की सलाह

एक छात्र के माता-पिता ने उस दर्दनाक अनुभव के बारे में बताया है, जब छात्र ने ग़लती से पैरासिटामोल की ओवरडोज़ ले ली, जिससे उनकी जान पर बन आई थी. उस छात्र के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और उसे वेंटिलेटर पर तक रखना पड़ा. यह घटना मार्च 2025 की है जब 20 साल के राइली लुबास यूनिवर्सिटी के पहले साल के छात्र थे. इस दौरान एक बार उन्हें बुरी तरह सर्दी-जुकाम हो गया. उन्होंने डॉक्टर के पर्चे के बिना मिलने वाली ऐसी दो दवाएं ले लीं, जिन दोनों में ही पैरासिटामोल मौजूद था. इसके बाद उन्हें लाइफ़ सपोर्ट पर रखना पड़ा और वह कई हफ़्ते अस्पताल में एडमिट रहे. हालांकि बाद में चमत्कारिक रूप से उनकी हालत सुधरी और वे दोबारा चलने और बोलने लगे. रॉयल कॉलेज ऑफ़ जनरल प्रैक्टिशनर्स किमरू वेल्स ने लोगों को सलाह दी है कि वे दवा लेते समय हमेशा लेबल को ध्यान से पढ़ें. साथ ही कोई भी दवा लेने से पहले जनरल प्रैक्टिशनर से सलाह लें. राइली इस विश्वविद्यालय में अच्छा समय बिता रहे थे, तभी वसंत के मौसम में वे सर्दी की जद में आ गए जिसे वे खुद भी कोई बड़ी बात या असामान्य घटना नहीं मानते. उन्होंने कहा, "पहले साल में कई स्टूडेंट्स को अक्सर फ़्रेशर्स फ़्लू या सर्दी-जुकाम हो जाता है. इसलिए मैंने दो दवाएं ले ली थीं." "मुझे उस समय यह पता नहीं था कि दोनों दवाओं में पैरासिटामोल मौजूद है." एनएचएस के अनुसार, पैरासिटामोल की ज़्यादा ख़ुराक लेने से लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. इसके शुरुआती लक्षणों में अक्सर जी मिचलाना, उल्टी होना और पेट दर्द शामिल होते हैं. जब राइली के पेट में दर्द शुरू हुआ, तो उसने मदद के लिए फ़ोन करने का फ़ैसला किया. इंग्लैंड के बाथ शहर के रॉयल यूनाइटेड अस्पताल में उनकी जांच हुई जिसमें पता लगा कि उसका लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा था. अपने बेटे की तबीयत की जानकारी मिलते ही राइली के माता-पिता क्रिस और केट लुबास जैसे तैसे बेटे के पास जा पहुंचे. वे दक्षिण पूर्व वेल्स के न्यूपोर्ट शहर में रहते हैं. एक कंपनी में निदेशक के पद पर काम कर रहे क्रिस ने अपने बेटे के बारे में बताया कि शुरुआत में डॉक्टरों को हेपेटाइटिस को लेकर आशंका थी. उन्होंने कहा, "कुछ घंटों बाद रात करीब डेढ़ बजे मुझे अस्पताल के आईसीयू स्टाफ़ का फ़ोन आया. उन्होंने कहा कि हमें तुरंत वहां पहुंचना होगा." वे बोले, "उस समय वे बस इतना ही बता सके कि वे उसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं." देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. राइली के माता-पिता को बताया गया कि उसका लीवर फ़ेल होने की स्थिति की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे की हालत लगातार बिगड़ते हुए देखी. उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वह भ्रम की स्थिति में रहने लगे और उन्हें ऐसी चीज़ें दिखाई देने लगी थीं जो वास्तव में मौजूद नहीं थीं. पिता क्रिस ने कहा, "उसी दिन, शाम 6 बजे तक उसे बेहोशी की दवा देकर रखा गया था. उसे लाइफ़ सपोर्ट और डायलिसिस पर रखा गया था. उसके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था." उन्होंने कहा, "तब अस्पताल के स्टाफ़ ने हमें पहली बार विस्तार से बताया कि उसकी हालत कितनी गंभीर हो चुकी थी." राइली के दिमाग़ के आसपास मौजूद द्रव की स्थिति को लेकर अस्पताल का स्टाफ़ चिंतित था. उसके फेफड़ों और किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था. क्रिस ने कहा, "हम बहुत परेशान थे. हमें समझ नहीं आ रहा था कि यह सब इतनी जल्दी कैसे हो गया." तब तक राइली की हालत इतनी ख़राब हो चुकी थी कि उन्हें लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया. वहां गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों के लिए विशेष आईसीयू यूनिट मौजूद है. डॉक्टरों ने उसके माता-पिता से पूछा कि उसने पैरासिटामोल कितनी मात्रा में ली थी? इसके बाद वे उन दोनों दवाओं को ढूंढ़ पाए जो राइली ने ली थीं. तभी उन्हें समझ आया कि उसके साथ क्या हुआ था. क्रिस बोले, "इससे इलाज का कोई सीधा हल तो नहीं मिला. लेकिन कम से कम हमें इसकी वजह का पता चल गया." अब राइली पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और एक पब में बारटेंडर के तौर पर काम करते हैं. अपने बेटे के साथ हुई इस दुर्घटना के बाद राइली के माता-पिता ने पैरासिटामोल ओवरडोज़ के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक पैदल मार्च निकाला. गोवर प्रायद्वीप में 50 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा से किंग्स कॉलेज अस्पताल के आईसीयू के लिए भी धन जुटाया गया. राइली ने कहा, "यह हैरान करने वाली बात है कि हालात इतनी जल्दी बिगड़ गए." उन्होंने कहा, "मैं पहले से ही बीमार था. इसलिए जब मेरे पेट में दर्द हुआ, तो मुझे लगा कि शायद पेट का कोई इन्फ़ेक्शन हो गया है." "मुझे यह एहसास नहीं हुआ कि यह दर्द असल में मेरे लीवर से जुड़ा हुआ था." उन्होंने कहा, "मैं बस इस बात के लिए बहुत आभारी हूं कि आख़िरकार मैं ठीक होकर वापस लौट पाया." ऑफिस फ़ॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में वेल्स में 27 ऐसी मौतें दर्ज की गईं जिनके मृत्यु प्रमाणपत्र में पैरासिटामोल का उल्लेख था. रॉयल कॉलेज ऑफ़ जनरल प्रैक्टिशनर्स या आरसीजीपी जनरल प्रैक्टिशनरों से जुड़ा एक संगठन है. आरसीजीपी किमरू वेल्स के अध्यक्ष और खुद एक जनरल प्रैक्टिशनर डॉ. विल मैकिन्टॉश का कहना है कि युवाओं में गलती से पैरासिटामोल की ज़्यादा ख़ुराक लेना अपेक्षाकृत एक दुर्लभ घटना है. हालांकि उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अनजाने में एक साथ ऐसी दो दवाएं ले ले जिनमें पैरासिटामोल हो, तो थोड़ा जोखिम पैदा हो सकता है. मैकिन्टॉश ने कहा कि काम और पढ़ाई का दबाव युवाओं को ख़ासतौर पर ऐसी दवाएं लेने के लिए प्रेरित करता है जो बिना डॉक्टर की पर्ची के ख़रीदी जा सकती हैं. उन्होंने कहा, "ख़ासकर वायरल बीमारियों में, भले ही वे गंभीर न हों, लेकिन पर्याप्त आराम करना भी बहुत ज़रूरी है." मैकिन्टॉश ने कहा कि कई बार जल्दी ठीक होने की चाह में आराम की अहमियत को कम करके आंका जाता है. उन्होंने कहा, "ऐसी कई बीमारियों में शरीर को आराम देने और बीमारी को अपना समय पूरा करने देने की ज़रूरत होती है. इसके साथ ही बिना डॉक्टर की पर्ची वाली दवाएं ली जा सकती हैं." उन्होंने कहा कि स्थानीय सामुदायिक फ़ार्मेसियां बड़ी मात्रा में दवाएं बेचने को लेकर बहुत सावधानी बरतती हैं. उन्होंने कहा कि इसी वजह से अक्सर पैरासिटामोल की बिक्री पर अपर लिमिट लगाई जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि जनरल प्रैक्टिशनर अब उन जोखिमों के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं जो पैरासिटामोल की ज़्यादा ख़ुराक से बुज़ुर्ग मरीज़ों को हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि कम वज़न वाले बुज़ुर्ग मरीज़ों में यह जोखिम विशेष रूप से अधिक हो सकता है. उन्होंने कहा, "जब ऐसे मामले होते हैं, तो इनके लक्षण बहुत गंभीर हो सकते हैं और जोखिम भी काफ़ी ज़्यादा होता है." उन्होंने कहा, "इसलिए हम चाहते हैं कि ऐसे मामलों की संख्या जितनी कम हो सके उतनी कम रहे." उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे दवाओं का लेबल ध्यान से पढ़ें. ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के अनुसार- हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi