मेडिकल कालेज में स्ट्रेचर को जलभराव में खींचने को मजबूर तीमारदार
गोण्डा। गोण्डा मेडिकल कॉलेज में जलभराव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ये तस्वीरें जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। परिसर में घुटनों तक भरे बारिश के पानी में तीमारदार मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर वार्ड तक ले जाते दिख रहे हैं। साथ में महिलाएं-बच्चे भी पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय गोण्डा की ये हालत नई नहीं है। हर साल बरसात में पूरा परिसर तालाब बन जाता है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक पहुंचना मरीजों के लिए जंग लड़ने जैसा है। न ड्रेनेज सिस्टम सुधरा, न पानी निकासी का इंतजाम हुआ
तस्वीरों पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि यहां के जिम्मेदार नेता और अधिकारी कैमरे के सामने बड़ी-बड़ी डींगे हाँकना तो जानते हैं, लेकिन यहाँ आकर सबकी बोलती बंद हो जाती है। चुनाव के समय मेडिकल कॉलेज को 'संजीवनी' बताने वाले नेता अब चुप हैं।
पानी में स्ट्रेचर खींचने से मरीज को झटके लगते हैं, इन्फेक्शन का खतरा अलग। इमरजेंसी केस में एक-एक मिनट कीमती होता है, लेकिन यहाँ वार्ड तक पहुंचने में ही 10-15 मिनट लग जाते हैं। 108 एंबुलेंस भी परिसर में अंदर तक नहीं आ पाती।
मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से संपर्क किया गया। अधिकारियों ने कहा कि "ड्रेनेज के लिए बजट प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जल्द स्थाई समाधान होगा। लेकिन सवाल ये कि 10 साल में स्थाई समाधान क्यों नहीं निकला। जब इलाज करने वाला मेडिकल कॉलेज खुद 'बीमार' है, तो आम आदमी का इलाज कौन करेगा? अगर वीवीआईपी आता तो क्या यही हाल रहता।