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Protest

साहित्यकार के अपमान पर एलबीएस हिन्दी विभाग ने पारित किया निन्दा प्रस्ताव

✍️ Admin 📅 09 January, 2026 ⏰ 05:01 PM 👁 107 views


गोण्डा 09 जनवरी। लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा कहानीकार मनोज रूपड़ा के अपमान की घटना पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
बुधवार को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ में साहित्य अकादमी और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में  "समकालीन हिंदी कहानी : बदलते जीवन संदर्भ" विषय पर एक परिसंवाद के आयोजन में उद्घाटन सत्र चल रहा था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल अपने उद्बोधन के दौरान विषयांतर करते हुए असंबद्ध विचार प्रस्तुत कर रहे थे। इतने में सामने बैठे हुए कहानीकार मनोज रुपड़ा से अचानक पूछ पड़े कि भाई बोर तो नहीं हो रहे हैं ? कुलपति जी के द्वारा ऐसा पूछे जाने पर मनोज रुपड़ा ने विनम्र लहजे में कहा कि जिस विषय पर परिसंवाद आयोजित है, उस संदर्भ पर बात कीजिए। 

इतना सुनते ही कुलपति भड़क गए और बोल पड़े कि आपको किसने बुलाया है? आप हॉल से बाहर जाइए। आपको तमीज नहीं है। विश्वविद्यालय की परंपरा का ज्ञान नहीं है। सभागार में दबी जुबान से इक्का-दुक्का लोगों द्वारा ऐसी बातें आई कि यह उचित नहीं है। लेकिन सत्ता के मद में चूर कुलपति ने कहा कि जो इनके समर्थन में हों, वे बाहर जा सकते हैं। कहानीकार मनोज रुपड़ा को बाहर निकाल दिया गया; इस घटना की मीडिया और सोशल मीडिया में तीखी आलोचना हो रही है। 

हिंदी विभाग के अध्यक्ष/प्रभारी प्रो. जय शंकर तिवारी ने कहा कि मनोज रुपड़ा तो यूके कथा सम्मान से सम्मानित हिंदी के वरिष्ठ कथाकार हैं।  उनके स्थान पर देश का कोई भी नागरिक होता तो भी यह कृत्य निंदनीय होता। भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को गरिमापूर्ण ढंग से जीने और अभिव्यक्ति का अधिकार देता है। प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के पुनर्वास के लिए तत्पर संवैधानिक व्यवस्था में इतने उच्च पद पर बैठे हुए व्यक्ति द्वारा यह व्यवहार बेहद निंदनीय है। विभाग इसकी घोर भर्त्सना करता है। 
उन्होंने कहा कि होना तो यह चाहिए कि मंच पर बैठे हुए अन्य अतिथि साहित्यकारों को सभा का बहिष्कार कर देना चाहिए। इससे एक लेखक का सम्मान बचा रहता। प्रोफेसर तिवारी ने यह भी कहा कि हिंदी समाज इस मायने में भी विचित्र है कि वह अपने लेखक, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी, कलाकार का सम्मान करना भी नहीं जानता। कुलपति को इस घटना के लिए न केवल सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगनी चाहिए, बल्कि उनके ऊपर यथोचित कार्रवाई भी होनी चाहिए। 
निंदा प्रस्ताव के लिए हुई इस बैठक में विभाग में पवन कुमार सिंह, डॉ. पुष्यमित्र मिश्र, अच्युत शुक्ल, डॉ. मुक्ता टंडन और पिंकी शुक्ला आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे। 

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