दक्षिण भारत में हिन्दी की समृद्ध परम्परा पर होगा विमर्श
गोंडा। लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में पूर्वापर, हिंदी विभाग एवं आई.क्यू.ए.सी. के संयुक्त तत्वावधान में 2 सितंबर को पूर्वापर के अठारहवें अधिवेशन के अंतर्गत “दक्षिण भारत में हिंदी” विषय पर परिसंवाद एवं समलंकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम ललिता शास्त्री सभागार में होगा।
इस अवसर पर दक्षिण भारत से पधार रहे विद्वान साहित्यकार एवं अनुवादक डॉ. आरसु को ‘भाषा सेतु सम्मान’ से तथा अन्य दक्षिण भारतीय साहित्यकारों को पूर्वापर द्वारा ‘साहित्यश्री सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा। डॉ. आरसु पर केंद्रित ‘पूर्वापर’ पत्रिका के विशेषांक सहित कई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
परिसंवाद में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन, साहित्य-सृजन, अनुवाद एवं हिंदी के विकास से जुड़े विविध पहलुओं पर विद्वान विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों से आए विद्वान साहित्यकार एवं अतिथि सहभागिता करेंगे।
आयोजन का उद्देश्य जहाँ एक ओर दक्षिण भारत में हिंदी की समृद्ध परंपरा, उसकी साहित्यिक-सांस्कृतिक भूमिका तथा हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है, वहीं राष्ट्रीय एकता की भावना को दृढ़ता प्रदान करना है।