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रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम, 1.10 लाख करोड़ के खरीद प्रस्ताव को DAC की मंजूरी

✍️ Admin 📅 07 September, 2026 ⏰ 04:53 PM 👁 48 views

भारतीय सेना के लिए केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर (CBRN) रेकी वाहनों, हाई मोबिलिटी वाहनों (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स (MML), एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों (ALH), ट्रॉवेल टैंकों और 'सर्वत्र' ब्रिज सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई.  रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम  CBRN रेकी वाहन: ये वाहन CBRN एजेंटों से दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, निगरानी करने और उन्हें चिह्नित करने में सक्षम होंगे. HMV: ये कठिन क्षेत्रों में परिचालन क्षमताओं, तार्किक सहायता और गतिशीलता को बढ़ाएंगे. MML: इनसे कठिन क्षेत्रों में त्वरित और उत्तरदायी बारूदी सुरंग बिछाने में मदद मिलेगी. ALH: ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए सभी क्षेत्रों व परिचालन स्थितियों में जटिल मिशनों को अंजाम देंगे. ट्रॉवेल टैंक और ब्रिज सिस्टम: इनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में अभियानों के दौरान लड़ाकू टुकड़ियों को रास्ता (कम्पोजिट क्रॉसिंग) प्रदान करने के लिए किया जाएगा. नौसेना के लिए अरुधरा (Arudhra) रडार की खरीद और मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के डिजाइन, विकास व बाद की खरीद के लिए AoN दिया गया. अरुधरा रडार: यह विभिन्न नौसेना हवाई स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा. मरीन गैस टर्बाइन (MGT): युद्धपोत प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) के रूप में यह विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता को कम करेगा. वायु सेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्ध क्षमता को बढ़ाने वाले विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इसके अलावा: ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ): यह विरोधियों के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग होगा.  DEFSAC सिस्टम: डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (DEFSAC) सिस्टम मौजूदा कागज आधारित पहचान पत्रों/पासों/परमिटों को एक इंटरऑपरेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित स्मार्ट कार्ड सिस्टम से बदलेगा. स्वीकृत किए गए कुल AoNs में से लगभग 98% खरीद भारतीय उद्योगों से की जाएगी.  नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है. वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई. रिपोर्टिंग का दायरा- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. - ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की. भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं. पूर्व कार्य अनुभव- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

स्रोत: ABP Hindi

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