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PM मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर खरगे का रिएक्शन, कहा - 'अफसोस है कि...'

✍️ Admin 📅 06 September, 2026 ⏰ 06:08 PM 👁 43 views

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शनिवार (5 सितंबर, 2026) को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में दिए गए संबोधन को लेकर अब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले बयान को लेकर उन पर तीखी टिप्पणी करते हुए निशाना साधा है और आरोप लगाया कि यह देश के युवाओं से शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद करने के मौका था, लेकिन उन्होंने इसे एक बार फिर से राजनीतिक प्रचार में बना दिया.

खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में सवालों से बचने के लिए विपक्ष को साल दर साल एक नई Adjectives देना, ताकि उनकी खुद की नाकामियां छिपी रहे! Adjectives बदलते रहते हैं, पर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां नहीं बदलतीं.

पीएम मोदी को लेकर बोले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार (6 सितंबर, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC में गए. यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था, लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया.’ 

.@narendramodi जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC में गए। यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था। लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया।

मोदी जी की Modus Operandi —

लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए…

— Mallikarjun Kharge (@kharge) September 6, 2026

उन्होंने कहा, ‘मोदी जी की कार्यशैली (Modus Operandi)- लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए विपक्ष को साल दर साल एक नई Adjectives देना, ताकि उनकी खुद की नाकामियां छिपी रहे! नाराज फूफा, दिमागी नक्सल, अर्बन नक्सल, खान मार्केट गैंग, आंदोलनजीवी और परजीवी - Adjectives बदलते रहते हैं, पर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां नहीं बदलतीं.’

आउटरीच की जरूरत आउट ऑफ रीच होने पर पड़ती है- खरगे

खरगे ने कहा, ‘मोदी जी, आउटरीच तभी करनी पड़ती है, जब आप आउट ऑफ रीच (Out of Reach) हो जाते हैं. प्रधानमंत्री जी ने अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाया. देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है. इस रिपोर्ट कार्ड में बेरोजगारी, वर्षों से अटकी सरकारी भर्तियां, पेपर लीक से परेशान विद्यार्थी, महंगी होती शिक्षा, घटते छात्रवृत्ति अवसर और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर बढ़ता दबाव है. छात्रों की गूंज को सुनिए, इधर-उधर की बातों से समाधान नहीं निकलेगा!!’ 

स्रोत: ABP Hindi

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