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राहुल गांधी के दावों की पड़ताल के लिए बनाई 'झूठ की गूंज' वेबसाइट, लॉन्च हुई

✍️ Admin 📅 26 August, 2026 ⏰ 09:26 PM 👁 8 views

अपने हक की मांग करती भारत की नई पीढ़ी GenZ को साधने कांग्रेस-बीजेपी से लेकर अन्य दल भी जुटे हुए हैं. ऐसे में जहां राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर देशभर के शहरों में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं, तो वहीं अब इस प्रोग्राम पर नजर रखने के लिए GenZ क्रिएटर्स ने झूठ की गूंज नाम से एक वेबसाइट बनाई है. यह 26 अगस्त को लॉन्च हो गई है. 

इसका मकसद राहुल गांधी की स्टूडेंट रैलियों में दिए गए बयानों की सच्चाई की जांच करना है. इस वेबसाइट का एक डोमेन भी बना है. जो https://jhoothkigoonj.com/ है. इस वेबसाइट पर लिखा है कि चार रैली, चालीस दावे और एक जवाब.

राहुल के छात्रों की गूंज का जवाब झूठ की गूंज से

यह वेबसाइट जून और अगस्त 2026 के बीच कोट, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रमों में दिए गए 40 बयानों की समीक्षा करती है. यह सरकारी नौकरियों, बेरोजगारी, शिक्षा और क्राइम से जुड़े मुद्दे पर 29 बयानों को गलत और 11 को गुमराह करने वाली बताती है. इसके लिए सरकारी डेटा समेत 134 सोर्स का इस्तेमाल किया गया है. 

इस वेबसाइट को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है. यूजर्स इसे बड़े पैमाने पर शेयर कर रहे हैं. इसके अलावा वेबसाइट में भर्ती के आंकड़े और अपडेटेड सर्वे की जानकारी का इस्तेमाल करके नौकरी के उम्मीदवारों और रिपोर्ट न किए जाने वाली यौन हिंसा के मामलों से जुड़े आंकड़ों को गलत साबित करने वाले उदाहरण भी शामिल हैं. 

एक तरह का फैक्ट चेकिंग प्लेटफॉर्म है
पुणे में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज के दावों की सच्चाई पता करने के लिए यह एक फैक्ट चेकिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है. इस साइट को गुमनाम लोगों, आम लोगों और इंटरनेट यूजर्स (नेटिज्म) की पहल माना जा रहा है. यानी इसे किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि इंटरनेट यूजर्स, राजीनितिक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया पर डिजिटल कंटेंट बनाने वालों ने मिलकर तैयार किया है. इन्हें डिजिटल ऑडियंस या नेटिज्म कहा जाता है. इस ट्रैकर साइट को अगस्त 2026 में शुरू किया गया है. 

इन्फ्लुएंसर्स विवाद के बाद सामने आई, यह वेबसाइट

इस साइट की चर्चा तब से होने लगी है, जब बीजेपी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 25 से 35 हजार रुपये दे रही थी. ताकि, इससे कराए गए डिजिटल प्रचार को जेनजी का असली उत्साह दिखाया जा सके.

इधर, बूम लाइव जैसे स्वतंत्र फैक्ट चेकर्स ने पाया कि इस कार्यक्रम को लेकर दोनों तरफ से गलत जानकारी फैलाई गई. इसमें डिजिटल रूप से बदले गए ऐसे वीडियो शामिल थे, जिनमें झूठा दावा किया गया कि भीड़ मोदी के समर्थन में नारे लगा रही थी. साथ ही ऐसी वायरल पोस्ट भी थीं, जिनमें रैली में भारी भीड़ दिखाने के लिए मेक्सिको के पुराने इंटरनेशनल स्टेडियम के फुटेज का गलत इस्तेमाल किया गया था. 

स्रोत: ABP Hindi

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