14 बच्चे, 32 कैमरे और मारपीट के आरोप: कैलिफ़ोर्निया की आलीशान हवेली में क्या मिला
मई 2025 में दो महीने के एक बच्चे को सिर पर चोट लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया. बच्चे का नाम वाल्टर था और वह कैलिफ़ोर्निया के अमीर इलाक़े आर्केडिया में रहता था. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक़, ख़ुद को वाल्टर की मां बताने वाली महिला ने कहा कि बच्चा ग़लती से बिस्तर से गिर गया था. लेकिन डॉक्टर को यह बात सही नहीं लगी. उनका कहना था कि वाल्टर की चोटें बिस्तर से गिरने के बजाय किसी कार दुर्घटना में लगी चोटों जैसी थीं. ऐसी चोटें बच्चे को तेज़ी से हिलाने पर भी लग सकती थीं. डॉक्टर को बच्चे के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का शक हुआ. इसके बाद पुलिस ने उस आलीशान हवेली की तलाशी ली, जहां वाल्टर रहता था. पुलिस ने उसके माता-पिता, 66 साल के गुओजुन शुआन और 39 साल की सिल्विया झांग को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया. अभियोजकों के मुताबिक़, हवेली के भीतर जो मिला, उसे "ख़ौफ़ का घर" ही कहा जा सकता था. पूरी हवेली में कैमरे लगे थे और अंदर कमरों का जाल था. वहां छह महीने से तीन साल तक की उम्र के 14 बच्चे रहते थे, जिनका जन्म सरोगेसी से हुआ था. अभियोजकों का आरोप है कि इन बच्चों को हर दिन पीटा जाता था. बाद में अधिकारियों को पता चला कि हवेली के पते पर एक सरोगेसी एजेंसी भी रजिस्टर्ड थी. यह एजेंसी शुआन और झांग चलाते थे और इसके ज़रिए उन्होंने सरोगेसी के लिए कई महिलाओं को चुना था. इस साल अक्तूबर में दंपति को दोबारा गिरफ़्तार किया गया. उन पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया है. दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया है और वे अभी हिरासत में हैं. दोनों में से हर एक के लिए दो करोड़ डॉलर यानी डेढ़ करोड़ पाउंड की ज़मानत राशि तय की गई है. दोषी पाए जाने पर शुआन को अधिकतम 17 साल और चार महीने की जेल हो सकती है. वहीं, झांग को अधिकतम 11 साल और आठ महीने की सज़ा हो सकती है. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. शुआन और झांग अप्रैल 2021 से आर्केडिया की इसी हवेली में रह रहे थे, जहां पुलिस को सरोगेसी से जन्मे 14 बच्चे मिले. ऑनलाइन प्रॉपर्टी लिस्टिंग के मुताबिक़, उसी साल 10 हज़ार वर्ग फ़ुट यानी 929 वर्ग मीटर में बनी यह हवेली 33 लाख डॉलर यानी 24 लाख 80 हज़ार पाउंड में बिकी थी. इस हवेली में नौ बेडरूम, 11 बाथरूम और गर्म पानी वाला एक स्विमिंग पूल है. लॉस एंजेलिस के पूर्वी हिस्से में बसे इस अमीर इलाक़े को स्थानीय मीडिया ने "चाइनीज़ बेवर्ली हिल्स" नाम दिया है. अमेरिका की सबसे हाल की जनगणना के मुताबिक़, यहां की क़रीब 60 फ़ीसदी आबादी एशियाई और मुख्य रूप से चीनी मूल की है. यहां रहने वाले परिवारों की आमदनी भी अमेरिका के अधिकतर परिवारों से काफ़ी ज़्यादा है. लेकिन इस आलीशान हवेली के भीतर बच्चों की ज़िंदगी कैसी थी, इसे लेकर सरकारी वकीलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप तय किए जाने के बाद अक्तूबर में हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में लॉस एंजेलिस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी नेथन होखमन ने कहा, "सरोगेसी की इस प्रक्रिया के ज़रिए इतने छोटे बच्चों को इस घर में लाया गया था. इन बच्चों के लिए इस घर को केवल 'ख़ौफ़ का घर' ही कहा जा सकता है." शिकायत के मुताबिक़, हवेली में 32 कैमरे लगाए गए थे. इन कैमरों की रिकॉर्डिंग में छोटे बच्चे कई-कई घंटे तक मेज़ों के पास बैठे दिखाई दिए. हवेली के एक कमरे में कैमरा नहीं लगा था. लेकिन दूसरे कैमरों की रिकॉर्डिंग में बच्चों की देखभाल करने वाली महिलाएं उन्हें उस कमरे के भीतर ले जाती दिखाई दीं. इसके बाद उस कमरे के भीतर से बच्चों के चीखने की आवाज़ें सुनाई देती थीं. इसी हवेली में रहने वाले दो महीने के वाल्टर की चोट के बाद यह पूरा मामला सामने आया था. सरकारी वकीलों का दावा है कि वाल्टर को ये चोटें उसकी देखभाल करने वाली चुनमेई ली नाम की महिला ने पहुंचाई थीं. ली पर ऐसी परिस्थितियों में बच्चे के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है, जिनमें उसे गंभीर चोट लग सकती थी या उसकी मौत हो सकती थी. ली अभी फ़रार हैं और उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है. हालांकि, दंपति के वकील मिशेल क्रेम्स ने आरोपों को पेश किए जाने के तरीक़े पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने जो सबूत देखे हैं, उनके आधार पर इन आरोपों को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है. बीबीसी के अमेरिकी समाचार सहयोगी सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक़, क्रेम्स ने कहा कि उनके मुवक्किल शुआन निर्दोष हैं. सीबीएस न्यूज़ ने वकील के हवाले से कहा, "बड़ा परिवार रखने के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है." हवेली के भीतर इतने सारे बच्चे मिलने के बाद एक बड़ा सवाल यह उठा कि ये सभी बच्चे इस दंपति के पास कैसे आए. इस सवाल का जवाब अमेरिका में सरोगेसी की व्यवस्था और उसके लिए दूसरे देशों से आने वाले लोगों से जुड़ा है. अमेरिका दुनिया में सरोगेसी के प्रमुख ठिकानों में शामिल हो गया है. सरोगेसी का मतलब है कि कोई महिला किसी दूसरे व्यक्ति या दंपति के लिए अपने गर्भ में बच्चा रखती है और उसे जन्म देती है. अमेरिका में सरोगेसी से जुड़े आंकड़ों पर 2024 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक़, 2014 से 2020 के बीच सरोगेसी से माता-पिता बनने वाले लोगों में क़रीब एक-तिहाई दूसरे देशों से आए थे. चीन में सरोगेसी पर रोक है. अध्ययन के मुताबिक़, अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों में सबसे ज़्यादा लोग चीन से आए थे. विदेशों से अमेरिका आने वाले और सरोगेसी के ज़रिए माता-पिता बनने की इच्छा रखने वालों में क़रीब 42 फ़ीसदी चीनी थे. इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका में प्रजनन तकनीक से जुड़ी ऐसी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिन तक चीन के बहुत से लोगों की अपने देश में आसानी से पहुंच नहीं है. चीन में अकेली महिलाओं और एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को अक्सर आईवीएफ़ और अपने अंडाणु सुरक्षित रखने जैसी सुविधाएं हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. कुछ ऐसे दंपति भी हैं, जिन पर चीन की कई दशक तक चली एक बच्चे की नीति का असर पड़ा. साल 2016 में यह नीति ख़त्म हुई, लेकिन तब तक उनमें से कुछ लोगों के लिए ख़ुद गर्भधारण करना शारीरिक रूप से मुश्किल हो चुका था. इस कारण कुछ लोगों ने दूसरे देशों में सरोगेसी का रास्ता चुना. शुआन और झांग ने भी बच्चे पैदा करने के लिए कई महिलाओं की मदद ली. लेकिन इस मामले में सरोगेसी एजेंसी और दंपति के बीच का संबंध सवालों के घेरे में है. अदालती दस्तावेज़ बताते हैं कि शुआन और झांग के लिए बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को शुरुआत में उनकी मांग पर बहुत शक नहीं हुआ था. इनमें से कई महिलाओं को 'मार्क सरोगेसी' नाम की एजेंसी के ज़रिए चुना गया था. आमतौर पर सरोगेसी एजेंसी को माता-पिता और बच्चे को जन्म देने वाली महिला से अलग एक तीसरा पक्ष माना जाता है. लेकिन बाद में पता चला कि मार्क सरोगेसी को शुआन और झांग ही चलाते थे. दंपति के ख़िलाफ़ सरोगेसी से जुड़ी कुछ महिलाओं की ओर से दायर दो मुक़दमों के मुताबिक़, यह बात हमेशा महिलाओं को नहीं बताई गई थी. कंपनी के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़ में सिल्विया झांग को मार्क सरोगेसी की मैनेजर बताया गया है. उसी दस्तावेज़ में आर्केडिया की उस हवेली को कंपनी का पता बताया गया है, जहां पुलिस को बच्चे मिले थे. 16 अक्तूबर को हुई सुनवाई में डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मैकेंज़ी कैमरन तैमूरी ने जज से कहा कि शुआन और झांग घर से इस सरोगेसी एजेंसी को चलाते थे. उनके मुताबिक़, इस एजेंसी ने कभी किसी दूसरे व्यक्ति या दंपति को सरोगेट महिला से नहीं मिलवाया. दंपति के लिए बच्चों को जन्म देने वाली कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें सरोगेसी की इस व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी. इनमें से एक महिला ट्रॉन्डेरिका जेम्स ने 2025 में दंपति के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया. उन्होंने धोखाधड़ी और जानबूझकर ग़लत जानकारी देने समेत कई आरोप लगाए और हर्जाना मांगा. जेम्स का आरोप है कि शुरुआती दौर में झांग ने मार्क सरोगेसी से अपने संबंध की जानकारी नहीं दी थी. उनका कहना है कि अगर उन्हें इस व्यवस्था की सच्चाई पता होती, तो वह इसके लिए आगे नहीं बढ़तीं. जेम्स ने इंटरव्यू के लिए बीबीसी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया. बाद में दंपति ने इस मुक़दमे को ख़ारिज करने की मांग की. उनका कहना था कि जेम्स के पास मुक़दमा दायर करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है. यह मामला अभी अदालत में लंबित है. इसके अलावा पांच अन्य महिलाओं ने भी अगस्त में गुओजुन शुआन और सिल्विया झांग के ख़िलाफ़ एक अलग मुक़दमा दायर किया. इन महिलाओं के नाम स्टेसी रेलिन किंग, एवलिन सेनोलोस अरेजा, कायला इलियट, हैली हर्नांडेज़ और वैनिटी मैकगवर्न हैं. इन महिलाओं ने भी अपने साथ इसी तरह का व्यवहार होने का आरोप लगाया. मुक़दमे में आरोप लगाया गया है कि झांग ने उन्हें एजेंसी से अपने और शुआन के संबंधों के बारे में नहीं बताया. उन्होंने यह जानकारी भी नहीं दी कि उनके पहले से कितने बच्चे हैं. महिलाओं की शिकायत में कहा गया, "हर महिला को यह भरोसा दिलाया गया कि दंपति के लिए बच्चे को गर्भ में रखने वाली वह अकेली महिला है और वह एक परिवार को उनका इकलौता और बहुत प्यारा बच्चा पाने में मदद कर रही है." शुआन और झांग ने केवल अपनी एजेंसी के ज़रिए ही सरोगेसी की व्यवस्था नहीं की थी. दंपति ने कैलिफ़ोर्निया की 'बेबीट्री सरोगेसी' नाम की एक बाहरी एजेंसी की सेवाएं भी ली थीं. बेबीट्री के संस्थापक पैट्रिक यू ने बीबीसी को बताया कि शुआन ने 2018 में उनसे संपर्क किया था. यू के मुताबिक़, शुआन ने उनसे कहा था कि वह बड़ा परिवार चाहते हैं. एजेंसी ने कई महिलाओं से शुआन का संपर्क कराया. इन महिलाओं ने कम से कम चार बच्चों को जन्म दिया. यू ने कहा, "जब हमने समाचारों में देखा कि उनके ख़िलाफ़ जांच हो रही है, तभी मुझे पहली बार पता चला कि उनके इतने सारे बच्चे हैं. हमने तुरंत उनके साथ काम करना बंद कर दिया." लेकिन तब तक एजेंसी के ज़रिए एक और महिला सरोगेसी की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुकी थी. एजेंसी ने 2024 में इस महिला से दंपति का संपर्क कराया था. पिछले साल मई में जब वाल्टर की चोटों की ख़बर सामने आई, तब वह पहले ही गर्भवती हो चुकी थीं. बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार की पुलिस जांच के दौरान अधिकारियों ने दंपति के 21 बच्चों को सरकारी संरक्षण में रख दिया था. यू ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने दंपति और उस समय हाल ही में गर्भवती हुई महिला की मुलाक़ात कराई थी. उनके मुताबिक़, दंपति ने पूरे विश्वास के साथ महिला को भरोसा दिलाया कि वे बच्चों की अच्छी तरह देखभाल करते हैं. इसके बाद महिला ने सरोगेसी की प्रक्रिया जारी रखने का फ़ैसला किया और 2026 की शुरुआत में एक बच्चे को जन्म दिया. यह मामला सामने आने के बाद सरोगेसी से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठे. ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी में रिप्रोडक्टिव क्लिनिकल साइंस की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉक्टर लियांग यू के मुताबिक़, क़ानून में इस बात की कोई सीमा तय नहीं है कि माता-पिता बनने की इच्छा रखने वाला कोई व्यक्ति कितनी बार सरोगेसी के लिए आवेदन कर सकता है. क़ानून के तहत ऐसी जानकारी देने की भी कोई बाध्यता नहीं है. डॉक्टर लियांग 'अमेरिकन सोसाइटी फ़ॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन' के 'चाइनीज़ स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप' की उपाध्यक्ष भी हैं. उनका कहना है कि कुछ बैंक या एजेंसियां अपने स्तर पर ऐसी शर्तें रख सकती हैं, लेकिन क़ानून में इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. इसका मतलब है कि कोई दंपति एक ही समय में कई अलग-अलग एजेंसियों के साथ काम कर सकता है. वह हर एजेंसी को अपनी पूरी जानकारी दिए बिना भी ऐसा कर सकता है. डॉक्टर लियांग कहती हैं, "इससे क़ानून और इस कारोबार के नियमों में एक ऐसा हिस्सा बन जाता है, जिस पर स्थिति साफ़ नहीं है." उन्होंने कहा कि इस अस्पष्ट हिस्से के कारण उन्होंने अमीर ग्राहकों से जुड़े कई ऐसे मामले देखे हैं. इनमें केवल चीन के लोग शामिल नहीं हैं. लेकिन निजता की सुरक्षा और डॉक्टरों व फ़र्टिलिटी क्लीनिक के साथ किए गए गोपनीयता समझौतों के कारण अधिकतर मामले लोगों के सामने नहीं आते. वह कहती हैं, "दूसरे शब्दों में कहें तो शुआन जैसा व्यवहार पहले भी हो चुका है." बीबीसी ने इन आरोपों पर शुआन और झांग का पक्ष जानने के लिए उनके वकीलों से संपर्क किया. दोनों का प्रतिनिधित्व करने वाले मिशेल क्रेम्स ने कोई जवाब नहीं दिया. झांग का प्रतिनिधित्व करने वाले मैट कूहानिम ने कहा कि इस मामले का जवाब उचित क़ानूनी प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा. इतने बड़े परिवार और कई सरोगेसी एजेंसियों से संबंधों के बीच दंपति की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी जांच के दौरान सामने आई. 16 अक्तूबर को हुई सुनवाई में तैमूरी ने जज से कहा कि 2025 में दंपति की कुल संपत्ति 10 करोड़ डॉलर यानी साढ़े सात करोड़ पाउंड से काफ़ी अधिक थी. तैमूरी ने यह भी बताया कि शुआन के तीन पासपोर्ट मिले हैं. इनमें मेक्सिको, चीन और अमेरिका के पासपोर्ट शामिल हैं. चीन के स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, शुआन का जन्म 1959 में पूर्वी चीन के झेजियांग में हुआ था. उन्होंने 18 साल की उम्र में उरुमची की एक सरकारी किराना कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में काम शुरू किया. साल 1997 में वह उरुमची की पीपल्स कांग्रेस के प्रतिनिधि बने. इसके बाद 2008 में वह शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र के प्रतिनिधि बने. प्रांतीय स्तर की विधायी संस्था में यह पद किसी राज्य के प्रतिनिधि जैसा था. अमेरिका जाने के बाद भी सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता ख़त्म नहीं हुई. वह 'यूएस शिनजियांग चैंबर ऑफ़ कॉमर्स' के अध्यक्ष और 'चाइना अमेरिका फ़ेडरेशन' के उपाध्यक्ष बने. वह 2019 से सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगे थे. बीबीसी की देखी एक तस्वीर में शुआन 2022 के एक कार्यक्रम में आर्केडिया की पूर्व मेयर आइलीन वांग का हाथ थामे दिखाई दिए. उसी साल मेयर पद के चुनाव प्रचार के दौरान शुआन ने अपने नाम वाली एक कंपनी के ज़रिए वांग को 4,900 डॉलर का चंदा दिया था. अमेरिकी न्याय विभाग ने इस साल मई में वांग पर चीन की अवैध एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया था. इसके बाद उन्होंने आर्केडिया के मेयर पद से इस्तीफ़ा दे दिया. वांग ने अपने ख़िलाफ़ लगाए गए गंभीर अपराध के आरोप को स्वीकार कर लिया था. झांग के बारे में कम जानकारी उपलब्ध है. वह रियल एस्टेट एजेंट के तौर पर काम करती थीं. अदालती दस्तावेज़ों के मुताबिक़, शुआन और झांग ने कभी शादी नहीं की थी. झांग की शादी किसी दूसरे व्यक्ति से हुई थी, जिनसे 2022 में उनका तलाक़ हो गया था. दंपति के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों के बीच सबसे बड़ा सवाल उन बच्चों का है, जो इस परिवार से जुड़े हैं. इस महीने की शुरुआत में हुई सुनवाई में तैमूरी ने जज को बताया कि इस परिवार से कुल 26 बच्चे जुड़े हैं. शिकायत के मुताबिक़, मई 2025 तक झांग ने कुल 21 बच्चों की जानकारी एक स्प्रेडशीट में दर्ज कर रखी थी. इन बच्चों को दंपति के पास से हटाकर सरकारी संरक्षण में रखा गया है. बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ ने जनवरी 2026 में बताया था कि इसके बाद पांच और बच्चों का जन्म हुआ. सरोगेसी से जन्मी एक बच्ची अब भी वर्जीनिया में उसे जन्म देने वाली महिला के साथ रह रही है. इस महिला का नाम मेलिसा एप्स है और दंपति ने उन्हें सरोगेसी के लिए चुना था. पिछले साल जब एप्स को जांच के बारे में पता चला, तब वह गर्भवती थीं. इसके बाद उन्होंने बच्ची को अपने पास रखने का फ़ैसला किया. दंपति ने एप्स पर सरोगेसी के समझौते को तोड़ने का आरोप लगाते हुए मुक़दमा दायर किया. उन्होंने बच्ची को वापस देने के साथ एप्स से 10 लाख डॉलर की मांग भी की. शुरुआत में एप्स के पास कोई वकील नहीं था और उन्हें अदालत में अपना पक्ष ख़ुद रखना पड़ा. बाद में वर्जीनिया लीगल एड सोसाइटी की वकील पामेला डीकैंप ने उनका मामला अपने हाथ में लिया. एप्स ने बीबीसी को इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया. बीबीसी को दिए बयान में उनकी वकील डीकैंप ने कहा कि वे "इन छोटे बच्चों को न्याय दिलाने के लिए लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की कोशिशों के लिए बहुत आभारी हैं." यह मुक़दमा अगले साल मार्च तक जारी रहेगा. बच्ची सामाजिक सेवा विभाग के संरक्षण में है, लेकिन अभी एप्स के साथ रह रही है. हाल में उसने अपना पहला जन्मदिन मनाया. डीकैंप ने कहा, "वह वर्जीनिया में सुरक्षित और ख़ुश है. हमें पूरा भरोसा है कि आगे भी वह ऐसी ही रहेगी." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
स्रोत: BBC Hindi