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Basic Education

निजी स्कूल अभिभावकों की जेब पर डाल रहे डाका कुंभकर्णी निद्रा में जिम्मेदार

✍️ Admin 📅 16 August, 2026 ⏰ 10:06 PM 👁 168 views

बालपुर गोंडा। शिक्षा का नया सत्र शुरु हो गया है।अभिभावक मंहगे फीस और कापी किताब को लेकर परेशान हो रहे और प्रशासन को कोसते है कि निजी स्कूलो पर अंकुश नही लगा पा रहे है। जिले  में जगह-जगह गली-गली और गांव- गांव में मकड़जाल की तरह निजी प्राइवेट स्कूल खुले हुए हैं और लोक लुभावन स्लोगन के साथ बच्चो का दखिला कराने के लिए मान मनौव्वल करके बच्चो का दखिला करा लेने के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावको का शोषण चालू कर दिया जाता  है। अभिभावकों को जमकर लूटा जा रहा है। निजी पब्लिक स्कूलों की लूट ने अभिभावकों को मुसीबत में डाल दिया है। 

मध्यम वर्गीय व्यक्ति पर जब हजारों रुपये की कॉपी-किताबों का बोझ पड़ता है तो वह परेशान होकर रह जाता है। 20 वाली कॉपी 80 रुपये और 400 वाले जूते 1000 रुपये में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। 100 रुपये वाला कॉपी और किताबों का सेट 4 हजार रुपये से 8 हजार रुपये तक बेचा जा रहा है। ढाई सौ रुपये वाली पैंट 700 और 200 रुपये वाली शर्ट 500 रुपये में बेची जा रही है।अप्रैल में नए सत्र की शुरुआत के साथ जुलाई अगस्त माह में भी अभिभावकों का संघर्ष शुरू हो जाता है। स्कूल की फीस, यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबों के अलावा ड्रेस, जूता-मोजा,बैग आदि पर भारी भरकम खर्च अभिभावकों की जेब खाली कर रहा है।

 यहां तक कि स्कूलों की ओर से किताबों की सूची तक दुकानदार ही दे रहे हैं।कॉपी-किताबों के इस सेट में कई ऐसी भी किताबें हैं, जो न कभी खोली जानी हैं और न ही उनका पाठ्यक्रम से कोई सीधा नाता है। मनमानी की इस चक्की में अभिभावकों के पिसने के बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में सब कुछ होने के बाद भी न तो इस पर अंकुश लगाने की पहल की जा रही है और न कोई कार्रवाई ही की जा रही है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुकुरमुत्तों की तरह फैले कॉन्वेंट और मांटेसरी स्कूलों में अलग-अलग भारी फीस वसूली जाती है। कोई भी ऐसा स्कूल नहीं है जो माह में एक हजार से कम फीस वसूल करता हो और कई बडे स्कूल तो ऐसे जहां प्रति बच्चे 3000 हजार रुपये से 4500 सौ रुपये तक फीस प्रतिमाह वसूल की जाती है। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में कान्वेंट और मांटेसरी स्कूल का बोर्ड लगाकर 1200 से 1500 रुपये प्रति बच्चे फीस वसूल की जा रही है। खास बात यह है कि अनेक  स्कूलों में वहीं से ड्रेस, कॉपी, किताब समेत सभी स्टेशनरी का सामान भी खरीदना पड़ रहा है।

इन स्कूलों में पढ़ाई हो या न हो, लेकिन फीस की वसूली मनमानी की जा रही है। स्कूलों के एकाधिकार के चलते संबंधित स्कूल द्वारा अधिकृत विक्रेता के पास ही सामान मिलने से अभिभावकों को 20-25 प्रतिशत तक मिलने वाली छूट भी नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही खरीदारी करनी पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन गारमेंट्स की दुकानों से महंगे ड्रेस खरीदारी करवा रहे हैं।अभिवाक अंचल,देव नरायन चौहान, दिनेश, राज कुमार, गुरु प्रसाद, अनिल कुमार, प्रदीप वर्मा,दिनेश तिवारी आदि लोगो ने कहा प्रशासन के ढुल-मुल नीति के चलते स्कूल प्रबंधन मन मानी कर रहा है।

बाजार में 40 रुपये एमआरपी पर 10 प्रतिशत डिस्काउंट पर मिलने वाली 36 रुपये की कॉपी के पुस्तक विक्रेता 80 रुपये वसूल रहे हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी प्रैक्टिकल कॉपी 100 रुपये में दी जा रही है। इनकी वास्तविक कीमत 60 रुपये से अधिक नहीं है। कक्षा 7 की कंप्यूटर की किताब की कीमत 500 के पार पहुंच गई है।स्कूल के प्रबंधको ने दुकानदारों से मोटी रकम लेकर अभिभावकों का जमकर शोषण करते है।

कान्वेंट और मांटेसरी स्कूल प्रबन्धको के स्तर से किताबों का चयन किए जाने के कारण सरकारी किताबें बाजार से नया सत्र शुरू होने से पहले ही गायब हो गई हैं। इसकी वजह यह भी है कि ये किताबें दुकानदारों को प्रिंट रेट पर मिल रही हैं। इन किताबों को बेचने में दुकानदारों को अधिक फायदा हैं। इसलिए सरकारी किताबें बाजारों में नहीं दिखाई पड़ रही हैं। अगर सरकारी किताबें या एनसीआरटी  की किताबें चला दी जाएं तो अभिभावकों का बोझ कुछ हद तक कम हो जाएगा।

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